जब राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के संपादकों पर गहरा असर छोड़ा

रिज़वान अहमद सिद्दीकी, ग्रुप एडिटर डिजिआना मीडिया ग्रुप

आज इंदौर में हमारा अनुभव ऐतिहासिक रहा, मौका था कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी से संपादकों की मुलाक़ात का खाटी पत्रकारों के सवाल और राहुल गांधी के परिपक्व जवाब इतना ही नही आंकड़ों के रिफरेन्स के साथ प्रधानमंत्री से सीधे सवाल और उस पर ये कहना कि मै स्वभाव सेआक्रामक नही हूँ लेकिन राजनीति के इन हालात ने मुझे आक्रमक बना दिया है सहज ही उनकी ओर ध्यानाकृष्ट करता है.

मुख्यमंत्री जनता तय करेगी

हर सवाल का सधा लेकिन विस्तृत जवाब सहज ही उनसे आज मिलने वाले पत्रकारों के बीच चर्चा का विषय रहा, राहुल गांधी ने एक प्रश्न के जवाब में कहा हमारे पास कमलनाथ और सिंधिया जैसे चेहरे हैं मुख्यमंत्री जनता चुनती है तो हम क्यों चुने जनता ही मुख्यमंत्री चुनेगी. मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय का नाम पनामा पेपर लीक में लेकर विवादों में आये राहुल ने उसपर भी बड़ा दिलचस्प जवाब दिया और कहा बीजेपी के मुख्यमंत्रियों के इतने भ्रष्टाचार हैं कि मैं कन्फ़्यूज़ हो गया पनामा पेपर लीक तो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के बेटे का मामला है, मप्र में तो व्यापम और इ टेंडरिंग का घोटाला हुआ है.

रफ़ैल में दो नाम मिलेंगे

चौकीदार ही चोर है के अपने अभियान को आगे बढ़ाते हुये राहुल ने कहा नरेंद्र मोदी जेल जायेंगे उन्होंने कहा जब राफाल डील के कागज़ खुलेंगे तो उसमें सिर्फ़ दो नाम मिलेंगे नरेंद्र मोदी और अनिल अंबानी इसमें न रक्षा मंत्री होंगे न कोई सैन्य अधिकारी.

गब्बर सिंह टैक्स

उनसे पूछा गया आप गब्बर सिंह टैक्स का क्या करेंगे गब्बर को मारेगे या छोड़ देंगे तो वो कुछ पल ठिठके फिर बोले नही मै गब्बर को नही मारूँगा उसे आसान बनाऊँगा तो हमारे बीच से आवाज़ आई याने गब्बर इज़ बैक.

राजनीति में अपराधी

उनसे पूछा गया कि आपने अपराधियों को राजनीति में रोकने वाले बिल को पास करवाया था आप राजनीति में अपराधियों की आमद को कैसे रोकेंगे तो जवाब देते-देते राहुल गांधी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी अपने पास बुलाया और उन्हें कहा उत्तर दें इस सवाल का कमलनाथ ने गम्भीर आपराधिक मामले दर्ज करवाने में सत्ता के दुरूपयोग का उल्लेख किया और उल्टा सवाल दाग दिया ऐसे लोगों के साथ क्या किया जाये तो बड़े सहज अंदाज़ में हंसकर राहुल बोले चुनाव भी तो जीतना है.

हिंदूवाद और हिंदुत्त्व

हमने भी राहुल गाँधी से पूछा आजकल कांग्रेस को बार- बार अहसास करवाना पड़ता है कि वो हिन्दू या भारतीय संस्कृति की पार्टी है, भूमिपूजन, शिलान्यास, दीप प्रज्ज्वलन, वन्दे मातरम को शासकीय आयोजनों तक में परम्परा बनाने वाली कांग्रेस क्या भटक गई थी जो उसे अब बार-बार हिंदुत्व का प्रदर्शन करना पड़ता है. मेरा सवाल सुपर हिट था और उसकी सर्वाधिक चर्चा रही… राहुल गांधी ने उस पर काफ़ी देर तक जवाब दिया और इस बीच पूछे गये किसी और सवाल को रोका और बोले भैया मुझे यह बताने दो दुबारा कुछ देर फिर टोकने पर बोले मुझे अपनी बात कहने दें मज़ा आ रहा है, मेरे सवाल पर ज़्यादातर मुझसे ही मुख़ातिब रहे और जवाब देते रहे… शायद हमने कांग्रेस की दुखती रग पर हाथ जो रख दिया था… राहुल बोले मै हिंदुत्व नही हिंदूवाद का पक्षधर हूँ, हिंदूवाद सबको लेकर चलना है,सबकी सुनना, सबका आदर करना है, हिंदूवाद एक महान परंपरा है इस पर किसी का ठेका नही हो सकता. मै सभी वर्गों सभी धर्मों का हूँ और वो लगातार बोलते रहे सब मंत्रमुग्ध से हिंदूवाद पर उनके विचार सुनते रहे.

कैलाश मानसरोवर और यमद्वार 

उन्होंने कैलाश मानसरोवर और विपश्चना के अपने अनुभव भी साझा किये इस सवाल पर वो बोले मै अपने अनुभव शब्दों में कैसे बताऊं और फिर भाव विभोर मुद्रा में बोले कैलाश मानसरोवर में दोनों तरफ़ यम द्वार है उन्होंने पूछा यम द्वार से क्या याद आता है कुछ देर सन्नाटा छाया रहा उन्होंने फिर वही प्रश्न किया तो मैंने आहिस्ते से कहा मृत्यु तो उन्होंने कहा हाँ इसकी मतलब है मृत्यु के बाद सब वहीं रह जाता है अहंकार छोड़ दीजिये.

पप्पू और भोला-भाला

सवाल और जवाब तो बहुत थे अंत में एक पत्रकार साथी ने अपने एक सवाल का अनुभव हमसे साझा किया उन्होंने बत्स्य एसपीजी का घेरा तोड़कर राहुल गाँधी से पूछा कि आपको बीजेपी वाले पप्पू क्यों कहते हैं राहुल पल भर के लिये ठिठके और फिर बोले में शिवभक्त हूँ और शंकर जी का दूसरा नाम क्या है फिर खुद ही बोले शंकर जी का दूसरा नाम भोले नाथ है और मै भला और भोला हूँ.

तय हुआ था कि राहुल गाँधी पत्रकारों से हर टेबिल पर जाकर मिलेंगे और पांच पाँच मिनट चर्चा करेंगे लेकिन दूसरी ही टेबिल से राहुल ने ख़ुद माइक सम्भाला और पत्रकारों से घूम घूम कर हर टेबिल पर जाकर चर्चा की और हर प्रश्न का सहजता से उत्तर दिया और उन्होंने आंख भी नही मारी.

आज राहुल गाँधी का ये अंदाज़ देखकर उनके पिता राजीव गाँधी याद आ गये और उनमें साफ़तौर पर नेहरू गाँधी परिवार की गौरवशाली विरासत भी नज़र आई. इतना तो तय है राहुल गाँधी के बारे में जिस तरह के दुष्प्रचार होते रहे हैं उनसे रूबरू हुये ज़्यादातर सम्पादकों के अनुभव उससे बिलकुल विपरीत रहे.

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