कश्मीर में युद्ध की झूठी खबरें क्यों दिखा रहा है मीडिया ?

मीडिया में एक तबका ऐसा भी है जो हर दिन हर रात इस कामना के साथ जी रहा है कि भारत का पाकिस्तान के बाद एक बार युद्ध हो जाए. युद्द न होतो कम से कम बॉर्डर पर गोलियां ही चलने लगें.  मीडिया के इस तबके ने अफवाह और तनाव फैलाने में पिछने 9 दिन में कोई कसर नहीं छोड़ी. लेकिन अब सरकार ने इनके इरादों पर एक बार फिर पानी फेरा है. आपको बताते हैं कि कैसी अफवाहें मीडिया पर फैलाई गईं. और किस तरह उन्हें पेश किया गया.

कश्मीर में सेना का जमाव

एक तो ये लोग सैनिक और सिपाही का अंतर नहीं जानते. सीआरपीएफ हो , बीएसएफ हो, आईटीबीपी हो या कोई और संगठन, मीडिया के इन लोगों को सिर्फ आर्मी शब्द याद है. मिलिट्री याद है. वो सबको मिलिट्री मानते हैं और माहौल गरमाने की कोशिश करते हैं.

कल जब रिजर्व बलों की 100 कंपनियां कश्मीर रवाना हुईं तो इन कथित देश भक्तों ने पाकिस्तान का काम आसान करते हुए मीडिया में ऐसा माहौल बनाया जैसे कि अब युद्ध होने ही वाला है और सीमा पर फौज रवाना हो चुकी है.

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कल तक इसे खबर कहने वाले मीडिया के लोक अब इसे अफवाह बता रहे हैं कल इसे खबर की तरह पेश किया कहा गया कि कश्मीर में युद्ध की आहट है. न तो ये ये जानते कि बॉर्डर पर लड़ने आर्मी जाती है ना की रिजर्व पुलिस फोर्स या कोई और पैरा मिलिट्री फोर्स लेकिन कंपनियां देखीं और उड़ पड़े.

अब जम्मू कश्मीर के राज्यपाल ने इनके मुंह पर ताला लगाया है. उन्होनें कहा कि अगले हफ्ते फिर 100 कंपनियां बुलाएंगे. लेकिन ये युद्ध के लिए नहीं है आंतरिक सुरक्षा के लिए है. लोकसभा चुनाव आ रहा है और ऐसे में आतंकवादी हमले के बढ़े खतरे के कारण अडिशनल पुलिस फोर्स की जरूरत होगी. ये रिजर्व पुलिस होती है न कि आरमी . अब मुंह लटकाए बैठे हैं और कह रहे हैं कि अफवाह थी.

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पाकिस्तान को फायदा

इन हरकतों से पाकिस्तान को फायदा मिल रहा है. उसे सीमा पर सेना की जमावट बढ़ाने का मौका मिल गया है. वो सिक्योरिटी पर तरह तरह की बैठकें बुला रहा है. और अपनी तैयारी मजबूत कर रहा है जबकि भारत की तरफ से ऐसा  कुछ है ही नहीं.

पेट्रोल और की कमी की झूठी खबर

कश्मीर की खबरें इस तबके ने ये कहकर बढ़ा चढ़ा कर छापीं कि वहां युद्ध के लिए दवाओं और  रसद को रिजर्व किया जा रहा है.

 राज्यपाल ने इसका भी खंडन किया है. राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि पिछले कई दिन से नैशनल हाइवे बंद होने से एलपीजी का स्टॉक खत्म हो गया है. इससे जम्मू से श्रीनगर सप्लाइ नहीं पहुंच रहीं. सरकार कश्मीर तक सामान पहुंचाने की कोशिश कर रही है.  जाहिर बात है इससे हर चीज़ की किल्लत है . लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि चीज़ें युद्द के मद्देनज़र बचाकर रखी जा रही हैं.

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उन्होंने काहा  कश्मीर के डिविजनल कमिश्नर ने पेट्रोल और डीजल सप्लाइ को राशन कर दिया है ताकि बची हुई सप्लाइ को आपातकाल की स्थिति में इस्तेमाल किया जा सके. घाटी में स्टॉक बढ़ाने के लिए सरकार कदम उठा रही है. लोगों को विश्वास करना चाहिए कि यह कमी के हालात से निपटने की कोशिश है. यही बात दवाइयों के साथ भी है.

इसका मतलब ये नहीं है कि युद्ध की तैयारी है. भैया आर्मी को पेट्रोल भरवान न तो पेट्रोलपंप पर आना पड़ता है न जिला अस्पताल से दवा लेने. एक झटके में दो दिन के नोटिस पर जितना चाहे पेट्रोल हवाई मार्ग से आर्मी कैंप में पहुंच सकता है . ऐसे ही दवाइयां जितनी चाहे देश के किसी भी हिस्से से आ सकती हैं . सरकारी अस्पतालों की दवा बचाने से क्या होगा . ये तो उंट के मुंह में ज़ीरा भी है.

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