मोदी जी कहते हैं- उड़ती चिड़िया देख और क्षण में देश मुसलमान बन जाता है

मोदी जी कहते हैं- उड़ती चिड़िया देख और क्षण में देश मुसलमान बन जाता है

जिस समय बैंक ऑफ चाइना को भारत में अनुमति देने की खबर आई उस समय पूरा मीडिया केजरीवाल और केन्द्र के मामले पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले पर मिनट दर मिनट अपडेट देने में व्यस्त था. टाइमिंग ऐसी थी कि सरकार को भरोसा रहा होगा कि खबर दब जाएगी. लेकिन  देश सोता नहीं है वो जागता है. हर चीज़ पर नज़र रखता है. उसे याद है कि डोकलाम पर सरकार ने किस तरह की मुर्दनी दिखाई. कैसे सेनाएं अड़ाईं और वापस खींच लीं. उसे ये भी याद है कि कैसे भारत के आर्मीचीफ को बयान पर चीन ने अपमानित किया था. भारत सरकार फिर भी चुप रही.

देश को याद है कि मोदी जो भी कहते हैं उसका कोई मतलब नहीं होता. वो कहते कुछ और है और वो और उनका संगठन करता कुछ और है. उनका पितृसंगठन वोही करता है जो उसे करना है. लाल किले पर पहले भाषण में मोदी ने कहा था कि देश के सांप्रदायिक और धार्मिक मसलों को विकास की खातिर 10 साल तक भूल जाना चाहिए. उन पर चर्चा दस साल के लिए बंद होनी चाहिए. उसके बाद हमने दादरी देखा, असंख्य दंगे देखे, तीन तलाक देखा, सांप्रदायिक कैंपेन देखा.

देश को याद है कि मोदी जी ने पाकिस्तान के उस नेता से भाईचारा दिखाया जिसे करप्शन में दस साल की जेल हुई. पाकिस्तान के साथ एक के बदले दस सिर के डायलॉग चलते रहे. उरी अटैक होता रहा, पठानकोट में आतंकवादी घुसते रहे. लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक के कथित प्रतीकात्मक विरोध के बीच अपने शपथ ग्रहण में सबसे अजीज नवाज़ शरीफ को कभी वो सबसे पहले आमंत्रित करते रहे तो कभी उनकी पारिवारिक शादी में सारे प्रोटोकॉल तोड़कर जाते रहे. देश जानता है कि भारत के प्रधानमंत्री को पाकिस्तान के पीएम की करतूतों की खबर न हो ये मुमकिन नहीं है. देश को पता है कि शरीफ के करप्शन से लेकर आतंकवादियों की ट्रेनिंग तक प्रधानमंत्री को सबकुछ पता था लेकिन वो यार बाज़ी में लगे रहे. कहा तो ये भी जाता है कि देश को बेवकूफ बनाने के लिए पाकिस्तान से तनाव का नाटक चलता रहा और अंदर ही अंदर यारियां हिलोरे मारती रहीं यहां तक कि जब जब राजनीतिक ज़रूरतें पड़ीं बॉर्डर पर तनाव कम ज्यादा होता रहा.

 

देश ने सिर्फ पाकिस्तान के मामले में कथनी और करनी का भेद नहीं देखा. देश ने देखा कि कैसे चीन  लगातार भारत की पीठ में छुरा भौंकता रहा. देश के सदर महान बातें करते रहे. चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाया तो बड़ा मुद्दा बन गया. प्रधानमंत्री जी के मातृ और पितृ संगठनों ने चीनी माल के बहिस्कार का माहौल खड़ा कर दिया. दिवाली पर चाईनीज़ माल पर रोक की बात हुई. कई जगह दुकानें लूटी गईं. चाईनीज़ झालर और आतिशबाज़ी का विरोध हुआ लेकिन सदर फोटोसेशन में  व्यस्त रहे. नेहरू ने जब चीन से दोस्ती की कोशिशें की थीं तो भारत नया था अब हमारे पास 70 साल का अनुभव है लेकिन गले मिलने से लेकर झूला झूलने तक की तस्वीरें उससे भी ज्यादा प्रगाड़ता दिखा रही हैं. देश जानता है कि एक तरफ डोकलाम में आपने सेना तैनात की . भूटान की रक्षा का संकल्प दोहराया और दूसरी तरफ मोदी ने शी के साथ खुसुर पुसुर की और पाला बदल लिया. अब डोकलाम से भारतीय सेना हट चुकी है. भूटान की रक्षा भगवान भरोसे है डोकलाम पर चीन काबिज है वहां उसकी सेनाएं भी हैं और चोकी भी बन रही है.

देश अब फिर देख रहा है वो जानता है कि मोदी उसी बैंक ऑफ चाइना को भारत में कारोबार करने के लिए घुसा लाए हैं जिसके खातों से डूबते पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता चीनी सरकार ने दी है.

देश की समस्या ये है कि उसे हमेशा अंधेरे में रखा जाता है. उससे कहा जाता है कि उड़ती चिड़िया देख और वो मुसलमान बन चुका होता है. ये कबतक चलेगा. (पत्रकार गिरिजेश वशिष्ठ का लेख)

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