आधार पर सुप्रीम फैसला, बच्चों के लिए आधार ज़रूरी नहीं, बैंक अकाऊंट में ज़रूरत नहीं

फैसले की खास बातें

  • – बैंक अकाउंट से मोबाइल लिंक करना जरूरी नहीं.
  • – स्कूलों में एडमिशन के लिए आधार जरूरी नहीं.
  • – बोर्ड एग्जाम के लिए आधार जरूरी नहीं

लंबे समय के उतार चढ़ाव के बाद आखिर सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड पर अपना फैसला सुना ही दिया. कोर्ट ने आधार पर फैसले में कहा कि बैंक अकाउंट और मोबाइल से आधार लिंक करना बिल्कुल जरूरी नहीं है. लेकिन आधार कार्ड को पैन से जोड़ना जरूरी है.
कोर्ट ने कहा- किसी जानकारी का जारी होने क्या राष्ट्रहित में है? ये उच्च स्तर पर तय हो. जानकारी जारी करने का फैसला लेने में हाई कोर्ट जज की भी भूमिका हो. आधार एक हद तक निजता में दखल है लेकिन ज़रूरत को देखना होगा. कोर्ट ने माना कि आधार से समाज को फायदा हो रहा है.

कोर्ट ने ये भी कहा कि आधार को वित्त विधेयक की तरह पास किए जाने में कुछ गलत नहीं है तो वहीं किसी ज़रूरतमंद को प्रमाणीकरण (बायोमेट्रिक की पुष्टि न हो पाना) की कमी के चलते लाभ से वंचित न किया जाए.

फैसले में कहा गया कि प्राइवेट कंपनी बायोमैट्रिक डेटा साझा नहीं कर सकते हैं. इसके अलावा CBSE और NEET के लिए आधार को अनिवार्य कर दिया. स्कूल भी एडमिशन के लिए लिए आधार कार्ड को अनिवार्य तौर पर नहीं मांग सकते हैं.

इसके लिए अवैध प्रवासियों को आधार नहीं दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि इसके जरिए आधार से हाशिए पर जी रहे लोगों को सुविधा हो रही है.

बता दें कि आधार एक्ट की धारा 57 को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है. इसका मतलब ये हुआ कि कोई भी निजी कंपनी या कोई शख्स आपकी पहचान के लिए आपसे आधार की डिमांड नहीं कर सकता.

इससे पहले आधार लिंक करना जरूरी था

सरकार ने कई सारी योजनाओं के लिए आधार को अनिवार्य कर दिया था. बैंक अपने ग्राहकों से अलग अलग तारीख को खाते को आधार से लिंक कराने को कह रही थी. वहीं रेवेन्यू डिपार्टमेंट द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक ये कहा गया था कि अंतिम तिथि तक अगर आधार को बैंक खाते से लिंक नहीं कराया जाता तो अकाउंट बंद भी किया जा सकता था. लेकिन अब इस फैसले के बाद न तो आपको अपना मोबाइल नंबर और न ही बैंक अकाउंट आधार के साथ लिंक करना जरूरी है.

क्या कहा कोर्ट ने

कोर्ट ने कहा कि सरकार को यह भी सुनिश्चत करना चाहिए कि अवैध प्रवासियों को आधार कार्ड न मिल सके. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘किसी भी व्यक्ति को दिया जानेवाला आधार नंबर यूनीक होता है और किसी दूसरे को नहीं दिया जा सकता है. इसके साथ ही जस्टिस सीकरी ने केंद्र से कहा है कि वह जल्द से जल्द मजबूत डेटा सुरक्षा कानून बनाए. कोर्ट ने कहा- गरीमा के साथ जीवन मौलिक अधिकार है, आधार से वंचित तबके को गरिमा मिल रही है. 99.76% लोग आधार से जुड़े, अब उन्हें सुविधा से वंचित नहीं किया जा सकता.

जस्टिस सीकरी ने आधार पर फैसला पढ़ते हुए कहा- हमें लगता है कि बायोमेट्रिक की सुरक्षा के पुख्ता उपाय हैं. कोर्ट ने कहा- किसी व्यक्ति का डेटा रिलीज़ करने से पहले उसे जानकारी दी जाए. आधार पर फैसला पढ़ते हुए जस्टिस सीकरी ने कहा- आधार यूनीक है ये सबसे अलग बनाता है. कोर्ट ने कहा कि ‘बेस्ट’ होना आपको नंवर वन बनाता है लेकिन ‘यूनीक’ होना ओनली वन बनाता है.

बता दें कि आधार की वैधानिकता को चुनौती देने वाली 27 याचिकाओं पर करीब चार महीने तक बहस चली थी. बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था. फैसला आने से पहले बतौर अटर्नी जनरल आधार केस में सरकार का पक्ष रखनेवाले मुकुल रोहतगी ने कहा कि डेटा की सुरक्षा महत्वपूर्ण है और सरकार ने भी साफ कहा है कि वह डेटा की सुरक्षा करेगी.

लंबे समय से बहस का मुद्दा बने आधार कार्ड की वैधानिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि बैंक खाता खोलने के लिए अब आधार जरूरी नहीं है. आपको बता दें कि आधार की अनिवार्यता को 31 याचिकाओं के जरिए चुनौती दी गई थी और इस पर करीब चार महीने तक बहस चली.

आधार पर फैसला- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CBSE, NEET, स्कूल में दाखिले के लिए आधार को अनिवार्य बनाने की जरूरत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने आधार एक्ट की धारा 57 को रद्द कर दिया. प्राइवेट कंपनियां आधार की मांग नहीं कर सकती हैं. आधार को बैंक और मोबाइल नंबर से लिंक करने की अनिवार्यता को भी सुप्रीम कोर्ट ने खत्म कर दिया है.

1 टिप्पणी

  1. Best judgement. Welcome to delete Article 57 of AADHAR ACT .Good step not to make mandatory for opening bank accounts. Data need to be secured.

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