कहीं आप पुलवामा पर किसी चाल में तो नहीं फंस गए है.

देश भक्ति के नाम पर इतना कनफ्यूज है भाई लोग कि पता ही नहीं कि चाहते क्या है. एक तरफ कहते हैं धारा 370 खत्म करो कश्मीर हमारा अभिन्न अंगहै दूसरी तरफ कश्मीरियों तो तबाह और बरबाद करना चाहते हैं. देश के बाकी हिस्सों में उन पर हमले कर रहे हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया लिखता है कि लोकल्स ने हमला किया तो गरियाने लगते हैं कि ऐसा क्यों कहा ये तो पाकिस्तान का काम है. भैया पाकिस्तान का काम है तो कश्मीर का हर नागरिक आपका दुश्मन कैसे हो गया. पंजाब के आतंक के दौर में तो आम लोग मारे जा रहे थे ट्रांजिस्टर बम से आम लोगों की जान ली जा रही थी. लेकिन आपने कभी पूरे पंजाब को दुश्मन तो नहीं माना .
खैर अगर कश्मीर के सारे लोगों को आप भारत का विरोधी मानते हो तो फिर तुम पाकिस्तान के सुर में सुर नहीं मिला रहे वो भी तो कहता है कि कश्मीर के लोग भारत के खिलाफ है और आज़ादी चाहते हैं.
कुल मिलाकर कुछ कहना है एक और बीमारी चल रही है. देश के अंदर के दुश्मनों के नाम पर एक पॉलिटिकल नारा जो एक पार्टी ने खड़ा किया उसे झुनझुने की तरह घुंमा रहे हो.
गद्दार तो कोई भी हो सकता है लेकिन क्या वो गद्दार नहीं हैं जो बाकायदा आईसिस की जासूसी करते पकड़े गए थे. फिर तुम किसी धर्म के पूरे के पूरे लोगों को गद्दार कैसे कह सकते हो.
तुम एक विचारधारा को गद्दार कहते हो लेकिन उसने तो आपको तोड़ने वाले कामों से रोका . ऐसी हरकतों से रोका जो आतंकवादियों और अलगाववादियों को को बहाना देती हैं. हम ये कैसे मान लें कि जो भी सरकार कर रही है वो देश हित में है. सरकार गलती क्यों नहीं कर सकती. कश्मीर में आतंकवादियों पर जुल्म करने के लिए पहली बार मोदी सरकार ने कई सैनिकों पर एक्शन लिया. क्या वो देशद्रोही हैं.
दर असल हम सब भेड़ें हैं. ऐसी भेड़ें जिन्हें लोग अपने बाड़े में हांककर ले जाना चाहते हैं. हमारे सामने जो भी विचार या डायलॉग आता है उसे एक मिनट भी परखते नहीं हैं. आंख बंद करके विश्वास कर लेते हैं.
उदाहरण के लिए अगर में कहूं कि मोदी सरकार ने सीआरपीएफ के जवानों को शहीद का दर्जा क्यों नहीं दिया तो आपका रिस्पांस होगा कि देना चाहिए. मिलेगा. या फिर आप कहेंगे कि किसने कहा नहीं दिया लेकिन देश में अर्धसैनिक बलों के लिए ऐसा प्रावधान नहीं है. जब ये बात पता चलेगी तो आप कहेंगे कि पुरानी सरकारो ने प्रावधान नहीं किया तो उनकी गलती है . लेकिन आपका दिमाग कहां है. वो तो खाली डिब्बा ही रहा ना. आपने तो कुछ जांचा ही नहीं.
पूरे दिन में सैकड़ों भड़काऊ पोस्ट आ रही हैं. आप भड़क रहे हैं. फड़क रहे हैं. क्या आप ये जानते हैं कि सरकार को इससे कितनी परेशानी होती है. सेना को कितना कष्ट होता है. उनके पास भी सोशल मीडिया है . उन जवानों को समझाना उतना ही मुश्किल होता है जितना आपको. युद्ध की हानि आपको समझाई भी जा सकती है. बताया जा सकता है कि भारत 50 साल या शायद 100 साल पीछे चला जाएगा.सैकड़ों नहीं हज़ारों को प्राण जा सकते हैं लेकिन जिन सैनिको को रखा ही युद्ध की लिए गया है उन्हें कैसे समझाया जाएगा कि युद्ध व्यर्थ हैऔर समझाया भी जाएगा तो आपको नहीं लगता सैनिक अफसरों के लिए ये एक बड़ा काम होगा जो आपकी हरकतों से बढ़ गया.
इस बात को स्वीकर कीजिए कि आप न तो डिफेंस एक्सपर्ट हैं न कूट नीति के जानकार . आप सिर्फ लाऊड स्पीकर हैं जिसमें जो कैसेट नेता लगा देते हैं वो बजाने लगते हैं . बिना ये समझे कि जो गाना आप गा रहे हैं वो भड़काऊ गीत भी है.
बच्चे की स्कूल की फीस के लिए एक महीने पैसे न हों तो रात को नींद नहीं आती. घर की ईएमआई आपका चैन हरे लेती है. कभी उस स्त्री के बारे में भी सोचिए जिसकी ये कमाई हमेशा के लिए बंद हो जाएगी. कभी सोचिए उसके बच्चे पूरे जीवन किसी को पिता नहीं बुला पाएंगे जिसे बूुला पाएंगे वो उन्हें शायद वो प्यार नहीं देगा. क्योंकि आप भी ठीक वैसे ही भड़काऊ भाषण दे रहे हैे जैसे हाफिज सई देता है. वो इसका एक्सपर्ट है तो लोगों को फिदायीन तक बना देता है आप एक्सपर्ट नहीं हैं लेकिन भड़का तो उतनी ही शिद्दत से रहे हैं. दंगा होगा तो भी कोई बच्चा अनाथ या यतीम होगा. युद्ध होगा तो भी ऐसा होगा.
रास्ते दो हैं.पहला येकि आप भी हाफिज सईद जैसे लोगो के भड़काऊ समाज का हिस्सा बनें या फिर शांति और समृद्धि की बातें करें. गर्क कर दें भड़काने वालों को.
आप जब भी भड़काऊ कार्रवाई करते हैं सामने वाले भड़काऊ को पूरा मौका मिलता है अपने लोगों को भड़काने को . आप जैसे हाफिज सईद का भाषण सुनकर भड़कते हैं वैसे ही वहां कोई कश्मीर के युवाओं को आपकी बातें पढ़ा पढ़ाकर भड़का रहा होता है. वो तस्वीर दिखा रहा होता है राजौरी गार्डन के उस रेस्त्रां की जिसमें लिखा होता है कि कुत्ते आ सकते हैं लेकिन कश्मीरी इस रेस्त्रांं में न आए. जब वो लोगों को भड़काता है तो कुछ ट्वीट भी होते हैं कुछ आवाज़ें भी होती हैं जिन्हें दिखाकर लोग उस नौजवान से कहते हैं कि पूरा भारत ऐसा नहीं है. कुछ लोग हैं. कश्मीरियों भारत के दरवाजे बंद नहीं है. तुम्हारे हक की बात करने वले भी वहां है. दर असल जिन लोगों को आप देश द्रोही कहते हो घर का दुश्मन कहते हो वोही देश जोड़ रहे होते हैं क्योंकि आप लाऊड स्पीकर हो. आप काली डिब्बा हो. वो ही म्यूजिक बजा देते हो जो तुम में भर दिया जाता है. बिना ये सोचे कि इस आवजा़ से देश कमज़ोर हो रहा है टूट रहा है. -गिरिजेश वशिष्ठ

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