पत्रकार ने पकौड़े की दुकान के उदाहरण से समझाया SIMPLE CAA

आप सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं. ये गणतंत्र दिवस कुछ खास है क्योंकि इसबार संविधान की रक्षा और उसकी आत्मा को बचाए रखने के लिए देश भर में आंदोलन चल रहे हैं और बार बार भारत के संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया जा रहा है. ये बताने की ज़रूरत नहीं है कि भारत में संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था और इसी उपलक्ष्य में गणतंत्र दिवस मनाया जाता है. संविधान पर सबसे ज्यादा चर्चा सीएए के कारण है.

सीएए यानी नागरिकता संशोधन कानून. नागरिकों का एक हिस्सा मानता है कि इस कानून पर बिलावजह विवाद छेड़ा जा रहा है. मैं ऐसा नहीं मानता इसलिए बार बार लगातार अलग अलग सरलतम तरीकों से खुद भी लिख रहा हूं और लोगों की सरल व्याख्याएं भी यहां साझा करता रहा हूं. पिछली बार मैंने एक परिवार की कहानी के ज़रिए सीएए समझाया था. इस बार दुकान की कहानी है.
जनार्दन जी की पकौड़े की दुकान थी. खानदानी दुकान थी और अपने आप पकौड़े के शौकीन ग्राहक वहां आया करते थे. दुकान अपने आप चलती थी इसलिए जनार्दन जी गल्ले पर नहीं बैठते थे. दुकान पर जाते भी थे तो अड्डे बाज़ी करने. जनार्दन जी ने दुकान अबाध रूप से चले इसलिए एक नियम बनाया था. जो भी ग्राहक आएगा कैश पर बैठे मैनेजर को भुगतान करेगा.

मैनेजर टोकन देगा टोकन सामान बांधने वाले के हाथ में देना होगा. वो पकौड़े पैक कर देगा. जिसे वहीं मौका ए वारदात पर खाना है वो वहीं खा लेगा.
जनार्दन जी ने एक नया मैनेजर रखा. नाम था शामो. जनार्दन कभी कभी जाते थे तो पता नहीं चला.

शामो में उन्हें पूरा भरोसा था. कुछ दिन बाद पता चला कि जनार्दन जी की दुकान का 70 साल पुराना नियम बदल गया है. अब पकौड़े लेने के लिए टोकन की जरूरत नहीं थी. शामो पैसे लेता और पकौड़े बांधने वाले को जुबानी आदेश दे देता.

जनार्दन जी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें. उन्होंने इसका विरोध किया. कहा कि तुमने नियम क्यों बदला. ये हमारा पुराना नियम है और इससे बेईमानी रोकने में हमेशा मदद मिली है.
शामो ने कहा कि सेठजी आपने मुझे दुकान का मैनेजर बनाया है. इस प्रकार मुझे सभी तरह के नियम बदलने का भी अधिकार है. अगर मैंने दुकान से पैसे चुराए हों या मेरे कामकाज में कही कोई चोरी हुई हो तो बताइये.

सेठ जी ने कहा लेकिन आपने हमारी दुकान के विधान को बदला है. ये हमारा सुरक्षा चक्र था. इसी से हम चोरी रोकते थे. आपकी नीयत खराब है.

शामो ने कहा कि एक भी पकौड़ा बिना पैसे के गया हो तो आप मुझे दोष दे सकते हैं. पैसे भी गल्ले में पूरे हैं. इसलिए आप फिजूल हंगामा मचा रहे हैं.

अब सीएए पर आते हैं. जनार्दन जी देश के जनता जनार्दन हैं. शामो शाह और मोदी है. माना कि आप नागरिकता देने के लिए कानून लाए है लेकिन आपने दुकान का विधान तो बदल दिया है. आज नहीं तो कल दुकान से चोरी हो सकती है. दुकान का विधान ही तो संविधान है. जो भारत में सभी नागरिकों को धर्म के आधार पर भेदभाव न करने का आश्वासन देता है. ठीक वैसे ही जैसे टोकन सिस्टम चोरी न होने की गारंटी देता था.

संविधान के पेंदे में छेद कर दिया गया है. आज नाव पानी में नहीं है इसलिए पानी अंदर नहीं आ रहा. लेकिन छेत तो छेद है. आपने संविधान के साथ छेड़छाड़ कर दी है. सुरक्षा चक्र तोड़ दिया है. भले ही आज कुछ नहीं हो रहा लेकिन आगे के लिए रास्ते तो खुल गए. इसलिए सीएए को लागू करने के लिए जो बदलाव हुए हैं उनके दूरगामी प्रभावों को समझना होगा. भारत का संविधान लोकतंत्र का चौकीदार है. उसे कमजोर न करें. (आजतक के पत्रकार गिरिजेश वशिष्ठ का फेसबुक पोस्ट)