10% आर्थिक आरक्षण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, बचना मुश्किल

नई दिल्ली : सवर्णों को नौकरियों और शिक्षा में आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण देने से जुड़े विधेयक को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. यूथ फॉर इक्वैलिटी नाम के एनजीओ ने कोर्ट में याचिका दायर की है. एक दिन पहले ही सरकार ने राज्यसभा में इससे जुड़ा 124वां संविधान संशोधन विधेयक पास कराया था.

विधेयक अभी मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाना है. मंजूरी मिलने के बाद ही विधि मंत्रालय इसे अधिसूचित करेगा, लेकिन अभी विधेयक के कानून बनने में रोड़ा अटक सकता है.

अजीबो गरीब आरक्षण वाला ये बिल  पास कराने के लिए केंद्र सरकार ने शीतकालीन सत्र को एक दिन के लिए और बढ़ा लिया था. साथ ही कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही राजनीतिक दलों ने इस दौरान पार्टी के सांसदों को सदन मे मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया. लोकसभा में पास होने के बाद बुधवार को बिल राज्यसभा में चर्चा के लिए रखा गया. यहां भी यह बिल दो तिहाई से ज्यादा बहुमत से पास हो गया.

संविधान का 124वां सशोधन कर केंद्र सरकार आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण देना चाहती है. अब तक सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों को ही आरक्षण मिलता रहा है. दिनभर की चर्चा के दौरान कई सदस्यों ने इस बिल को लेकर सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाया. उनका मानना था कि सरकार आगामी लोकसभा चुनावों को मद्देनजर रख कर यह कदम उठा रही है. हालांकि विरोध के बाद भी कई राजनीतिक दलों ने इस बिल के समर्थन में वोट किया.

Upper Caste Reservation गरीब सवर्णों को 10 फीसद कोटा से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक कैबिनेट की मुहर लगने के बाद आज लोकसभा में पेश किया गया.

केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत ने संशोधन विधेयक को पेश किया, दोपहर दो बजे के बाद इस बिल पर सदन में चर्चा होगी. बता दें कि भाजपा ने अपने सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी कर दिया था, जबकि कांग्रेस ने पहले ही अपने सांसदों के लिए सोमवार और मंगलवार को उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया था.

सामाजिक समरसता की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आर्थिक आधार पर 10 फीसद आरक्षण देने का फैसला किया है.