मोदी जी, अपने भक्तों का तो खयाल रखो, पत्रकार की चिट्ठी

मोदी जी गाते घूम रहे हैं कि लोग उनको गालियां दे रहे हैं. ज़रा ध्यान से सोशल मीडिया पर नज़र डालिए. लोग आपको गालियां नहीं दे रहे. आप पर हंस रहे हैं. जोकर बन चुके हैं आप. इतना झूठ क्यों बोलते हैं जिसके कारण आपके समर्थकों और आपको चाहने वालों को आपकी और देश की इज्जत बचाने के लिए आपकी बकवास पर लीपा पोती करनी पड़ती है.

याद कीजिए जब आपने पकोड़े बेचने को रो़ज़गार बताया था तो ये बेचारे आपके फैन जो आपकी खातिर भक्त कहलाते हैं दौड़ पडे़. ये साबित करने कि पकौड़े बेचने में कमाई है. हर चलती हुई पकौड़े की दुकान की कमाई के आंकड़े इकट्ठे कर दिए. ताकि दुनिया हंसे नहीं.

जब आपने कहा कि नाली में पाइप डालकर चाय बनती है तो ते जो भक्त हैं ना तरह तरह के यंत्र बनाकर जुटगए कि नाले की गैस से चाय बनाकर दिखा दें .

अगर हमारी सामग्री अच्छी लगती है तो शेयर ज़रूर करें

लेकिन आपने इनकी नाक हमेशा कटवाई है. क्या ज़रूरत थी आपको ये कहने की ओबामा तू तड़ाक से बात करता है. आपको पता है ना कि अंग्रेज़ी में जब कोई तू कहता है तो यू के साथ चार गालियां भी लगाता है. देश के पीएम हैं आप. ओबामा गाली देगा तो मुंह तोड़ देंगे. लेकिन बेचारे ये भक्त आपके लिए डटे रहे.

आपके पास क्या है ? आपकी डिग्री फर्जी, आपकी पहचान फर्जी आपका गांव , आपका धाम, आपके काम धंधे और तो और आपकी शादी भी फर्जी.लेकिन ये जो भक्त हैं ना ये कभी आपकी नाक नहीं कटने देते. सच न सही तो झूठ सहीं. वायरल पर वायरल आपकी छवि बनाने में लगे रहते हैं.

सोचिए आप ने जब दस दस लाख के सूट पहने तो आपकी सदाचारी इमेज बनाने में जुट गए. कह दिया कि मोदी जी वेतन नहीं लेते, सरकारी खर्चे से खर्चा नहीं करते . अपने खाने पीने का खर्च खुद उठाते हैं. लोगों ने पूछा कि फिर पैसे आते कहां से हैं. तो बेचारों ने कहा कि इतने साल से सीएम हैं कुछ तो कमाया होगा. लेकिन आपने तो तय कर रखा है कि उनकी पोल खोलेंगे और देश को बदनाम करके ही मानेंगे. तपाक से बोल दिया कि गुजरात से हटा तो अपनी सारी बचत दान कर दी थी. आपके चक्कर में बेचारे ये झूठे पड़ गए. लेकिन आपको क्या.

राफेल में जब आपको चोर चैकीदार कहा तो आपकी इज्जत बचाने के लिए खुद चौकीदार बन गए. लेकिन आपके कागज़में ही निकल आया कि आप भी रक्षा मंत्रालय के साथ साथ राफेल के सौदे मेंलगे हुए थे. आपकी इस हरकत के कारण सुप्रीम कोर्ट में रिजेक्ट किया गया केस फिर खुल गया. आपका क्या गया. इजजत तो इनकी गई.

फेस बुक है लंबा लिखा नहीं जा सकता फिर भी जितना लिखा है बहुत लंबा है. एक बार बताइये ये बादलों पर राडार काम नहीं करता ये बात कहने की क्या ज़रूरत थी. ये बताने की क्या ज़रूरत थी कि आपके पास दुनिया के हरशख्स से पहले डिजीटल कैमरा था . आपके पास भारत में आने से पहले ही ईमेल के सुविधा थी. तीन दिन हो गए हैं . भक्त इसको छिपाने के लिए झूठ नहीं निकाल पाए हैं. ये कोई वीडियो गैम थोड़े ही है जो आप रोज़ रोज़ कठिनाइयों का स्तर बढ़ाते रहते हैं. भक्त भी तो इनसान हैं.

हमें खुद गुस्सा आता है. भक्त आपके कोई भले ही न हों पर हमारे तो दोस्त हैं ना. रोज़ रोज बेचारे लज्जित होते हैं. मोदी जी प्लीज कभी कभी ज्यादा हो जाता है. विदेशी मशरूम अगर ज्यादा किक मारते हों तो उनकी मात्रा थोड़ी कम कर दीजिए. समस्या बहुत बढ़ गई है. ऐंकर आपके लिहाज में क्रास क्वेश्चन नहीं करते इसका मतलब ये नहीं है कि जनता समझ नहीं पाएगी.

प्लीज़ सर एैसा न कहें क्या सोचती होगी दुनिया. जब आप कहते होंगे कि बादल में राडार काम नहीं करता, और पता चलता होगा कि वायुसेना आपकी इस बात को मान गई और सर्जिकल स्ट्राइक करने चली गई. मतलब आपके साथ वायुसेना की भी बहुत बेइज्जती . पाकिस्तान के सामने भी बेइज्जत. प्लीज़ सर हाथ जोड के विनती है ऐसा न करें. आपके ऊपर फेंकू शब्द कितना भी सूट करनता हो लेकिन देश के प्रधानमंत्री के उपर कलंक जैसा लगता है. (आजतक के पत्रकार गिरिेजेश वशिष्ठ का फेसबुक पोस्ट)