सीएए पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिया बड़ा झटका, जानिए कैसे किया मजबूर

नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ दिल्ली के शाहीन बाग (Shaheen Bagh) में चल रहे प्रदर्शन के सामने अब सरकार को झुकना पड़ेगा. एक इंच भी पीछे न किसकने का दंभ भर चुकी सरकार के पास सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अब कोई विकल्प नहीं छोड़ा है और अब सरकार को प्रदर्शनकारियों के साथ बात करनी ही होगी.

आज नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ धरना दे रहे प्रदर्शनकारियों को हटाने की याचिकाओं पर सुनवाई हुई. कोर्ट ने कहा कि आपको विरोध करने का अधिकार है. उसके रवैये में न तो सरकार और बीजेपी की तर्ज पर शाहीन बाग में धरने पर बैठे लोगों के लिए देशद्रोही वाला भाव था न आंदोलन को देश विरोधी गतिविधि की तरह देखा गया बल्कि कोर्ट ने आज ऐसा फैसला सुना दिया जिसके बाद सरकार को अड़ियल रवैया छोड़कर प्रदर्शनकारियों से बात करनी ही होगी.

अदालत ने अब मध्यस्थ भी नियुक्त कर दिए हैं जाहिर बात है बातचीत करना अब सरकार की मजबूरी होगी. इन मध्यस्थों से कहा गया है कि वो केन्द्र सरकार , दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के साथ मिलकर धरना हटाने के लिए रास्ता निकालें. जाहिर बात है कि धरना हटाने की बात होगी तो मांगों पर भी चर्चा होगी.

अदालत ने इस मामले में सीनियर वकील संजय हेगड़े को प्रदर्शनकारियों को मनाने की जिम्मेदारी दी है. साथ ही दिल्ली पुलिस कमिश्नर को इस मामले में हलफनामा दाखिल करने को कहा है. अब इस मामले की 24 फरवरी को सुनवाई होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े के साथ वकील साधना रामचंद्रन को वार्ताकार के तौर पर नियुक्त किया है. इसके साथ ही राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष वजाहत हबीबुल्लाह और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद इस दौरान वार्ताकारों की मदद करेंगे. इतना ही नहीं दिल्ली पुलिस से कहा गया है कि धरना स्थल पर वार्ताकार जाएंगे तो उन्की सुरक्षा हो.  जिस भीम आर्मी के चंद्रशेखर को समाज विरोधी बताकर उसकी छवि पर हमले किए जा रहे थे वो मध्यस्थता में मदद करेंगे.

पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?

दिल्ली के शाहीन बाग में पिछले 64 दिनों से नागरिकता कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में प्रदर्शन हो रहा है. इसके चलते वहां मुख्य सड़क पर आवाजाही बंद है. इलाके का ट्रैफिक डाइवर्ट किए जाने से लोगों को हो रही परेशानी के खिलाफ वकील अमित साहनी और बीजेपी नेता ओर त्रिनगर के विधायक रहे नंदकिशोर गर्ग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, वहीं, प्रदर्शन के दौरान 4 माह के बच्चे की मौत पर बहादुरी पुरस्कार प्राप्त छात्रा जेन सदावर्ते ने सुप्रीम कोर्ट को चिट्ठी लिखी थी. कोर्ट ने इस पर स्वत: संज्ञान लिया है.

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि प्रदर्शन लंबे वक्त से जारी है, इसके लिए आम रास्ते को अनिश्चितकाल के लिए कैसे बंद कर सकते हैं. लोगों को आंदोलन करने का अधिकार है, लेकिन इससे किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि प्रदर्शन निर्धारित स्थान पर ही किया जाना चाहिए. इस मामले में दूसरे पक्ष को सुनना भी जरूरी है. इसलिए तुरंत कोई आदेश जारी नहीं करेंगे. कोर्ट ने इस मामले में भी केंद्र और दिल्ली सरकार के साथ दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था.

 सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फिर से बातचीत की पेशकश की. रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) ने कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों से बात करने को तैयार है. केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पटना में मीडिया से कहा, ‘हमने प्रदर्शनकारियों को मिलने के लिए कहा है. हम प्रदर्शकारियों से बात करेंगे. नागरिकता कानून को लेकर उनकी जो भी शंकाएं हैं, उन्हें दूर किया जाएगा.’

रविशंकर प्रसाद ने इसके पहले भी प्रदर्शनकारियों से बातचीत की पेशकश की थी. एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अब तक सरकार की तरफ से किसी ने बातचीत की कोशिश क्यों नहीं की. इस पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वे लोग बातचीत को हमेशा तैयार हैं, लेकिन शाहीन बाग के कुछ नेताओं का बयान आता है कि बातचीत तब तक नहीं होगी जब तक CAA वापस नहीं होगा. कानून मंत्री ने कहा था कि प्रदर्शनकारियों की तरफ से बातचीत की गुजारिश आएगी, तो वे जरूर करेंगे.