150 साल बाद दिखेगा ऐसा चंद्रमा, पंडितों के चक्कर में मत पड़ना

27 तारीख को चंद्र ग्रहण है. आपको तरह तरह से डराया जाएगा. पूजा पाठ बताया जाएगा. ग्रह दशा पर असर की बातें होंगी और शुभ अशुभ की कहानी कही जाएगी.  लेकिन इस लेख में जो लिखा है वोही इस चंद्र ग्रहण में खास है बाकी सब पंडितों का कमाई उद्योग है.

इस बार का चंद्र ग्रहण सदियों तक याद रखा जाना है क्यों कि  इस दिन दुनिया सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण होगा. ये ग्रहण जो 1  घंटा 45 मिनट तक चलेगा. 27 जुलाई को आधी रात में लगने जा रहे इस ग्रहण की प्रभाव में चंद्रमा करीब चार घंटे तक रहने वाला है. इस दिन मंगल भी पृथ्वी के काफी करीब होगा. चंद्र ग्रहण को लेकर पूरी दुनिया के खगोलशास्त्री काफी उत्साह में हैं.

यह एक ऐसी घटना है जब दुनियाभर के स्टार गेजर को रक्त जैसे लाल चंद्रमा को देखने का मौका मिलेगा. यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब चंद्रमा पूरी तरह से ग्रहण में होता है और सूरज की रोशनी के कारण लाल दिखाई देने लगता है.

अस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के रिसर्च स्कूल ऑफ एस्ट्रोनोमी और एस्ट्रेफिजिक्स के एस्ट्रोनोमर ब्रैड टकर के मुताबिक चंद्रमा हमेशा सूर्य और पृथ्वी के साथ पूरी तरह सीध में नहीं होता इसलिए हमें हर साइकिल में हमें चंद्र ग्रहण देखने को नहीं मिलता है.

उन्होंने आगे कहा कि हम देखते हैं कि सूर्य चंद्रमा 35000 किमी दूर रहने के बाद भी सूर्योदय और सूर्यास्त के समय चंद्रमा की सतह को रोशनी देता है. अगर आप चंद्रमा पर हैं तो आपको सूर्य ग्रहण देखने का मौका मिलता है जब पृथ्वी सूर्य के सीध में आता है और वह पूरी तरह से ढक जाता है.

यह चंद्र ग्रहण इसलिए भी खास है क्योंकि यह पूरी दुनिया में दिखाई देगा सिर्फ उत्तरी अमेरिका को छोड़कर. लेकिन यह सबसे खूबसूरत और अच्छा दिखेगा अस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोप, अफ्रीका और एशिया में. इस वर्ष यह दूसरा मौका होगा जब ग्रहण के समय ब्लड मून दिखेगा.

 

क्यों दिखता है सुर्ख लाल चांद

खगोलशास्त्री बताते हैं कि चंद्र ग्रहण को  ‘ब्लड मून’ कहे जाने की वजह इसका रंग होता है जो इस दौरान पूरी तरह से बदल जाता है. दरअसल, चंद्रग्रहण के समय जब सूरज और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आती है तो सूरज की किरण रुक जाती है. पृथ्वी के वातावरण की वजह से रोशनी मुड़कर चांद पर पड़ती है और इस वजह से यह लाल नजर आता है. जब पूर्ण चंद्रग्रहण होता है तभी ब्लड मून होता है.

इतना लंबा ग्रहण करीब 150 साल बाद दिखाई देने जा रहा है. यह आरंभ रात 11 बजकर 54 मिनट पर होगा इसका मध्यकाल रात 1 बजकर 54 मिनट पर होगा और 28 जुलाई को सुबह 3 बजकर 49 मिनट पर ग्रहण का समाप्त होगा. इस तरह ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 55 मिनट की होगी.

1 टिप्पणी

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