किशोरावस्था में मां बन रही हैं 33 फीसदी लड़कियां

किशोर अवस्था में मां बनने के नुकसान और किशोरों के पिता बनने के फायदे शायद उत्तर प्रदेश को ज्यादा दिखाई देते है. कम उम्र में मां बनना पिछड़ेपन की हद तक यूपी में देखा जा सकता है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री देश प्रदेश में जा जाकर हिंदू मुस्लिम गोली लाठी सख्ती पर तमाम माहौल बनाते रहते हैं लेकिन उनके प्रदेश में बच्चियों को कच्ची उम्र में मातृत्व का कष्ठ उठाना पड़ता है. सरकार के तमाम दावों के बावजूद समाज में पिछड़ापन इतना है कि बच्चियां मां बन रही हैं.

केजीएमयू के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग (क्वीनमेरी) की डॉ. सुजाता देव ने जो खुलासा किया है वो चौकाने वाला है. अपने एक सर्वे का हवाला देकर उन्होंने बताया कि करीब 33 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं की उम्र 18 साल से कम होती है. 15 से 18 साल के बीच ब्याह हो रहा है. जल्द शादी होने से वह कम उम्र में मां बन रही हैं.

डॉ. सुजाता देव ने बताया कि 18 साल की उम्र में ब्याह होना चाहिए. वहीं मां बनने की सही उम्र 21 साल है. अफसोस की बात है कि अभी भी कम उम्र में ब्याह हो रहा है. वह मां बन रही हैं. अकेले क्वीनमेरी में 12 प्रतिशत गर्भवती 18 साल से कम उम्र की पहुंच रही हैं. कम उम्र में ब्याह होने से वह कई बार मां बनती हैं. उनमें खून की कमी, ब्लड प्रेशर, थायराइड समेत दूसरी समस्याएं पनप सकती हैं. प्री मेच्योर शिशु के जन्म की आशंका भी बढ़ जाती है.

प्रसव के एक हफ्ते बाद प्रसूता की सेहत की ठीक से निगरानी होनी चाहिए. जरा सी चूक से प्रसूता की जान जोखिम में पड़ सकती है. प्रसव के बाद पेशाब कम होना, पैरों में सूजन, सिर दर्द, बुखार, रक्तस्राव हो रहा तो संजीदा हो जाना चाहिए. इसमें लापरवाही से प्रसूता की जान को खतरा हो सकता है.

करीब एक तिहाई प्रसूताओं में इस तरह की परेशानी देखने को मिलती है. समय पर समस्या की पहचान कर उस पर काबू पाया जा सकता है.

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