सरकार के लिए आसान है CAA और NRC का आंदोलन खत्म करना, ये है तरीका

सरकार चाहे तो बड़ी आसानी से देश में चल रहा सीएए और एनआरसी का बवाल खड़ा कर सकती है. उसे सिर्फ दस सवालों के सीधे जवाब देने हैं और विवाद खत्म हो जाएगा. और तो और विपक्ष जितना भी भ्रम फैलाने की कोशिश कर ले इन सवालों जवाब के बाद वो कामयाब नहीं हो पाएगी. ये सवाल जवाब मांग रहे हैं लेकिन सरकार के जलेबी की तरह उलझे हुए बयानों से स्थिति और मुश्किल होती जा रही है.

1. CAA यानी नागरिकता संशोधन क़ानून से पहले भारत में घुसपैठियों को आने से रोकने या आ गए घुसपैठियों को बाहर करने के लिए कोई कानूनी प्रावधान था या नहीं?

2. क्‍या हिंदू, मुस्‍ल‍िम, सिख, ईसाई, यानी गैर-मुस्लिम शरणार्थी अगर भारत की नागरिकता के लिए अर्जी दे तो उसे मंजूर करने या नकारने का अधिकार CAA से पहले भारत सरकार के पास था या नहीं?

3. CAA से पहले किसी मुस्लिम शरणार्थी द्वारा भारत की नागरिकता मांगे जाने पर सरकार उसे नकार या मंजूर कर सकती थी या नहीं?

4. अगर ऊपर के तीन सवालों के जवाब हां में हैं तो CAA लाने से क्‍या मकसद क्या है ?

5. अगर CAA लाया गया तो हिंदू, सिख, ईसाई आदि लिखने या बताने की जरूरत क्‍यों पड़ी? क्‍या केवल ”अल्‍पसंख्‍यक” लिखना काफी नहीं था?

6. CAA और NRC जैसे बड़े मुद्दों पर सही-गलत विरोध को उस स्‍थ‍िति‍ तक क्‍यों पहुंचने दिया गया, जहां बड़े पैमाने पर हिंसा, आगजनी, मौतें हुईं? अब भी इसे रोकने का कोई ठोस प्‍लान है?

7. NRC पर गृह मंत्री, मंत्री, प्रधानमंत्री की अलग राय के बीच देश किसकी बात पर भरोसा करे? संसद में दिए गए अधिकृत बयान पर, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर या प्रधानमंत्री की चुनावी रैली पर? अंतिम रूप से सरकार की राय क्या है?

8. अगर गृह मंत्री अमित शाह की बात मानते हुए माना जाए कि सरकार पूरे देश में NRC लागू करेगी तो इस पर आने वाला खर्च वहन करने की स्थिति में क्या अभी भारत है? क्या उस खर्च की वैल्‍यू देश को मिलेगी? केवल असम में NRC लागू करने में 1500 करोड़ रुपए से ज्‍यादा खर्च हुए हैं और अरबों मानव घंटों की खपत हुई है. पूरे देश में लागू करने में कितना ख़र्च आएगा?

9. जब हम हर दस साल पर जनगणना कराते ही हैं तो अलग से NRC के लिए इतना खर्च करना हमारी आर्थ‍िक स्थिति के मद्देनजर सही है? यह विकास में हमें और पीछे नहीं ले जाएगा?

10. अगर नागरिकता साब‍ित करने के लिए आधार, वोटर कार्ड, पासपोर्ट आदि दस्‍तावेज और यहां तक कि गवाही भी मान्‍य होगी तो क्‍या इन कागजात वालों को NRC की कागजी प्रक्र‍िया से बाहर रखा जाएगा?

11. प्रक्र‍िया के दौरान सरकार की ओर से लापरवाही (टाइप करने में गलती आदि) हुई तो जनता की नागरि‍कता का क्‍या होगा? गलती सही करवाने की क्‍या प्रक्र‍िया/व्‍यवस्‍था होगी?

12. आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट आदि अगर बाहरी लोगों ने बनवा लिए हैं, तो वे लोग NRC के काग़ज़ नहीं बनवा सकेंगे, इसके लिए क्‍या प्रक्र‍िया/व्‍यवस्‍था होगी? अगर NRC ऐसे लोगों की पहचान के लिए है तो यह पहचान सरकार अभी ही क्‍यों नहीं कर सकती?

13. जैसी अफरातफरी असम में मची, वैसी देश भर में नहीं मचेगी, इसकी क्‍या व्‍यवस्‍था होगी? नोटबंदी देश भर में हुई थी. उस दौरान जो अव्‍यवस्‍था और अफरातफरी मची थी, देश उसका गवाह रहा है.

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