टीआरपी बढ़ने की शिकायत करने गए टॉप चैनल्स को TV9 का करारा जवाब, लिखीं ये दस बातें

टीवी9 की बढ़ती टीआरपी के खिलाफ बार्क को चिट्ठी लिखने वाले देश के टॉप चैनलों को टीवी9 ने जबरदस्त जवाब दिया है. ‘टीवी9’ (TV9) के सीईओ बरुण दास ने विस्तृत रूप से अपना पक्ष रखा है. कल नॉकिंग न्यूज ने खबर दी थी कि ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) की ओर से बार्क को लिखे गए इस लेटर में ‘टीवी9’ (TV9) की रेटिंग में अभूतपूर्व वृद्धि को रेटिंग में त्रुटि बताया था.

क्योंकि टॉप चैनल्स की टीआरपी गिरी थी और टीवी नाइन भारत वर्ष बढ़ी थी. मीडिया की खबरें देने वाली वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ को टीवी9 के सीईओ बरुन दास ने अनपी प्रतिक्रिया भेजी है. जिसे इस वेबसाइट ने प्रकाशित किया है.

1. मुझे इस बारे में सिर्फ ‘एक्सचेंज4मीडिया’ की स्टोरी से जानकारी मिली है. मेरा इस मामले में न तो एनबीए से और न ही बार्क से आधिकारिक रूप से कोई कम्युनिकेशन हुआ है.   

2. हालांकि, मैंने कथित रूप से एनबीए के द्वारा लिखे गए लेटर को देखा है, जिस पर किसी के हस्ताक्षर नहीं हैं और उसमें से पॉइंट नंबर छह और सात गायब हैं.

3. यदि वास्तव में एनबीए की ओर से बार्क को इस तरह का कोई ऑफिशियल लेटर लिखा गया है तो मुझे एनबीए की ओर से इसकी एक कॉपी मिलने पर खुशी होगी ताकि मैं आधिकारिक रूप से एनबीए को इसका जवाब दे सकूं.

4. इसलिए, फिलहाल मैं अभी केवल इसी पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकता हूं जो मैंने उस कथित पत्र में पढ़ी हैं. एक्सचेंज4मीडिया की स्टोरी के अनुसार, इस लेटर में उन हफ्तों के दौरान भी टीवी9 भारतवर्ष की लगातार बढ़ती व्युअरशिप के बारे में सवाल उठाया गया है, जब न्यूज व्युअरशिप कम हो रही थी. लेकिन यह काफी अजीब तुलना है. बिजनेस इंडस्ट्री के अनुसार चलते हैं, लेकिन मार्केट शेयर्स का इंडस्ट्री के मूवमेंट से कोई संबंध नहीं है. ये दोनों हमेशा साथ-साथ नहीं होते हैं.

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5. टीवी9 भारतवर्ष के बारे में उठ रहे इस तरह के मामलों में मैं कुछ तथ्यों पर ध्यान दिलाना चाहता हूं. 22 मार्च को जब लॉकडाउन शुरू होने वाला था, मैंने एनबीए को एक लेटर लिखकर सुझाव दिया था कि इंडस्ट्री को कुछ समय के लिए वीकली रेटिंग्स को स्थगित कर देना चाहिए. मुझे लग रहा था कि इस महामारी के दौरान रेटिंग के चक्कर में हम रिपोर्टर्स और कैमरापर्सन की जिंदगी को खतरे में डाल देंगे. उस समय हम रेटिंग को लेकर चिंतित नहीं थे, बल्कि हमें तमाम न्यूज संस्थानों में कार्यरत पत्रकारों के स्वास्थ्य और सलामती की चिंता थी. अगले दिन एनबीए की ओर से मेरा यह सुझाव खारिज कर दिया गया.  

6. यह एक ट्रांसपैरेंट इंडस्ट्री है. हम सभी की बार्क रेटिंग्स तक पहुंच है. साथ ही हम सभी के पास लॉगर में अपने हर प्रतियोगी के हर सेकेंड के कंटेंट तक पहुंच है. हम में से हर कोई इसका विश्लेषण कर सकता है और हम सभी ने हर हफ्ते ऐसा किया भी. टीवी 9 भारतवर्ष के कंटेंट को सही तथ्यों के साथ दूसरों से अलग रखा गया था. मुझे लगता है कि जो कंटेंट हमें रेटिंग दे रहा था, वह अब अन्य चैनलों के प्राइम-टाइम पर आ रहा है.

7. हम इस मामले में सौभाग्यशाली रहे. हमारी री-लॉन्चिंग जो जनवरी में प्रस्तावित थी, वह मार्च आधे तक लेट हो गई और इसके एक हफ्ते बाद लॉकडाउन हो गया. सामान्य सी बात है कि नए और दोबारा से डिजाइन किए गए चैनल की सफलता व्यापक सैंपलिंग पर निर्भर करती है. 10 हफ्ते में 10 गुना सैंपलिंग की जहां तक बात है तो सामान्यत: इस तरह की सैंपलिंग में आठ से नौ महीने लगते हैं, लेकिन लॉकडाउन के शुरुआती कुछ हफ्तों में न्यूज व्युअरशिप में बेतहाशा वृद्धि हो गई, जिसका हमें लाभ मिला. 

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8. टीवी न्यूज इंडस्ट्री में ऐसे तमाम उदाहरण हैं, जिनमें चैनल्स ने संकट या आपदा के दौरान काफी सुर्खियां बटोरीं. जैसे- भुज में आए भूकंप के दौरान आजतक, मुंबई में हुए हमलों में एबीपी और 26/11 के हमलों के दौरान टाइम्स नाउ इसका उदाहरण है. हमारा ही चैनल ऐसा था जो कोविड-19 से पहले नए लुक, नई प्रोग्रामिंग और प्रभावशाली मार्केटिंग के साथ रीलॉन्च हुआ था.  

9. कंटेंट के साथ-साथ इसकी पैकेजिंग और डिलीवरी पर फोकस ने हमें काफी फायदा पहुंचाया है. हमने कोविड-19 को फैलाने के लिए चीन के खिलाफ दुनिया के गुस्से को महसूस कर लिया था, जबकि भारत में अभी यह पनप ही रहा था. हमने चीन और उसकी हरकतों पर काफी बारीकी से नजर ऱखी. कोविड-19 को लेकर हम चीन विरोधी लाइन पर पहले ही चल रहे थे, ऐसे में जब गलवान घाटी में हमारे जवान शहीद हुए, तब चीन के खिलाफ लोगों के अत्यधिक गुस्से का हमें रेटिंग्स में स्वभाविक रूप से फायदा मिला. इसमें कोई जादू या आंकड़ों में हेरफेर का मामला नहीं है, बस बिजनेस की मूल बातें हैं.   

10. मार्केट में स्थापित खिलाड़ी के लिए इस तरह की अच्छी भावना कभी नहीं रही कि अपनी नाक के नीचे से किसी को आगे निकलते देख सकें. मैं ऐसा कभी नहीं करता हूं. मैं नहीं चाहूंगा कि इस तरह के फैसले से मेरे बिजनेस पर कोई बुरा प्रभाव पड़े. मैं बेहतर चीजों को फॉलो करूंगा या उसे और अच्छा बनाने की कोशिश करूंगा.

11. जहां तक टीवी9 भारतवर्ष का सवाल है, यह अभी भी प्रगति की राह पर है.