समर कैंप में हथियारों की ट्रेनिंग दे रहा ता बजरंग दल, दर्ज हुआ केस

देश में जो हालात पैदा किए जा रहे हैं उनकी गंभीरता समझने की ज़रूरत है. हर तरफ हिंदू मुसलमान चल रहा है और कोशिश है कि एक बार धर्म के आधार पर दंगे करा दिए जाएं. इसके साथ ही हथियारों की ट्रेनिंग देने वालों को संत, त्यागी और महात्मा बताकर केन्द्रीय मंत्रिमंडल में स्थान दिया जा रहा है.

नतीजा ये हुआ है कि बजरंग दल पर एक समर कैंप में युवाओं को हथियारों की ट्रेनिंग दे रही है. डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) की ओर से शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस इस मामले की तफ्तीश कर रही है. DYFI ने गुरुवार को भायंदर स्थित नवघर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई.


दरअसल मामला ऐसे खुला, बजरंग दल कार्यकर्ता प्रशांत गुप्ता ने अपने फेसबुक पेज पर कुछ तस्वीरें पोस्ट की थीं, 21 मई को गुप्ता ने फेसबुक पेज पर एक समर कैंप के बारे में पोस्ट किया. यह समर कैंप 25 मई से 1 जून तक भायंदर पूर्व स्थित सेवेन इलेवन अकादमी में आयोजित किया गया. बता दें कि यह अकादमी बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता की है.


आरोप है कि गुप्ता ने कुछ ऐसी तस्वीरें पोस्ट कीं जिनमें युवा जलती हुई चीजों पर फायरिंग करते हुए नजर आते हैं. तस्वीरों में यह भी दिखता है कि छह राइफलें फर्श पर रखी हैं. इसके अलावा, राइफलों के साथ सेल्फी खिंचवाने वाले लोगों की तस्वीरें भी कथित तौर पर पोस्ट की गईं.
DYFI के सेक्रेटरी एडवोकेट संजय पांडे के मुताबिक, पुलिस को यह जांच करनी चाहिए कि दक्षिणपंथी संगठन ने आखिर कैसे युवाओं को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, ‘यह आर्म्स ऐक्ट के तहत अपराध है. पुलिस जांच करे कि कैंप के आयोजनकर्ताओं को हथियार कहां से मिले. यह बहुत चिंताजनक है कि ऐसी चीजें स्कूल के अंदर हुई हैं.’

हालांकि, कैंप का आयोजन करने वाले वीएचपी कार्यकर्ता सुनील आचार्य ने कैंप में हथियारों की मौजूदगी को सिरे से खारिज किया. उन्होंने कहा, ‘ये पूर्व में बिहार और यूपी में आयोजित ट्रेनिंग कैंपों की तस्वीरें हैं. वहां पर लोग थोड़े दबंग हैं. हम महाराष्ट्र में युवाओं को असलहे चलाने की ट्रेनिंग नहीं देते.’ आचार्य ने बताया कि संगठन गर्मियों और जाड़े के मौसम में कैंपों का आयोजन करता है, जिसमें 18 साल से लेकर 35 साल तक की उम्र वाले 300 के करीब लोग हिस्सा लेते हैं. इन लोगों को दौड़ने, कुश्ती, लंबी कूद और योगा आदि की ट्रेनिंग दी जाती है.

ठाणे ग्रामीण पुलिस का कहना है कि जांच में पता चला है कि गुप्ता की ओर से पोस्ट की गई तस्वीरें भायंदर कैंप की नहीं हैं. डीएसपी अतुल कुलकर्णी ने कहा, ‘हथियारों वाली तस्वीरें कैंप में नहीं खींची गई हैं. हम जानते हैं कि कैंप में हिस्सा लेने वाले लोगों को एयरगन चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है.
चूंकि यह एक प्राइवेट कार्यक्रम था, इसलिए उन्हें सूचना देने या हमसे इजाजत लेने की आवश्यकता नहीं है.’ हालांकि, आचार्य ने इस बात से इनकार किया कि कैंप में एयरगन चलाने की ट्रेनिंग दी गई. फिलहाल इस मामले में कोई केस दर्ज नहीं किया गया है.