जेएनयू हिंसा के मामले में शक की सुई वीसी पर, छात्र पिटते रहे और वीसी…

जेएनयू में हुई मारुपीट के मामले में शक की सुई बार बार वीली आर जगदीश कुमार के आसपास पहुंच जाती है. जो जानकारियां सामने आ रह हैं वो बार बार मजबूर करती है कि वीसी चाहते तो इस हादसे को टाल सकते थे. जे एनयू में वीसी आर जगदीश कुमार ने पूरे पांच घंटे बलवाइयों और नकाबपोश गुंडों को तोड़फोड़ और मारपीट का मौका दिया था. इतना ही नहीं दिल्ली पुलिस लगातार लिखित और टाइप की हुई वीसी की अनुमति का इँतजार करती रही. इन पूरे पांच घंटों में जेएनयू में छात्र बुरी तरह पिटते रहे. उनकी हड्डियां तोड़ी जाती रहीं.

ये आरोप किसी और ने नहीं दिल्ली पुलिस ने लगाया है. पुलिस का कहना है कि  वो अनुमति का इंतजार करते रहे लेकिन वीसी ने पांच घंटे लगा दिए. हुआ ये था कि जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष आएशी घोष ने कुछ स्क्रीन शॉट मीडिया को जारी किए थे जिनमें बताया गया था कि पुलिस के अलग अलग अधिकारियों और एसएचओ को बाकायदा छात्रों ने हिंसक भीड़ के अंदर घुसे होने की सूचना दे दी थी. लेकिन पुलिस नहीं आई. इन मैसेज को अधिकारियों ने पढ़ भी लिया था.

बाद में पुलिस की तरफ से आए बयान में कहा गया कि उसकी तरफ से कोई देरी नहीं हुई. पुलिस ने कहा कि  उसके अंदर चार जवाब तैनात थे जिनकी जिम्मेदारी एमडिन ब्लॉक की हिफाजत करना था. यूनिवर्सिटी में प्रवेश के लिए पुलिस को वीसी की इजाजत की जरूरत थी जो कि करीब पौने आठ बजे दी गई.

सरल शब्दों में समझें तो वीसी आर जगदीश कुमार ने छात्रों को पूरे पांच घंटे पीटने का पूरा मौका हमलावरों को मुहैया कराया. पुलिस का कहना है कि हिंसा कि उसे जेएनयू के वीसी आर जगदीश कुमार की तरफ से  पुलिस को अनुमति पौने आठ बजे दी गई. यानी पुलिस के मुताबकि वीसी आर जगदीश कुमार ने पांच घंटे तक छात्रों को हिंसा कर रहे नकाब पोशों के भरोसे छोड़कर रखा. मारपीट करके जब लाठीधारी गुंडे यूनिवर्सिटी छोड़कर चले गए तब वीसी ने पुलिस को यूनिवर्सिटी में घसने दिया.

इतना ही नहीं जेएनयूएसयू के सूत्र कहते हैं कि वीसी आर जगदीश कुमार ने सीसीटीवी बंद करने का भी पूरा इंतजाम कर रखा था. 5 जनवरी को कुछ नकाबपोश लड़के सर्वर रूम के बार बैठ गए. वीसी ने बयान जारी किया के ये लड़के स्टूडेंट यूनियन के हैं जो रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को रोकना चाहते हैं. आएशी घोष ने वीसी के इस आरोप का उसी दिन खंडन किया और कहा कि ये लड़के उनके नहीं थे. उन्होंने ये भी कहा कि रजिस्ट्रेशन से छात्रों जो जबरन नहीं रोका जा रहा है और बल्कि लोगों से अपील की जा रही है.

छात्रों ने सोचा भी नहीं होगा कि सर्वर रूम वाली कथित घटना कहां तक जा सकती है. दिल्ली पुलिस जैसे ही जांच करने के लिए सीसीटीवी कैमरे की फुटेज मांगने जेएनयू पहुंची तो आर जगदीश कुमार ने सीसीटीवी देने से इनकार कर दिया. पता चला कि पांच दिन पहले से ही सीसीटीवी काम नहीं कर रहा है. और इसका कनेक्शन सर्वर रूम वाले मामले से जोड़ा गया. वीसी ने कहा कि सर्वर रूम मे तोड़फोड़ के कारण सीसीटीवी नहीं चल रहे थे. ऐसे में अब पुलिस के होश उड़ गए हैं कि आखिर नकाबपोशों की पहचान कैसे की जाए? कुछ नकाबपोशों की तस्वीरें जो मीडिया में सामने आई हैं वे पेरियार व गोदावरी ढाबे के बीच स्थित एसबीआई बैंक में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज हैं. बैंक के बाहर दो-तीन सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं.

जेएनयू सूत्रों के मुताबिक, बाहर से आने वाले नकाबपोशों की संख्या करीब 300 थी. लेकिन बैंक के सीसीटीवी कैमरे में आठ-दस नकाबपोशों की तस्वीरें ही कैद हो पाई हैं. ऐसे में सभी नकाबपोशों की पहचान कर पाना स्थानीय पुलिस समेत क्राइम ब्रांच के लिए काफी मुश्किल साबित हो सकता है. जांच में यह बात सामने आई है कि पहले वामपंथी समर्थक नकाबपोशों ने एबीवीपी समर्थक छात्रों पर हमला बोला. उनमें अधिकतर जेएनयू के ही छात्र शामिल थे. बाद में एबीवीपी समर्थक नकाबपोश जो बाहर से जेएनयू के अंदर घुसकर वामपंथी समर्थक विद्यार्थियों पर बुरी तरह से हमला बोला. उनकी संख्या अधिक थी.

ऐसे में बार बार ये शक जाता है कि कहीं जेएनयू के वीसी आर जगदीश कुमार ने ही तो छात्रों की पिटाई के लिए हालात पैदा किए. कहीं ऐसा तो नहीं कि जांच के सारे सूत्र वहीं पहुंचते हों.

Leave a Reply

Your email address will not be published.