Zee की आर्थिक हालत खराब ! 300 लोगों की छंटनी होगी

मोदी भक्ति में डूबी एसएलग्रुप या कहें कि ज़ी ग्रुप को अब अपने निष्पक्ष न होने का नुकसान उठाना पड़ रहा है. घाटे में चल रही कंपनी के मालिक सुभाष चंद्रा ने हाल ही में कॉस्ट कटिंग के एक्सपर्ट अपने भाई जवाहर गोयल को ज़ी का चीफ एडीटर बनाया था. अब जवाहर गोयल ने तलवार चलानी शुरू कर दी है.

खबर है कि कंपनी से 300 लोगों की छंटनी होगी. भड़ास फॉर मीडिया की खबर के मुताबिक कंपनी ने 15 फीसदी लोगों को निकालने का फैसला किया है. ज़ी के अंदर के सूत्रों का कहना है कि हल में बीजेपी समर्थक पत्रकारों की एक अहम पत्रकार ने जमकर भर्ती की. पूरा चैनल पार्टी के मुखपत्र की तरह बना दिया गया. इससे चैनल की साख गिरी और वो बेहद मीडियोकर समझे जाने वाले सुदर्शन टीवी के स्तर तक पहुंच गया.

बीजेपी को खुश करने के लिए इस पत्रकार ने पार्टी नेता की सिफारिशों पर बड़ी संखया में कथित राष्ट्रवादी लोगों को नौकरी दी उससे कंपनी पर बोझ बढ़ गया.

खबर है कि पूरे जी नेटवर्क से पंद्रह फीसदी लोगों को हटाया जा रहा है. यह संख्या तीन सौ से उपर बैठती है. इसी कड़ी में सुशील जोशी, गौरव भटनागर और मेहराज दुबे हटाए गए हैं. सुशील जोशी एचआर हेड थे. गौरव भटनागर आईटी हेड. मेहराज दुबे मार्केटिंग हेड.

बताया जा रहा है कि जी ग्रुप के अखबार डीएनए के मुंबई आफिस से करीब 34 लोगों को हटा दिया गया है. इनमें ज्यादातर मार्केटिंग के हैं. इस छंटनी से पूरे जी ग्रुप में हड़कंप है. हर कोई अपनी जॉब को लेकर आशंकित है.

ज़ी के मालिक सुभाष चंद्रा नैतिकता पर ज्ञान देने वाला पूरा एक शो करते हैं लेकिन न तो उन्होंने इस तरह की भर्तियों को रोकने की कोशिश की न अब छंटनी टालने के लिए कुछ कर पा रहे हैं. उन्होंने खुद ही अपने भाई जवाहर गोयल को टीम में अहम जगह दी और उन्होंने ही ये सारा ‘;कत्लेआम’ प्लान किया है. माना जाता है कि जवाहर गोयल को वहीं भेजा जाता है जहां खर्चा कम करना हो या रिशेप करना हो.

हाल ही में खबर आई थी कि एसएल समूह की प्रमुख कंपनी जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (जेडईईएल) के प्रमोटर्स कर्ज के बोझ से परेशान हैं और वो कंपनी की 50 फीसद से अधिक हिस्सेदारी बेचने के लिए भी तैयार है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इसके लिए उनकी दो से अधिक निवेशकों से वार्ता भी चल रही है।

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज ने पिछले साल नवंबर में कहा था कि सुभाष चंद्रा के नेतृत्व में प्रमोटर्स कंपनी की 50 फीसद तक की हिस्सेदारी रणनीतिक साझेदार को बेचना चाहते हैं। जेडईईएल के एमडी और सीईओ पुनीत गोयनका ने कहा कि हमारी मंशा नहीं बदली है, लेकिन यदि कोई 50 फीसद से अधिक हिस्सेदारी खरीदने की भी पेशकश करता है, तो हम उस पर विचार करेंगे।

इसी बीच ये भी खबर आई थी कि जी ने अपनी हिस्सेदारी ज्यादा फंड जुटाने के लिए बेची है ताकि उससे और पैसे लेकर कारोबार को दुनिया भर में खासतौर पर अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में फैलाया जा सके.

लेकिन जवाहर गोयल की एंट्री से साफ है कि कंपनी जबतक हिस्सेदारी नहीं बिकती. कंपनी की आर्थिक सेहत बेहतर करने के उपाय खोज रही है. खर्च कम करना इसका सबसे अहम हिस्सा है. जवाहर गोयल का आना ये बताता हैकि मामला कंपनी की खराब आर्थिक हालत के अलावा कोई और नहीं.