ऑटो सेक्टर के बाद अब टीवी की बिक्री गिरी, नौकरियों पर खतरा

भारत की कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों ने मांग में कमी का कारण स्थानीय स्तर पर टेलीविजन (टीवी) के उत्पादन और आयात में कमी कर दी है. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सोनी, पेनासॉनिक और बीपीएल जैसी कंपनियों ने अपने घरेलू उत्पादन में 20 फीसदी तक की कटौती की है. यदि कंपनियां आगे भी उत्पादन में कटौती करती हैं तो इससे हजारों कर्मचारियों की नौकरियों पर भी संकट पैदा हो सकता है. जानकारों का कहना है कि मोबाइल फोन की बढ़ती पैठ और टीवी न्यूज़ और कार्यक्रमों के गिरते स्तर के कारण लोग टीवी देखना नहीं चाहते. मंदी के माहौल में लोगों के पास टीवी खरीदना बेहद बाद की प्राथमिकता हो गया है.

क्रिकेट वर्ल्ड कप के बाद भी नहीं बढ़ी मांग

रिपोर्ट के अनुसार, जून और जुलाई महीने में टीवी की मांग में कोई खासी बढ़ोतरी नहीं हुई है. खासतौर पर क्रिकेट वर्ल्ड कप के बाद भी टीवी कंपनियों को निराशा ही हाथ लगी है. टीवी इंडस्ट्री से जुड़े एक एक्जीक्यूटिव के अनुसार, आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप के दौरान सेल्स में ग्रोथ के कारण कंपनियों ने स्टॉक बढ़ा दिया था. लेकिन बिक्री में उछाल नहीं आने के कारण कंपनियां दुखी हैं.

एक एक्जीक्यूटिव के अनुसार, कंपनियों को अगले माह फेस्टिव सीजन शुरू होने के बाद डिमांड बढ़ने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि कंपनियां वॉशिंग मशीन जैसे होम अप्लायंसेज की बिक्री पर विशेष ध्यान दे रही है. मानसून के मौसम में वॉशिंग मशीन की बिक्री ज्यादा होती है, हालांकि पिछले महीने इसमें भी मंदी रही है. यदि अगस्त में डिमांड नहीं बढ़ती है तो कंपनियां उत्पादन घटाने के लिए मजबूर होंगी.

पेनासॉनिक इंडिया के चीफ एक्जीक्यूटिव मनीष शर्मा का कहना है कि टीवी की डिमांड में लगातार गिरावट हो रही है. वर्ल्ड कप के बाद जुलाई महीने में भी डिमांड में कमी आई है. इस कारण हमने उत्पादन में 10 से 15 फीसदी तक की कटौती कर दी है. उन्होंने कहा कि जुलाई महीने में वॉशिंग मशीन की बिक्री भी हमारी उम्मीद के अनुरूप नहीं रही है.