नागालैंड की तर्ज पर इस राज्य ने मांगा अलग संविधान और झंडा, नहीं मनाएंगे 15 अगस्त

नगालैंड के बाद अब देश के एक और राज्य में अलग झंडा और अलग संविधान की मांग उठने लगी है. इस राज्य में इस बार 15 अगस्त नहीं मनेगा क्योंकि यहां कुकी विद्रोहियों ने इसके बहिस्कार का एलान किया है. यह राज्य मणिपुर ( Manipur ) है जहां पर मौजूद कुकी नेशनल फ्रंट नेहलुन और सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट आफ कुकीलैंड उग्र समूहों ने ऐलान किया है कि वो पहाड़ी इलाकों वाले जिलों में स्वतंत्रता दिवस का बहिष्कार करेंगे.

हिल जिले में 14 अगस्त की शाम से 15 तक मनाए जाने वाले भारतीय स्वतंत्रता दिवस का बहिष्कार कुकी नेशनल फ्रंट कर रहा है. दरअसल इसके पीछे भी बड़ी वजह है. कुकी लोगों का कहना है कि केंद्र सरकार उनके पूर्वजों की ओर से भारत के स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए योगदान को भूल गई है. इसके अलावा केंद्र सरकार यह भी भूल गई है कि यहां पर कुकीलैंड बनाया जाना था.

कुकीलैंड की मांग को लेकर ही ये समुदाय इस बार स्वतंत्रता दिवस का बहिष्कार कर रहा है. संगठन का कहना है कि सरकार ने नागालैंड का गठन तो कर दिया लेकिन कुकीलैंड को लेकर कुछ नहीं किया.

उधर सूचना एवं पब्लिसिटी सेक्रेटरी गोउ एलियास कुकी के मुताबिक वो अपने इस विरोध को व्यापक स्तर पर करने के लिए अन्य संगठनों से भी समर्थन प्राप्त करेंगे.

आपको बता दें कि 2015 में मोदी सरकार ने नगा विद्रोंही गुटों से समझौता किया था जिसमें नागालैंड में विद्रोही ग्रुप NSCN-IM के साथ मोदी सरकार ने दस्तखत किया था. समझौते के अनुसार नागालैंड के लोग अपना अलग झंडा और पासपोर्ट रख सकेंगे.

आश्चर्यजनक रूप से सरकार ने इस समझौते को करीब एक साल तक  छिपाकर रखा. भारत सरकार ने भी इस पर चुप्पी साध रखी थी. समझौता इतना दबा छिपाकर किया गया कि. भारत की मुख्यधारा की मीडिया में इसकी कोई खबर ही नहीं आई.

NSCN-IM के स्वघोषित गृह मंत्री किलो किनोंसेर के अनुसार भारत सरकार ने उनकी अलग झंड और पासपोर्ट की मांग मान ली है और यह 2015 के समझौते का हिस्सा है.

पूर्व विद्रोही समूह के अनुसार NSCN-IM और भारत सरकार के बीच का यह समझौता नागाओं के अलग राजनितिक विचारधारा की जीत है. नरेन्द्र मोदी की केंद्र सरकार द्वारा इस समझौते को ऐतिहासिक बताया गया था और स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा था कि देश को खुशखबरी मिलने वाली है.