चिदंवरम क्यों बोले कि बंद करो नीति आयोग, मनमोहन के साथ ऐसा क्या कर दिया आयोग ने

केंद्र की पिछली सरकार मतलब मनमोहन सिंह की सरकार की जीडीपी ग्रोथ का डेटा जारी किया है. इसमें मनमोहन सरकार की जीडीपी का ग्रोथ रेट ही कम हो गया है. यह डेटा 10 साल का जारी किया गया है. डेटा को नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार और चीफ स्टेटेशियन प्रवीण श्रीवास्तव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जारी किया है. सेंट्रल चीफ स्टेटिक्स ऑफिस (CSO) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक मनमोहन सिंह के समय में 2010-11 वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ 10.3 फीसदी के बजाए 8.5 फीसदी थी. वहीं वित्त वर्ष 2012 के लिए जीडीपी ग्रोथ को 6.6 फीसदी से घटाकर 5.2 फीसदी कर दिया गया है. दरअसल अब जीडीपी ग्रोथ को निकालने का नया फॉर्मूला बनाया गया है. इस फॉर्मूले के मुताबिक मनमोहन सरकार का जीडीपी ग्रोथ रेट कम हो गया है.

केंद्र की मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार के दस साल के कार्यकाल के अधिकांश वर्षों के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े घटा दिए हैं. जिसकी वजह से यूपीए सरकार के दौरान जीडीपी के आंकड़ों में एक से दो फीसदी से ज्यादा की कमी आ गई. पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने आंकड़े जारी करने वाले नीति आयोग पर हमला बोलते हुए कहा है कि इस बेकार संस्था को बंद कर दिया जाना चाहिए. 

वित्तवर्ष 2006 में पुरानी सीरीज के हिसाब से 9.3 फीसदी जीडीपी ग्रोथ थी जो नई सीरीज में 7.9 फीसदी है. वहीं वित्तवर्ष 2007 में पुरानी सीरीज के हिसाब से जीडीपी ग्रोथ 9.3 फीसदी थी वो घटकर 8.1 फीसदी हो गई. वित्तवर्ष 2008 में पुरानी सीरीज में जीडीपी 9.8 फीसदी था जो नई सीरीज में 7.7 फीसदी हो गई. वित्तवर्ष 2009 में जीडीपी की दर पुरानी सीरीज में 3.9 फीसदी और नई सीरीज में 3.1 फीसदी है. इसी तरह वित्तवर्ष 2010 में पुरानी सीरीज के हिसाब से जीडीपी की दर 8.5 फीसदी थी जो नई सीरीज में 7.9 फीसदी हो गई. वित्तवर्ष 2011 में पुरानी सीरीज के हिसाब से जीडीपी की दर 10.3 फीसदी थी जो नई सीरीज में 8.5 फीसदी हो गई. इसी तरह वित्तवर्ष 2012 में जीडीपी की दर पुरानी सीरीज के हिसाब से 6.6 फीसदी थी जो 5.2 फीसदी हो गई. इस दौरान यूपीए का कार्यकाल था.

 

इन आंकडों में ताजा सर्वे और सेंसस के डेटा को शामिल किया गया है. इसके अलावा इसमें नई सीरीज के रिटेल और थोक महंगाई के आंकड़े भी जोड़े गए हैं. इसमें स्टॉक ब्रोकर, म्यूचुअल फंड कंपनी, सेबी, पीएफआरडीए और आईआरडीए को भी शामिल किया गया है. 2011-12 सीरीज के हिसाब से वित्तवर्ष 2013 के लिए जीडीपी 5.5 फीसदी, वित्तवर्ष 2014 के लिए 6.4 फीसदी है. नई सीरीज के हिसाब से वित्तवर्ष 2015 के लिए जीडीपी 7.4 फीसदी, वित्तवर्ष 2016 के लिए 8.2 फीसदी और वित्तवर्ष 2017 के लिए 7.1 फीसदी है.