अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा वापस, अचानक सरकार ने क्यों बदला फैसला

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने राज्य के 400 से ज़्यादा नेताओं की सुरक्षा बहाल कर दी है.

जिन नेताओं की सुरक्षा वापस की गई है उनमें ‘ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (APHC) के चेयरमैन मीरवाइज उमर फारूक, अलगाव वादी नेता शब्बीर शाह, हाशिम कुरैशी, बिलाल लोन, फजल हक कुरैशी और अब्दुल गनी बट की सुरक्षा वापस कर दी गई है.  इन नेताओं को दी जाने वाली सरकारी गाड़ियां और अन्य सुविधाएं भी वापस कर दी जाएंगी.

सैयद अली गिलानी और मोहम्मद यासीन मलिक को पहले से कोई सुरक्षा नहीं दी जा रही थी क्योंकि गिलानी फिलहाल नजरबंद हैं। प्रशासन ने एक ऑर्डर जारी कर अलगाववादियों को दी जाने वाली सुरक्षा को गैरजरूरी बताते हुए उनसे सभी सुविधाएं वापस लेने का फैसला किया था। अब ये आदेश वापस ले लिया गया है. राज्यपाल ने कहा कि सभी योग्य लोगों की सुरक्षा फौरी तौर से बहाल की जा रही है.

इन नेताओं की सुरक्षा को बीजेपी ने देश व्यापी मुद्दा बनाया था. पार्टी ने कहा था कि देश के दुश्मन देश के पैसे से ऐश कर रहे थे. बीजेपी ने सख्त कदम उठाकर उसे वापस ले लिया. सरकार अलगाववादियों पर साल में करीब 14 करोड़ रुपये खर्च करती है। 11 करोड़ सुरक्षा, 2 करोड़ विदेशी दौरे और 50 लाख गाड़ियों पर खर्च होते हैं। करीब 600 जवान सुरक्षा में लगे रहते हैं। साल 2018 में जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2008 से लेकर 2017 तक अलगाववादियों को सुरक्षा मुहैया करवाने पर 10.88 करोड़ रुपये खर्च किए गए। 

बता दें कि जम्मू और कश्मीर में पिछले एक साल से राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है. यहां 11 अप्रैल से 6 मई तक 5 चरणों में लोकसभा चुनाव के लिए मतदान होगा जिनके नतीजे 23 मई को सामने आएंगे. पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए आतंकी हमले के बाद जम्मू कश्मीर के कई नेताओं और अलगाववादियों की सुरक्षा को हटा दिया गया था. जिस पर राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने नाराजगी भी जताई थी. एनडीटीवी से बातचीत में मलिक ने नेताओं की सुरक्षा बहाल की पुष्टि की है.

शनिवार को श्रीनगर में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई थी.जहां कश्मीर के सुरक्षा हालातों पर चर्चा हुई थी. जिसके बाद यह फैसला लिया गया. राज्यपाल सत्यमलिक ने कहा कि यह हमारे लिए किसी भी तरह की प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं है इसे केवल तर्कसंगत बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि हम किसी की भी सुरक्षा को खतरे में नहीं डालेंगे.