Rafale: सुप्रीम कोर्ट में कौन कर रहा है जजों के फैसलों से छेड़छाड़

हमने 21 अप्रेल को खबर दी थी कि किस तरह सुप्रीम कोर्ट में राफेल मामले को लेकर अंदर तक लोग घुसे हुए हैं. यहां तक कि चीफ जस्टिस पर लगाए गए घटिया आरोपों के पीछे भी यही होग नजर आ रहे थे. अब फिर एक खबर आई है कि राफल सुनवाई से जुड़े एक मामले में जजों ने कुछ और तारीखें दी थीं लेकिन रिकॉर्ड में तारीखें बदल गईं.  राफेल(Rafale) से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान देश के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई(CJI Ranjan Gogoi) ने सोमवार को कहा कि वह हैरान हैं कि इससे जुड़े मामलों की तारीखें कैसे बदल गईं.

सीजेआई का एतराज इस बात पर था कि राफेल पर पूर्व में आए फैसले की समीक्षा के लिए दाखिल पुनर्विचार याचिका और राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना मामले की सुनवाई को लेकर अलग-अलग तारीखें कैसे लग गईं. जबकि पूर्व में बेंच ने स्पष्ट कहा था कि दोनों मामलों की सुनवाई एक ही तिथि पर की जाएगी.

प्रशांत भूषण की ओर से राफेल मामले में दाखिल रिव्यू याचिका सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से जुड़ी है, जिसमें फ्रेंच एविएशन फर्म दसॉल्ट के साथ 36 राफेल विमान सौदे की मंजूरी से जुड़े फैसले पर फिर से विचार करने की मांग की गई है, वहीं अवमानना मामला, राहुल गांधी से जुड़ा है. दरअसल, राहुल गांधी ने एक चुनावी रैली में गलत दावे करते हुए सुप्रीम कोर्ट के हवाले से कह दिया था कि शीर्ष अदालत ने भी कहा है कि चौकीदार चोर है. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ऐसा कुछ नहीं कहा था. राहुल गांधी के खिलाफ दाखिल अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट उन्हें नोटिस दे चुका है.

दरअसल, 30 अप्रैल को, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने केस की सुनवाई के दौरान ओपेन कोर्ट में कहा था कि राफेल ऑर्ड की समीक्षा और अवमानना से जुड़ी याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई होगी. हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर इस आदेश की एक कॉपी भी पब्लिश हुई, जिसमें सोमवार को रिव्यू पिटीशन पर बात कही गई. जबकि राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना मामले की सुनवाई के लिए 10 मई की तारीख का उल्लेख किया गया, यह तारीख समर वैकेशन शुरू होने से एक दिन पहले की रही.

जस्टिस एसके कौल और केएम जोसेफ की पीठ ने भी अब 10 मई को दोपहर दो बजे सुनवाई के लिए दोनों मामलों को सूचीबद्ध किया है.  बहरहाल, सोमवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण  ने बेंच को बताया कि वह रिव्यू याचिका के पक्ष में बहस करने के लिए तैयार हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि उनके सह याचिकाकर्ता अरुण शौरी को एक अलग आवेदन के लिए अपनी दलीलें पेश करने की अनुमति दी जाए जो अज्ञात सरकारी सेवकों के लिए दंड की मांग करते हैं, जिन्होंने कथित  रूप से राफेल मामले की पिछली सुनवाई के दौरान अदालत को गुमराह किया था.

बता दें कि 14 दिसंबर 2018 को अपने फैसले में शीर्ष अदालत ने माना था कि फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू जेट विमानों की खरीद में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह का कोई कारण नहीं बनता और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग करने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया.यह भी कहा कि इस बात का कोई पुख्ता सुबूत नहीं है कि मामले में किसी निजी संस्था को फायदा पहुंचाया गया.

चीफ जस्टिस पर गंभीर आरोप

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के वकील उत्सव बैंस ने दावा किया था कि चीफ जस्टिस को बदनाम करने के लिए उनके पास भी कुछ लोग (फिक्सर) आए थे और उन्हें रिश्वत देने की कोशिश की थी. सुप्रीम कोर्ट के वकील उत्सव बैंस ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया है कि उन्हें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न की ऐसी जबरदस्त कहानी गढ़ने का ऑफर आया था, जिससे सीजेआई को इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़े. इस मामले में चीफ जस्टिस पर आरोप लगाने वाली स्टाफ की ही एक महिला थी.

कोर्ट के अंदर तक गद्दारों की घुसपैठ

इससे कुछ ही दिन पहले बीते दिनों चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कार्रवाई करते हुए दो कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था. इन दोनों के नाम दरअसल मानव शर्मा और तपन कुमार चक्रवर्ती है. इन दोनों ने अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किए गए न्यायिक आदेश को बदल दिया. सुप्रीम कोर्ट का आदेश था कि अनिल अंबानी टेलीकॉम कंपनी एरिक्सन द्वारा दायर अवमानना याचिका में व्यक्तिगत रूप से पेश हों. लेकिन इन कर्मचारियों ने आदेश में फेरबदल करके उसे इंटरनेट पर डाल दिया. इंटरनेट पर डाले गए आदेश में व्यक्तिगत पेशी की बात गायब कर दी गई थी. अनिल अंबानी की एक राजनीतिक पार्टी से नज़दीकी किसी से छिपी नहीं है. सब जानते हैं कि किस तरह अंबानी को फायदा पहुंचाने के आरोपों में खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी घिर चुके हैं.

बीते सात जनवरी को, सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किए गए आदेश में कहा गया था कि ‘कथित अवमानना करने वाले की व्यक्तिगत उपस्थिति को खारिज कर दिया गया है’. हालाकि, यह आदेश उस दिन अदालत में जो कहा गया था, उसके विपरीत था.

ऐसे चीफ जस्टिस के आसपास कसा घेरा

इस आरोपों पर चीफ जस्टिस ने कहा है कि इसके पीछे कोई न कोई बहुत बड़ी ताकत होगी. चीफ जस्टिस के इस दावे के बाद अब सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील ने सीजेआई के खिलाफ साजिश की योजना का पर्दाफाश किया है. हम तीनों मामलों में कुछ नहीं कहेंगे लेकिन आपस में इन घटनाओं को समझकर बहुत कुछ नतीजे निकाले जा सकते हैं.