गांव पंचायतों में ऐसे घोटाले आपने पहली बार सुने होंगे, यूपी का हाल देखिए

कभी आपने सुना है कि कोई करप्शन की शिकायत बाकायदा शपथ पत्र के माध्यम से दे. छोटी बात नहीं है . जब आप स्टांप पेपर पर लिखकर शिकायत करते हैं तो आप अपने कहे की पूरी ज़िममेदारी लेते हैं. आप हलफ उठाकर कहते हैं कि जो जानकारी में दे रहा हूं वो सही है और अगर गलत होगी तो में सज़ा के लिए तैयार हूं. लेकिन आपने ये भी कभी नहीं सुना होगा कि ऐसी शिकायत पर भी कोई एक्शन न हो.

मामला सिंलाना गांव का है जो बड़ौत जिले की छपरौली तहसील में है. करप्शन गांव गांव तक कैसे फैला है इस शिकायत से आसानी से समझा जा सकता है.

ग्राम प्रधान पर इस शपथपत्रमें आरोप लगाया गया है कि उसने अपने ही घर में दो शौचालय पास करा लिए और अपने पहले से मौजूद शौचालयों को नया दिखा दिया . जो पैसे मिले वो हड़प गया.

आरोप  है कि इसी ग्राम प्रधान ने नाली पर चैनल लगाने के नाम पर एक लाख 91 हज़ार 185 रुपये का खर्च दिखाया है. शिकायत करने वाले का कहना है कि ये गबन का मामला है.

शिकायत कर्ता ने कहा है कि कमीशन के चक्कर में ग्राम प्रधान नयी की नयी सड़कों को फिर से बना रहा है. इतना ही नहीं महंगे दाम में घटिया क्वालिटी के कूड़े के डिब्बे भी खरीदकर खेल किया गया. गांव में हैंड पंप की मरम्मत और उसे रीबोर करने के नाम पर भी आठ लाख उनतालीस हज़ार खर्च हो गए.

इतना ही नहीं ग्राम प्रधान नें पहले से जो काम हुआ पड़ा है उसके भी टेन्डर निकाल दिए हैं. इनमें प्राइमरी स्कूल में बैंच खरीदने और स्ट्रीट लाइट लगाने के टेंडर भी हैं.

और तो और प्रधान साहब ने अपने ही घर के सदस्यों को नरेगा में रोज़गार दिखाकर मोटी रकम बना ली.

शपथकर्ता ने कहा है कि उसकी शिकायत की जांच कराई जाए. राजीव गांधी ने पंचायती राज को बढ़ावा दिया था ताकि जो दिल्ली से एक रुपया चलता है वो आम आदमी तक पहुंचते पहुंचते 15 पैसे में न बदल जाए. लेकिन ये मामला देखकर लगता है कि प्रशासन ढीला हो तो लहरें गिनकरकमा लेने वाले लोग हर जगह मौजूद हैं.