कौन है एमनेस्टी इन्टरेशनल, सरकार ने परेशान किया तो भारत छोड़ दिया

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरेशनल इंडिया ने भारत में अपना कामकाज रोक दिया है. संस्था ने भारत सरकार पर उसे जानबूझकर परेशान करने और पीछे पड़ जाने का आरोप लगाते हुए ये फैसला सुनाया.   एमनेस्टी इंटरेशनल इंडिया ने कहा कि भारत सरकार द्वारा संस्था के बैंक अकाउंट्स फ्रीज किए जाने के बाद उसने यहां अपना कामकाज रोक दिया है. इतना ही नहीं, संस्था ने आरोप लगाया है कि भारत सरकार की कार्रवाई के बाद उसे अपने कर्मचारियों को निकालने पर मजबूर होना पड़ा है.

एमनेस्टी का बयान

एमनेस्टी इंटरेशनल इंडिया ने अपनी वेबसाइट पर जारी एक बयान में कहा, ‘भारत सरकार द्वारा एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के बैंक खातों को पूरी तरह से फ्रीज कर दिया गया है, जिसकी जानकारी 10 सितंबर 2020 को हुई. इससे संगठन द्वारा किए जा रहे सभी कामों पर ब्रेक लग गया है.’

एमनेस्टी ने दावा किया कि भारत सरकार द्वारा संस्था के खातों को फ्रीज किए जाने की वजह से उसे भारत में कर्मचारियों को निकालने पर मजबूर होना पड़ा. इतना ही नहीं, भारत में चल रहे अभियान और रिसर्च वर्क को भी रोकना पड़ा.

अन्याय के खिलाफ लड़ता है एमनेस्टी

एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के कार्यकारी निदेशक अविनाश कुमार ने कहा, ‘ऐसे अभियान के लिए, जिसने हमेशा अन्याय के लिए आवाज उठाई है, उसपर नया हमला उसकी प्रतिरोध में उठ रही आवाज को उठाकर लिया गया है.” बयान में यह भी कहा गया है कि एमनेस्टी इंडिया सभी लागू भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का पूर्ण अनुपालन करता है.

पहले भी एमनेस्टी बना निशाना

एमनेस्टी पर सरकार का ये पहला हमला नहीं है इससे पहले पिछले साल नवंबर में बेंगलुरु में इसके कार्यालयों पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने विदेशी फंडिंग हासिल करने में अनियमितताओं के आरोपों पर छापेमारी की थी. एमनेट्स्टी का कहना है कि वो भारत में सभी कानूनों का पालन करते हुए उनके दायरे में ही काम करती है.

क्या है एमनेस्टी इंटरनेशनल की दिल्ली के दंगों पर रिपोर्ट ?

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) ने अपनी एक रिपोर्ट में पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए दंगों के दौरान पुलिस द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन के सभी आरोपों की स्वतंत्र जाँच करने की मांग की है.

एमनेस्टी की दिल्ली दंगों पर रिपोर्ट की खास बातें

50 से अधिक वकीलों, दंगे से सुरक्षित बचे लोगों, सामाजिक कार्यकर्त्ताओं और सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों का साक्षात्कार करने के पश्चात् एमनेस्टी इंटरनेशनल (AI) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हिंसा के दौरान कई घटनाओं में पुलिसकर्मियों का आचरण चिंता का विषय है.

रिपोर्ट के अनुसार, दंगों में सुरक्षित बचे कई लोगों ने दावा किया है कि 23 से 29 फरवरी के बीच दंगों के दौरान कई अवसरों पर पुलिस ने कॉल का कोई जवाब नहीं दिया.

वहीं दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि दिल्ली दंगों के सभी मामलों की जाँच पूरी तरह कानूनी और पेशेवर तरीके से की गई है.

गौरतलब है कि इसी वर्ष 23 फरवरी को पूर्वोत्तर दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून के समर्थकों और उसके विरोधियों के बीच दंगे भड़क उठे और जल्द ही इन दंगों ने सांप्रदायिक रंग ले लिया.

दिल्ली में हुए इन सांप्रदायिक दंगों ने एक बार पुनः देश में विभिन्न धर्मों के बीच गहराती जा रही खाई को उजागर किया था. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के केंद्रबिंदु में हुए इन दंगों में 50 से अधिक लोग मारे गए थे.

एमनेस्टी इंटरनेशनल (AI) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कोई भी व्यक्ति कानून से अधिक नहीं है और खासकर वे लोग जो कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिये उत्तरदायी हैं.

ध्यातव्य है कि इतिहास में ऐसे बहुत कम अवसर दिखाई देते है जब सांप्रदायिक हिंसा के दौरान पुलिस अधिकारियों को उनकी भूमिका के लिये उत्तरदायी ठहराया गया हो.

वर्ष 1987 के हाशिमपुरा नरसंहार मामले में 31 वर्ष बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने 16 अधिकारियों को दोषी ठहराया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.

क्या है एमनेस्टी इंटरनेशनल

एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) लंदन स्थित एक गैर-सरकारी संगठन है जिसकी स्थापना वर्ष 1961 में पीटर बेन्सन नामक एक ब्रिटिश वकील द्वारा की गई थी.

पीटर बेन्सन ने एक जनांदोलन के रूप में इसकी स्थापना मुख्य तौर पर दुनिया भर में उन कैदियों को रिहा कराने के उद्देश्य से की थी, जिन्हें अपनी राजनीतिक, धार्मिक, या अन्य धर्मनिरपेक्ष मान्यताओं की शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति के लिये कैद किया गया हो, भले ही उन्होंने न कभी हिंसा का इस्तेमाल किया और न ही इसकी वकालत की.

एमनेस्टी इन्टरनेशनल का मकसद

एमनेस्टी इंटरनेशनल (AI) का लक्ष्य एक ऐसी दुनिया का निर्माण करना है जहाँ प्रत्येक व्यक्ति मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (UDHR) और अन्य अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संबंधी दस्तावेज़ों में निर्धारित अधिकारों का उपयोग कर सके.

मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (UDHR) एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज़ है, जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 10 दिसंबर, 1948 को पेरिस में अपनाया गया था और इसी दस्तावेज़ के माध्यम से पहली बार मानवधिकारों को सुरक्षित करने का प्रयास किया गया था.

यह संगठन मुख्य तौर पर मानवाधिकार के विषय पर अनुसंधान करता है, मानव अधिकारों के गंभीर दुरुपयोग को रोकने के लिये कार्रवाई करता है और उन लोगों के लिये न्याय की मांग करता है जिनके अधिकारों का उल्लंघन किया गया है.

इसे वर्ष 1977 में ‘अत्याचारों के विरुद्ध मानवीय गरिमा की रक्षा करने’ के लिये नोबेल शांति पुरस्कार से और वर्ष 1978 में मानव अधिकारों के क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया, एमनेस्टी इंटरनेशनल (AI) द्वारा शुरू किये गए मानवाधिकार आंदोलन का हिस्सा है, जिसका पंजीकृत कार्यालय कर्नाटक के बंगलूरू में स्थिति है जो अब शायद बंद कर दिया जाएगा.

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