संघ विरोधी रिपोर्टिंग के लिए अमेरिकी रिपोर्टर को बाहर भेजेगी सरकार ?

कुछ दिन पहले सूचना प्रसारण मंत्रालय ने दो चैनलों पर 48 घंटे का प्रतिबंध लगाया था और बाकायदा उन चैनलों पर जो आरोप लगाए गए थे उनमें एक आरोप आर एस एस के खिलाफ खबरें दिखाने का भी था अब फिर आरएसएस के खिलाफ खबरें दिखाने को लेकर कोई मीडिया पर हमला हुआ है.

अब विदेश मंत्रालय ने अमेरिका में स्थित भारतीय दूतावास से अपील की है कि वह तुरंत एरिक बेलमेन को वापस अमेरिका बुलाने के मामले में कुछ करें. बता दें कि एरिक बेलमेन वाल स्ट्रीट जर्नल के दक्षिण एशिया डिप्टी ब्यूरो चीफ हैं. वाल स्ट्रीट जनरल ने ही अंकित शर्मा के भाई को वो बयान दिखाया था जिसमें वो अंकित शर्मा की हत्या में संघ परिवारियों काहाथ होने की बात कह रहा था . उसने कहा कि अंकित शर्मा कि हत्या दंगा रोकने की कोशिशों के बीच हुई.

नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर प्रसार भारती ने शुक्रवार को अपने आधिकारिक ट्विटर पेज पर ये जानकारी दी. ट्वीट में दावा किया गया कि उनके ‘भारत विरोधी व्यवहार’ के चलते ऐसी मांग की गई है.

हालांकि बाद में भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट कर कहा कि “एक व्यक्ति ने सरकारी प्लेटफॉर्म पर एरिक बेलमेन के खिलाफ एक ऑनलाइन शिकायत दर्ज करायी थी. इस शिकायत के आधार पर संबंधित अधिकारी को तय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, लेकिन भारत से भेजने संबंधी कोई निर्देश पर कोई फैसला नहीं लिया गया है.”

बता दें कि हाल ही में केन्द्रीय प्रसारण एवं सूचना मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दो मलयालम न्यूज चैनल्स की दिल्ली दंगों की रिपोर्टिंग पर लगे 48 घंटे के बैन को हटा लिया था. न्यूज चैनल्स पर आरोप थे कि वह दंगों में एक पक्ष का समर्थन कर रहे हैं और दिल्ली पुलिस और आरएसएस के खिलाफ रिपोर्टिंग कर रहे हैं. अब एरिक बेलमेन के संबंध में प्रसार भारती के ट्वीट भी उसके एक हफ्ते बाद सामने आए हैं.

रवीश कुमार के ट्वीट के बाद प्रसार भारती ने भी शुक्रवार शाम अपना ट्वीट हटा लिया. विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी रिपोर्टर के बारे में शिकायत मिलने के बाद यह मामला सचिव (काउंसलर) के सामने भेजा गया था, ना कि अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास में. प्रसार भारती ने गलत जानकारी दी है.

बीती 28 फरवरी को भी प्रसार भारती ने वाल स्ट्रीट जर्नल को लेकर कुछ ट्वीट किए थे, जिनमें दावा किया गया था कि न्यूजपेपर में जो दिल्ली दंगे के दौरान आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा की मौत की खबर छपी थी, वो गलत थी.