इसलिए कांग्रेस ने नहीं दी थी सेटेलाइट गिराने वाली मिसाइल को इजाजत, पत्रकार रमेश परीडा का पोस्ट

DRDO के former chief वी. के.सारस्वत हर टीवी चैनल पर जा कर बोल रहे हैं कि मनमोहन सरकार ने 2011 में Anti-Satellite missile test की इजाज़त नहीं दी थी. सारस्वत इसलिए बोल रहे हैं क्योंकि मोदी जी की बदौलत वो इस समय NITI Aayog के मेम्बर बने हुए हैं, यानी रिटायरमेंट के बाद नौकरी मिली हुई है.

सवाल उठता है कि मनमोहन सरकार ने 2011 में अनुमति क्यों नहीं दी ? ISRO के former chief जी. माधवन नायर कह रहे हैं कि anti-satellite missile test की क्षमता हम 2007 में उसी साल हासिल कर चुके थे, जिस साल चीन ने टेस्टिंग की थी. माधवन नायर कह रहे हैं कि उस समय मनमोहन सरकार के पास राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं थी.

अब फ्लैशबैक पर जाएं. सोचें कि 2007 में माहौल क्या था ? 2005 में मनमोहन सिंह और जॉर्ज बुश ने तय किया कि Indo-US nuclear deal करेंगे. इस 123 agreement को अमेरिकी कांग्रेस ने 2006 में काफी बहस मुबाहसे के बाद पास किया. 2007 में भारत और अमेरिका ने इस एग्रीमेंट पर दस्तखत किए.

अब सोचिए, अमेरिका के साथ आप nuclear deal करेंगे, और आप अन्तरिक्ष में सेटेलाइट मार गिराने की क्षमता दिखाएंगे, तो क्या अमेरिका nuclear deal होने देता ? हर बड़ा फैसला स्थान, काल, पात्र देख कर किया जाता है. मनमोहन सिंह इस बात को जानते थे, लेकिन वो आज भी इस बात को कहेंगे नहीं, क्योंकि वो सही मायने में एक राजनेता हैं. लेकिन मोदी और जेटली इस अहम बात को छिपा कर रखेंगे और राजनीतिक जलेबियां छानने की कोशिश करेंगे.

मोदी और जेटली दोनों जानते हैं कि जब कोई nuclear deal होने जा रहा हो, जिसमें अमेरिका और western powers भारत को एटमी ताकत के रूप में अपने क्लब में प्रवेश दे रहे हों, उस वक्त इस तरह की missile testing in space नहीं होती. ये बात माधवन नायर और वी. के. सारस्वत भी जानते हैं, लेकिन जनता को टीवी चैनलों पर बता नहीं रहे हैं.

सारस्वत कह रहे हैं कि 2011 में इजाजत क्यों नहीं दी . आप सभी को याद दिला दूं कि नवम्बर और दिसम्बर 2010 में अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा और फ्रांस के राष्ट्रपति सारकोज़ी भारत आए थे. भारत Nuclear Suppliers Group का सदस्य बनना चाह रहा था, और ये दोनों देश इसके लिए तैयार थे. केवल चीन विरोध कर रहा था, और आज तक विरोध कर रहा है. उस हालात में anti-satellite missile test कैसे हो सकता था ?

मैं फिर कहता हूं, हर फैसले के पीछे स्थान, काल, पात्र महत्वपूर्ण होते हैं. आज पाकिस्तान के साथ सीमा पर तनाव है, और भारत चीन को अंगूठा दिखाना चाहता है, दिखाना भी चाहिए, क्य़ोकि ट्रम्प सिर्फ अपने मुल्क का फायदा देख रहे हैं. ऐसे में मोदी ने anti-satellite missile testing की इजाजत दे दी, अच्छी बात है. लेकिन पुरानी बातों को कुरेद कर राजनीतिक जलेबियां न छानें तो बेहतर.

— रमेश परिडा के फेसबुक पेज से साभार, श्री परीदा बेहद वरिष्ठ पत्रकार हैं