नोएडा और और लखनऊ में अब पुलिस कमिश्नर, क्या होता है कमिश्नर सिस्टम?

आखिर पुलिस कमिश्नर सिस्टम होता क्या है. नोएडा noida और लखनऊ lucknow में कमिश्नर सिस्टम लागू हो गया गया है, लखनऊ में भी अब पुलिस किमश्नर होगा. लेकिन ए सिस्टम है क्या बदलेगा नया सिस्टम लागू होने के बाद . हम आपको सरल भाषा में बता रहे हैं कि कमिश्नर सिस्टम क्या है? कमिश्नर सिस्टम क्या होता है ?

फैसला  लेने को पुलिस हो जाएगी स्वतंत्र

वर्तमान व्यवस्था में पुलिस को कुछ नियंत्रणों मे रखा जाता है. उसके पास असीम ताकत नहीं होती. वो आकस्मिक परिस्थितियों में डीएम या मंडल कमिश्नर या फिर शासन के आदेश के बाद ही कोई कदम उठा सकते हैं. पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने पर जिला अधिकारी और एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के ये अधिकार पुलिस अधिकारियों को मिल गए हैं. कहा जा रहा है कि इन शहरों में नया सिस्टम पायलट प्रोजेक्ट के तहत आ रहा है.

कमिश्नर ले पाएंगे निर्णय

पुलिस के पास अब ताकत बहुत बढ़ने वाली है. पुलिस शांति भंग की आशंका में निरुद्ध करने से लेकर गुंडा एक्ट, गैंगस्टर एक्ट और एनएसए सीधे खुद ही लगा सकेगी. अब उसे इन कामों के लिए डीएम से अनुमति की ज़रूरत नहीं होगी.

क्या है कमिश्नर प्रणाली

आजादी से पहले अंग्रेजों के दौर में कमिश्नर प्रणाली लागू थी, इसे आजादी के बाद भारतीय पुलिस ने अपनाया। इस वक्त यह व्यवस्था 100 से अधिक महानगरों में लागू है। भारतीय पुलिस अधिनियम, 1861 के भाग 4 के तहत जिला अधिकारी के पास पुलिस पर नियंत्रण करने के कुछ अधिकार होते हैं। इसके अलावा, दण्ड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को कानून और व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए कुछ शक्तियां देता है।

कमिश्नर सिस्टम की पहले हो चुकी है पहल

यूपी में में कमिश्नर सिस्टम लागू करने की यह पहल कोई पहली बार नहीं है। इससे पहले 1976-77 में प्रयोग के तौर पर कानपुर में कमिश्नर सिस्टम लागू करने की कोशिश की गई थी। साल 2009 में मायावती सरकार ने भी नोएडा और गाजियाबाद को मिलाकर कमिश्नर प्रणाली लागू करने की तैयारी की थी। मगर वो अमलीजामा नहीं पहन सकी। पूर्व राज्यपाल राम नाईक ने भी प्रदेश की योगी सरकार को कई जिलों में कमिश्नर सिस्टम लागू करने की बात कही थी।

नई व्यवस्था में होटल के लाइसेंस, बार के लाइसेंस, हथियार के लाइसेंस देने का अधिकार भी कमिश्नर को मिल जाएगा. अखबारों के रजिस्ट्रेशन बगैरह का काम भी पुलिस  पास होगा.  धरना प्रदर्शन की अनुमति देना ना देना, दंगे के दौरान लाठी चार्ज होगा या नहीं, कितना बल प्रयोग हो यह भी पुलिस ही तय करेगी। जमीन की पैमाइश से लेकर जमीन संबंधी विवादों के निस्तारण का अधिकार भी पुलिस को मिल जाएगा। यानी पुलिस राज.

आम तौर पर पुलिस कमिश्नर विभाग को राज्य सरकार के आधार पर डीआईजी और उससे ऊपर यानी आईजी रैंक व अन्य के अधिकारियों को दिया जाता है। इनके अधीन पद के अनुसार कनिष्ठ अधिकारी होते हैं। फिलहाल ये चर्चा है कि नोएडा और लखनऊ में आईजी रैंक के अधिकारी को कमिश्नर नियुक्त किया जाएगा। अभी तक इन दोनों जिलों में एसएसपी की तैनाती होती थी।

भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 के भाग 4 के अंतर्गत जिलाधिकारी यानी डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट के पास पुलिस पर नियत्रंण के अधिकार भी होते हैं। इस पद पर IAS अधिकारी बैठते हैं। लेकिन पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू हो जाने के बाद ये अधिकार पुलिस अफसर को मिल जाते हैं, जो एक IPS होता है। जिले की बागडोर संभालने वाले डीएम के बहुत से अधिकार पुलिस कमिश्नर के पास चले जाते हैं।

पुलिस कमिश्नर प्रणाली में पुलिस कमिश्नर सर्वोच्च पद होता है। ज्यादातर यह प्रणाली महानगरों में लागू की गई है। पुलिस कमिश्नर को ज्यूडिशियल पॉवर भी होती हैं। CRPC के तहत कई अधिकार इस पद को मजबूत बनाते हैं। इस प्रणाली में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के लिए पुलिस ही मजिस्ट्रेट पॉवर का इस्तेमाल करती है।

हरियाणा में 3 महानगरों में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू है। इन शहरों में एनसीआर गुरुग्राम, फरीदाबाद और चंडीगढ़ से लगा पंचकुला शहर शामिल है। नोएडा, गाजियाबाद जैसे शहरों में कमिश्नरी सिस्टम लागू करने के लिए एक तर्क ये भी दिया जा रहा है कि इन शहरों में आबादी तेजी से बढ़ रही है। कानून व्यवस्था बेहतर बनाए रखने और लोगों को सुरक्षा देने के लिए इसे लागू किया जाना जरूरी है।

पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू होने से पुलिस को बड़ी राहत मिलती है। कमिश्नर का मुख्यालय बनाया जाता है। एडीजी स्तर के सीनियर आईपीएस को पुलिस कमिश्नर बनाकर तैनात किया जाता है। महानगर को कई जोन में विभाजित किया जाता है। हर जोन में डीसीपी की तैनाती होती है। जो एसएसपी की तरह उस जोन में काम करता है, वो उस पूरे जोन के लिए जिम्मेदार होता है। सीओ की तरह एसीपी तैनात होते हैं ये 2 से 4 थानों को देखते हैं।

कमिश्नर प्रणाली लागू होने पर ये होंगे पुलिस के पद

पुलिस आयुक्त या कमिश्नर – सीपी

संयुक्त आयुक्त या ज्वॉइंट कमिश्नर –जेसीपी

डिप्टी कमिश्नर – डीसीपी

सहायक आयुक्त- एसीपी

पुलिस इंस्पेक्टर – पीआई

सब-इंस्पेक्टर – एसआई