जब राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पद विनम्रता से ठुकरा दिया था

राहुल गांधी के पास यूपीए – 2 में प्रधानमंत्री बनने का मौका था. मनमोहन सिंह की तबियत ठीक नहीं रहती थी. राहुल गांधी से कहा गया कि वो प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाल लें. खुद मनमोहन सिंह ने राहुल के सामने ये प्रस्ताव रखा था. लेकिन राहुल गांधी ने कहा कि वो ऐसा कोई प्रस्ताव स्वीकार  नहीं कर सकते. उन्होंने मनमोहन सिंह से कहा कि वो अपना कार्यकाल पूरा करें. ये दावा कांग्रेस के प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल ने किया है.

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राहुल गांधी ने अगर उस समय पद संभाल लिया होता तो हालात अलग होते. प्रणव मुखर्जी को राष्ट्रपति नहीं बनाना पड़ता. राष्ट्रपति का पद मनमोहन सिंह को दे दिया जाता. राहुल गांधी की छवि भी उससमय ठीक थी औस सोशल मीडिया पर चलाया गया 500 करोड़ रुपये का पप्पू कैंपेन भी उस समय लॉन्च नहीं हुआ था. अगर वो कुर्सी संभाल लेते तो प्रधान मंत्री के तौर पर उनकी स्वीकार्यता बन चुकी होती.

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एक ऑनलाइन प्रेस वार्ता में गोहिल ने जोर देकर कहा कि नेहरू-गांधी परिवार ने हमेशा बड़प्पन दिखाया है और निजी हितों से ऊपर पार्टी और देशहित को रखा है. उन्होंने कई मौकों पर बड़े त्याग किए और सत्ता की कभी लालसा नहीं की. उन्होंने पुराने उदाहरण सामने रखते हुए कहा कि गांधी परिवार कभी पद के लिए लालायित नहीं रहा.

उन्होंने कहा, ‘आज देश के युवा और कांग्रेस के कार्यकर्ता चाहते हैं कि राहुल गांधी ही पार्टी का नेतृत्व करें. लेकिन इस बारे में निर्णय लेने का अधिकार कांग्रेस कार्यसमिति और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को है.’

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर प्रियंका गांधी की एक टिप्पणी पर बहस छिड़ गई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि गांधी परिवार के बाहर के व्यक्ति को पार्टी का नेतृत्व करना चाहिए.

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हाल में आई एक पुस्तक ‘इंडिया टुमॉरो’ में दावा किया गया है कि प्रियंका गांधी ने राहुल गांधी की उस बात का समर्थन किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि गांधी परिवार के बाहर के व्यक्ति को कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त किया जाना चाहिए. इस पुस्तक के अनुसार, प्रियंका गांधी ने यह भी कहा है कि कोई पार्टी अध्यक्ष भले ही गांधी परिवार से नहीं हो, वह उनका ‘बॉस’ होगा. उन्होंने कहा है कि ऐसे कई योग्य लोग हैं, जो पार्टी का नेतृत्व कर सकते हैं.

वैसे तो किताब ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा हाल में जारी की गई है लेकिन कांग्रेस पार्टी का कहना है कि प्रियंका गांधी का इंटरव्यू एक साल पुराना है जब राहुल गांधी ने 2019 लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ दिया था.