भीड़ पर गोली चलाने की बात को दिल्ली पुलिस ने छिपाया, ऐसे कबूलने को हुई मजबूर

खबर शुरू करने से पहले आपको बता दें कि दिल्ली पुलिस सीधे केन्द्रीय गृहमंत्री अमितशाह के अंतर्गत आती है. दिल्ली पुलिस ने अब ये स्वीकार कर लिया है कि जामिया में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों पर गोलियां चलाई थीं. अबतक दिल्ली पुलिस इससे साफ साफ मुकरती रही है. यहां तक कि मेडिकल रिपोर्ट में भी गोली की पुष्टि हुई थी लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसे नकार दिया था. दिल्ली पुलिस इस गलती को मानने को खुशी खुशी तैयार नहीं हुई है बल्कि उसे मजबूर होना पड़ा.

ऐसे खुली पुलिस के झूठ की पोल

दरअसल इंडियन एक्स्प्रेस की खोजी रिपोर्ट ने दिल्ली पुलिस को मजबूर कर दिया कि वो अपनी गलती कबूल कर ले. इंडियन एक्सप्रेस ने दक्षिणी दिल्ली पुलिस की केस डायरी का पता लगाया और इस पर एक खबर छापी. खबर में ज़िक्र है कि 15 दिसंबर 2019 को एसीपी रैंक के अधिकारी के सामने दो पुलिसकर्मियों की तरफ से दो बुलेट फायर किए गए थे.

विरोध के कुछ घंटों बाद, जामिया मिलिया इस्लामिया के दो छात्रों जिनकी पहचान अज़ाज़ अहमद और मोहम्मद शोएब के रूप में हुई उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहीं तीसरे की पहचान मोहम्मद तामिन के रूप में हुई. उन्हें होली फैमिली अस्पताल में भर्ती कराया गया. अस्पताल की रिपोर्ट में इन लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें गोली लगी है. उनके इस दावे को अस्पताल की एमएलसी (मेडिको-लीगल केस) रिपोर्ट में भी दर्ज किया गया.

हालांकि पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने एक भी गोली नहीं चलाई. मेडीकल रिपोर्ट की भी पुलिस ने अपने तरीके से व्याख्या की थी. पुलिस ने कहा था कि उसने किसी भी छात्र पर गोली नहीं चलाई. हो सकता है किसी मेटल से चोट लगी हो.

15 दिसंबर की झड़पों के बाद साउथ ईस्ट दिल्ली के पुलिसकर्मियों ने सीनियर अधिकारियों से पूछा था कि क्या उनमें से किसी ने गोलियां चलाई थीं. उन सभी अधिकारियों ने कहा था कि गोली नहीं चलाई थी.

लेकिन 18 दिसंबर को एक वीडियो सामने आया. इसमें दो पुलिसवाले फायरिंग करते दिखे. पास में एक तीसरा अधिकारी खड़ा था. एक सूत्र ने अखबार को बताया कि साउथ ईस्ट पुलिस ने इन पुलिसवालों के साथ ही साथ एसीपी की भी पहचान की. और इसकी पुष्टि की गई कि फायरिंग हुई थी. इन पुलिसवालों ने बताया कि जब प्रदर्शन हिंसक हो गया था कि वो उन्होंने आत्मरक्षा में फायरिंग की. उनके बयान तब केस डायरी में दर्ज किए गए थे.

जामिया नगर और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में हिंसा से संबंधित दो एफआईआर दर्ज की गई हैं. इसमें पुलिस गोलीबारी का कोई जिक्र नहीं है. एक अधिकारी ने कहा विशेष केस डायरी अभी क्राइम ब्रांच एसआईटी को नहीं सौंपी गई है.

4 जनवरी को जब दोबारा पूछा गया कि क्या पुलिस ने गोलियां चलाई? तो डीसीपी बिस्वाल ने कहा कि वह इस पर कमेंट नहीं कर सकते क्योंकि जांच चल रही है.

जब इंडियन एक्सप्रेस ने सब दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया तो दिल्ली पुलिस ने मान लिया कि उसने गोली चलाई थी. दिल्ली पुलिस ने माना है कि जामिया हिंसा के दौरान पुलिस ने हवाई फायरिंग की थी. लेकिन पुलिस ये कह रही है कि उसकी गोली किसी को नहीं लगी. जो वीडियो सामने आया था वो सही था वो मथुरा रोड का ही है. पुलिस का दावा है उसमें जो पुलिसकर्मी फायरिंग करते हुए दिख रहे हैं, वह अपने सेल्फ डिफेंस में हवाई फायरिंग कर रहे हैं क्योंकि वहां बहुत ज्यादा पथराव हो रहा था और पुलिसकर्मी चारों तरफ से घिर गए थे.


बताते चलें कि पुलिस वालों के फायरिंग करने का वह वीडियो बीते 15 दिसंबर का है. इस फायरिंग की एंट्री पुलिस ने अपनी डीडी यानी डेली डायरी में भी की हुई है. गौरतलब है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान जामिया में हिंसा को लेकर पुलिस पर आरोप लगा है कि दर्जनों पुलिसकर्मी बगैर वीसी और चीफ प्रॉक्टर की इजाजत के यूनिवर्सिटी में दाखिल हुए थे और छात्रों को बेरहमी से पीटा. मारपीट के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे. जामिया की कुलपति नजमा अख्तर इस मामले में दिल्ली पुलिस के अफसरों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा चुकी हैं.

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