दिल्ली की सीमा पर पुलिस और किसानों में संघर्ष. पूरी ताकत लगाकर भी नहीं रोक सकी पुलिस

दिल्ली में प्रदर्शन करने आ रहे किसानों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने आंसूगैस के गोले छोड़े, पानी की बौछार से भी हमले किए गुस्साए किसान  इससे भड़क गए. उन्होंने ट्रैक्टर के ज़रिए बेरीकेट्स को तोड़ना शुरू कर दिया. . किसान बेरीकेट्स पर चढ़ गए और उन्होंने बैरीकेड्स से बंधी हुई रस्सियां खोल दी इसके बाद पुलिस और तेजी से सक्रिय हुई. उसने किसानों पर लाठियां बरसाकरक उन्हें खदेड़ दिया और उन्हें खदेड़ने के बाद ट्रेक्टर की हवा निकाल दी.

दिल्ली जाने पर अड़े किसानों को मनाने की कवायद एक बार फिर शुरू कर दी गई है. अधिकारियों के विफल होने पर अब फिर किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल को केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के पास वार्ता के लिए ले जाया जा रहा है. उधर दिल्ली जाने पर अड़े किसानों ने वार्ता समाप्त होने तक यूपी गेट पर ही रुकने का फैसला लिया है. हजारों की संख्या में किसानों ने यूपी गेट पर दोनों तरफ के मार्ग पर कब्जा कर लिया है. उन्होंने एलान किया कि अब वो दिल्ली का बॉर्डर जाम करेंगे.

यूपी गेट पर रोके जाने से नाराज भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी नरेश टिकैत ने अधिकारियों से पूछा है कि उन्हें क्यों रोका जा रहा है. उनकी रैली पूरे अनुशासन के साथ बढ़ रही है. अगर हम अपनी समस्याएं अपनी सरकार के सामने नहीं रखेंगे तो किससे कहेंगे. क्या हम पाकिस्तान या बांग्लादेश चले जाएं.

इस पूरे विवाद के बीच दिल्ली का जीवन अस्त व्यस्त हो गया है. खास तौर पर दिल्ली से सटे दूसरे राज्यों के शहरों से राजधानी में आना बेहद मुश्किल हो गया.

भारतीय किसान यूनियन की किसान क्रांति यात्रा लेकर दिल्ली जा रहे 50 हजार किसानों को रोकने के लिए राजधानी की सभी सीमाएं सील कर दी गई हैं. इससे दिल्ली के सीमावर्ती इलाकों पर भीषण जाम लग गया है. किसानों की रैली किसी भी रास्ते से दिल्ली में प्रवेश न कर सके, इसके लिए सभी रास्तों पर भारी पुलिस व अर्धसैनिक बल तैनात किया गया है. उधर किसानों की रैली साहिबाबाद के डाबर तिराहे पर पहुंच चुकी है.

मुख्यमंत्री से वार्ता रही विफल

किसानों को समझाने के लिए सोमवार देर शाम गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उनके प्रतिनिधिमंडल को मिलने बुलाया था. हालांकि प्रशासन ने देर रात किसानों की वार्ता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ करवाई. भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने बताया कि मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि प्रधानमंत्री का कार्यक्रम व्यस्त है.वह अभी किसानों से नहीं मिल सकते. उन्होंने किसानों को जल्द ही उनकी मांगों पर हल निकालने का प्रस्ताव दिया, लेकिन किसान दिल्ली कूच करने की बात पर अड़े रहे. किसानों ने प्रधानमंत्री से मिले बिना लौटने से इन्कार कर दिया.

डीएम-एसएसपी ने किया समझाने का प्रयास

मुख्यमंत्री से बात करने से पहले सोमवार शाम को गाजियाबाद के जिस फॉर्म हाउस में किसानों को ठहराया गया था, वहां डीएम डीएम रितु माहेश्वरी और एसएसपी वैभव कृष्ण ने किसान प्रतिनिधियों से बात कर उन्हें समझाने का प्रयास किया था. करीब एक घंटे तक दोनों अधिकारी बंद कमरे में किसान प्रतिनिधियों संग वार्ता करते रहे. हालांकि वार्ता खत्म होने के बाद नतीजा सिफर निकला. दोनों अधिकारी भी किसानों को समझाने में असफल रहे. इसके बाद किसानों की बात मुख्यमंत्री से कराई गई.

राकेश टिकैत ने बोला सरकार की गलत नीतियां हैं जिम्मेदार

‘देश का अन्नदाता आज दुखी है. किसान कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है. किसान आज सड़कों पर हैं. इसके लिए पूरी तरह से सरकार और उसकी गलत नीतियां जिम्मेदार हैं. जब तक इस देश में किसान दुखी रहेगा. तब तक तरक्की की बात करना पूरी तरह निर्थक है.’ यह बातें रविवार को भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने राज चौपले के निकट स्वागत कार्यक्रम में कहीं.

नरेश टिकैत ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह किसानों के कर्ज माफ करे. किसानों को मुफ्त बिजली दे. साथ ही ऐसी नीति बनाए जिससे किसान अपनी फसल का भाव खुद तय कर सके. किसान को छोड़कर दुनिया में ऐसा कोई भी उत्पादनकर्ता नहीं है, जिसके सामान का भाव कोई दूसरा तय करता हो. उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में दो अक्टूबर को लाखों किसान सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखेंगे. किसानों की मागों और समस्याओं का सरकार कोई हल नहीं निकालेगी तो उग्र आंदोलन किया जाएगा. किसी भी सूरत में सरकार विरोधी नीतियों को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

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