मजदूरों के लिए कोरोना ट्रेन का कैसे मिलेगा टिकट ? कैसे लिया जाएगा किराया ?

अलग-अलग राज्यों में फंसे मजदूरों, तीर्थयात्रियों, टूरिस्टों, छात्रों और अन्य लोगों को अपने राज्य पहुंचाने के लिए रेलवे ने ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेन (Shramik Special trains) चलाने का फैसला किया है. इसकी शुरुआत आज से मजदूर दिवस के मौके पर की गई है. आज प्रधानमंत्री के साथ अहम बैठक के बाद गृह मंत्रालय ने रेलवे बोर्ड को स्पेशल ट्रेन चलाने की मंजूरी दी. हालांकि अब राज्य सरकारों पर रेलवे के साथ मिलकर अपने प्रदेश के फंसे हुए लोगों को लाने की जिम्मेदारी है.

रेलवे से जो भी राज्य सरकार श्रमिक स्पेशल चलाने की मांग करेगी, उस ट्रेन में यात्रियों का किराया राज्य सरकार से ही रेल मंत्रालय लेगा. राज्य सरकार को यह छूट होगी कि वह श्रमिकों से किराया ले या नहीं ले. रेलवे ने यह भी कहा है कि उनकी गाड़ी में जो यात्री चढ़ जाएगा उनको वह फ्री में खाना खिलाएगा. पानी का बोतल भी मिलेगा. रेलवे की तरफ से खाना पानी कंप्लीमेंट्री होगा . लेकिन किराए का पैसा राज्य सरकार से लेंगे.

रेलवे ने तय किया है कि आज रात 12:00 बजे से जो भी ट्रेन चलेंगी, उसमें मेल एक्सप्रेस के स्लीपर श्रेणी का किराया प्रति यात्री राज्य से लिया जाएगा. साथ ही उन पर सुपर सर चार्ज भी लगाया जाएगा और प्रति यात्री 20 रुपये का अतिरिक्त चार्ज भी राज्यों से वसूला जाएगा.

ये स्पेशल ट्रेनें पॉइंट-टू-पॉइंट राज्य सरकारों के अनुरोध पर चलेंगी. इस दौरान स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा. ट्रेन संचालन में किसी तरह की परेशानी नहीं हो इसके लिए राज्य सरकार और रेलवे मिलकर स्पेशल नोडल ऑफिसर की नियुक्ति कर सकते हैं. इनकी जिम्मेदारी श्रमिक स्पेशल ट्रेन का उचित संचालन होगा.

यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी कि ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग सही तरीके से हो और स्वस्थ लोग ही ट्रेन में सफर करें. अलग-अलग जगहों से लोगों को सैनिटाइज बस द्वारा स्टेशन तक लाने की जिम्मेदारी भी राज्य सरकार की होगी. इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का प्रमुखता से पालन करना होगा.

ट्रेन में यात्रा करने के दौरान हर यात्री को मास्क पहनना जरूरी है. यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि जो यात्री ट्रेन में सफर कर रहे हैं उनके लिए खाने का उचित प्रबंध किया जाए. खाने का प्रबंध वहीं किया जाएगा जहां से यात्रा शुरू हो रही है. रेलवे अपने स्टॉफ की मदद से ट्रेन में सोशल डिस्टेंसिंग और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखेगी.

अगर ट्रेन लंबे रूट पर जा रही है तो यात्रियों को बीच सफर में भी खाना मिलेगा. बीच सफर में खाने का बंदोबस्त रेलवे की तरफ से किया जाएगा. गंतव्य स्थान पहुंचने के बाद यात्रियों को उनके घर तक कैसे भेजा जाए, स्टेशन पर स्क्रीनिंग, जरूरत पड़ने पर क्वारंटीन करने जैसी जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होगी.

रेल मंत्रालय के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर राजेश दत्त वाजपेयी ने प्रेस नोट जारी कर इसकी पूरी जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि रेलवे में काम करने वाले सभी अधिकारी और कर्मचारी संकट की इस घड़ी में एकजुट होकर देश के साथ खड़े हैं. साथ ही देश के लोगों से भी पूरी मदद की उम्मीद कर रहे हैं.