“सरकार को खुद नहीं पता असम में कितने घुसपैठिए”

“सरकार को खुद नहीं पता असम में कितने घुसपैठिए”

लोकसभा में आज कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) में 40 लाख लोगों का नाम नहीं होने के मुद्दे को उठाया. कांग्रेस के गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि इस कवायद के बावजूद कितने घुसपैठिये हैं, इसके आंकड़े सरकार के पास नहीं हैं. शून्यकाल में गौरव गोगोई ने इस विषय को उठाते हुए कहा कि कल गृह मंत्री ने सदन में बयान दिया, जिसमें कहा गया है कि जिन 40 लाख लोगों के नाम नहीं है, उनके पास अभी भी मौका है.

इससे साफ है कि सरकार के पास अभी भी ये आंकड़े नहीं है कि घुसपैठियों की संख्या कितनी है.  उन्होंने आरोप लगाया कि एनआरसी मामले में सरकार का रूख कमजोर, लचर और अप्रभावी है. असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण के संदर्भ में जो गलती हुई है, उसे देखते हुए हमारी मांग है कि 40 लाख लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो.

इससे पहने शून्यकाल शुरू होने पर तृणमूल कांग्रेस के सदस्य असम एनआरसी के मुद्दे पर सदन में अपनी बात रखना चाहते थे. तृणमूल सदस्य सौगत राय ने कहा कि कल यह विषय आया है लेकिन यह मुद्दा गंभीर है.  40 लाख लोगों का नाम एनआरसी सूची में नहीं है.

इस पर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि एनआरसी का विषय कल पूरा हो गया है. गृह मंत्री ने जवाब दे दिया था. अब हर दिन एक ही विषय को नहीं लिया जायेगा. इस दौरान कांग्रेस के गौरव गोगोई और अधीर रंजन चौधरी इस मुद्दे पर अपनी बात रखने की मांग करते हुए आसन के समीप आ गए. स्पीकर ने कहा कि कल यह विषय आया है और सदन में वे (गोगोई) मौजूद नहीं थे. ऐसे में अपने स्थान पर जाएं.

कुछ देर बाद स्पीकर ने गौरव गोगोई का नाम पुकारा और कहा कि उन्होंने असम में बाढ़ के विषय पर बोलने का आग्रह किया है. इस पर गोगोई ने कहा कि वह आग्रह करते हैं कि अभी उन्हें एनआरसी के विषय पर बोलने दिया जाए. लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि ठीक है, तो क्या बाढ़ का विषय नहीं उठायेंगे. ‘‘बह जाने दो.’’  सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले आज तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, जेडीएस और आम आदमी पार्टी के सदस्यों ने संसद भवन परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष असम एनआरसी के विषय पर धरना प्रदर्शन किया. इस धरना प्रदर्शन में तेलुगू देशम पार्टी के सदस्य भी शामिल हो गये जो इससे पहले पास में ही आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने के मुद्दे पर धरना दे रहे थे.

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