सेना के सामने वंदेमातरम और तिरंगा वाले हुड़दंगी, गोली चलाने पर धर्म संकट

कर्फ्यूग्रस्त जम्मू में तैनात सेना अजीब धर्म संकट से गुज़र रही है. उसे उन लोगों के ऊपर बंदूक तानने की ड्यूटी मिली है जिनके हाथ में तिरंगा है और जो वंदेमातरम के नारे लगा रहे हैं. सेना को इस भीड़ से सख्ती से निपटने के निर्देश हैं. इस मुद्दे पर दो बार सैनिक और पुलिस के जवान आपस में भिड़ भी चुके हैं. ऐसी ही परिस्थिति वर्ष 2008 के अमरनाथ भूमि आंदोलन के दौरान भी पैदा हुई थीं.

दरअसल जम्मू में कर्फ्यू है लेकिन राष्ट्रवादी भीड़ इसका उल्लंघन कर रही है. लोग मुहल्ले-गली बाजारों में शहीदों के लिए तिरंगों के साथ कैंडल मार्च निकाल रहे हैं .जम्मू में पांच दिन से कर्फ्यू है और सेना फ्लैग मार्च कर रही है. जम्मू के युवा हमले के विरोध में सड़कों पर उतर रहे हैं और भारत माता की जय और इंडियन आर्मी जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं. जिस सेना को हुड़दंगियों को देखते ही गोली मारने का आदेश दिया गया हो वो दुविधा या कहें कि धर्म संकट में फंसी है. पुलवामा में भीड़ बेकाबू हो रही है और प्रदर्शनकारी ‘भारत माता की जय’ के नारे लगा रहे हैं और भारतीय तिरंगा है. ऐसे में सेना के जवान दुविधा में हैं कि वे तिरंगा थामने वाले हाथों पर कार्रवाई कैसे करें.

यही कारण है कि कर्फ्यू में प्रदर्शन कर रहे जम्मू के युवाओं को पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए और पकड़े जाने पर सेना के अधिकारियों की पुलिस अफसरों से दो बार बहस हो गई. सेना के एक अधिकारी ने तो यहां तक कहा दिया कि अगर पुलिस ऐसा करेगी तो वे ड्यूटी नहीं देंगे.मामला गंभीर होते देख टाइगर डिवीजन के ब्रिगेडियर शरद कपूर भी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने स्थिति को शांत किया. जम्मू-कठुआ रेंज के डीआइजी विवेक गुप्ता ने सेना से इस घटना के लिए माफी भी मांगी.

इस हमले में जम्मू ने नसीर अहमद के रूप में अपना सपूत खोया है. हमले के विरोध में जम्मू, सांबा, कठुआ, ऊधमपुर, रियासी, पुंछ, रामबन आदि कई जिलों में लोग सड़कों पर तिरंगा लेकर वंदे मातरम, भारत माता के जयघोष लगा सड़कों पर आ उतरे. उनकी मांग है कि दोषी आतंकियों सहित पाकिस्तान को सबक सिखाया जाए. हालांकि इस दौरान कुछ शरारती तत्वों के कारण माहौल भी बिगड़ा.

जम्मू में कर्फ्यू चल रहा है और हालात बिगड़े हुए है ऐसे में कानून व्यवस्था की स्थिति संभालने के लिए सेना को बुलाया गय है.

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