Video: जामिया केस में पुलिस का तीसरा झूठ सामने आया, इस बार भी बचने का रास्ता नहीं

जामिया के छात्रों पर जुल्म को लेकर दिल्ली पुलिस का झूठा, मक्कार और राजनीतिक चेहरा तीसरी बार(third time) उजागर हुआ है. नये वीडियो सामने आए हैं जिनमें लाइब्रेरी में बैठ कर पढ़ रहे छात्रों को पुलिस बुरी तरह पीट रही है. वीडियो पिछले साल 15 दिसंबर का है जब दिल्ली पुलिस (Delhi Police) लाइब्रेरी के अंदर घुसी थी और छात्रों को बुरी तरह से पीटा था. अब करीब दो महीने के बाद उस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आ गया है. पुलिस ने लाठियां चलाने की बात से इनकार किया था, पुलिस ने लाइब्रेरी में आंसूगैस छोड़ने से इनकार किया था और पुलिस ने छात्रों पर गोली चलाने की बात भी नहीं मानी थी. तीनों बातें अब सामने आ चुकी है. इससे पता चलता है कि पुलिस  नागरिकों की रक्षा करने के बजाय सरकारी गुंडे की तरह काम कर रही है. और सत्ता धारी पार्टी इनको अपने एजेंडे के तहत बाहुबली की तरह इस्तेमाल कर रही है.

लाइब्रेरी में सक्ती से पहले दिल्ली पुलिस इनकार कर रही थी . बाद में मीडिया के लोग अंदर गए और उसे क्लासरूम में तोड़फोड़ के निशान मिले. इस मामले में पुलिस मारपीट और आंसू गैस के गोले छोडने से इनकार करती रही. बाद में मीडिया ने वहां जाकर आंसू गैस के खोल दिखाए.

पुलिस ने इसके बाद बयान दिया था कि लाइब्रेरी के अंदर दंगाई घुस गए थे . वो छात्र नहीं थे इसलिए अंदर घुसना पड़ा लेकिन अब जो तस्वीरें सामने आई हैं वो कहती हैं कि छात्र चुपचाप पढाई कर रहे थे और पुलिस ने अँदर घुसकर ज्यादती की.  कल इस बारे में एक सीसीटीवी फुटेज जारी किया गया.  ये सीसीटीवी फुटेज जामिया की ओल्ड लाइब्रेरी का है, जिसमें साफ नजर आ रहा है कि छात्र पढ़ाई कर रहे हैं. अचानक पुलिस अंदर घुसती है और लाइब्रेरी के अंदर पढ़ रहे छात्रों को बुरी तरह पीटने लगती है. इस घटना में बड़ी तादाद में छात्र घायल हुए थे. वहीं अब तक लाइब्रेरी खुल नहीं पाई है. नीचे दिया गया वीडियो हमें जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी (Jamia Coordination Committee) ने उपलब्ध कराया है.

JCC की ओर से जारी किए गया वीडियो जामिया मिल्लिया इस्लामिया की लाइब्रेरी का है. वीडियो में नजर आ रहा है कि छात्र वहां पढ़ाई कर रहे हैं. अचानक पुलिस आती है और लाइब्रेरी के अंदर घुसकर छात्रों को पीटने लगती है. पुलिस की पिटाई में एक छात्र की आंख भी गई थी.

अब बात करते हैं पुलिस फायरिंग की.

छात्रों को गोली लगी. मेडिकल रिपोर्ट में गोली लगने की बात सामने आई लेकिन पुलिस ने कहा वो गोली नहीं है. गोली की तरह की कोई चीज़ हो सकतीहै. बाद में Southeast district पुलिस ने जांच के बाद केस डायरी लीक हो गई. . ‘The Indian Express’ को के हाथ ये रिपोर्ट लग गई. इस रिपोर्ट में लिखा गया था कि पुलिस ने छात्रों पर गोली चलाई थी.

हालांकि 18 दिसंबर को इस घटना से जुड़ा एक वीडियो वायरल आया था जिसमें दो पुलिस वाले एक वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी में फायरिंग करते हुए नजर आ रहे थे.

बताते चलें कि पिछले साल दिसंबर में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया था. 15 दिसंबर की रात दिल्ली पुलिस जबरन यूनिवर्सिटी के अंदर घुसी और छात्रों को बेरहमी से पीटा. इस मामले में जामिया प्रशासन की ओर से पुलिस के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी. फिलहाल पुलिस मामले में अभी भी जांच की बात कह रही है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन से दिल्ली पुलिस के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

गौरतलब है कि देशभर में CAA का जबरदस्त विरोध हो रहा है. दिल्ली के शाहीन बाग में पिछले दो महीने से CAA को वापस लिए जाने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन चल रहा है. दो महीने के बाद आज (रविवार) आखिरकार शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से बातचीत करने का फैसला किया है. शाहीन बाग की दादियों का कहना है कि वह रविवार को दोपहर दो बजे मार्च करके गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) से मिलने जाएंगी. उनके साथ काफी संख्या में लोग गृह मंत्री से मिलने जाने की बात कह रहे हैं. फिलहाल प्रदर्शनकारियों ने न ही मार्च के लिए पुलिस से मंजूरी ली है और न ही गृह मंत्री से मुलाकात के लिए अपॉइंटमेंट. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब सरकार ने उन्हें बुलाया है तो सुरक्षा के इंतजाम भी उनकी ही जिम्मेदारी है.