मंदी के कारण सीमा बल पर संकट, 90 हज़ार जवानों के भत्तों का भुगतान लटका

देशभक्ति की बात करने वाली सरकार में देश के सैनिकों या कहें कि जवानों की जिंदगी पर भी परेशानियां मंडराने लगी हैं. मंदी का आलम ये है कि दिवालिया होने के कगार पर खड़ी केन्द्र सरकार अब जवानों के भत्तों में भी कटौती कर रही है.

खबर है कि सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल के करीब 90000 कर्मियों को सरकार की तरफ से जनवरी और फरवरी के भत्तों का पेमेन्ट नहीं किया गया है. टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार सैन्य कर्मियों को मिलने वाले चाइल्ड एजुकेशन भत्ता का भी पेमेन्ट नहीं किया गया है.

इसकी वजह फंड की कमी बताया जा रहा है. खबर के अनुसार सीमा बल ने सरकार को सूचित कर दिया है कि उनके पास दो महीनों का वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं. भले ही सरकार आर्थिक सुस्ती की बात से इनकार करे लेकिन बजट करीब आने के साथ ही यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ रहा है.

खबर के अनुसार चार महीने में यह दूसरा मौका है जब अद्धसैनिक बलों के कर्मियों के भत्तों का पेमेन्ट रोक दिया गया है. पिछले साल सितंबर में सीआरपीएफ के 3 लाख जवानों का 3600 रुपये का राशन भत्ता रोक दिया गया था. इसकी वजह थी कि गृह मंत्रालय ने फंड की कमी को लेकर भेजे गए तीन रिमाइंडर को इग्नोर कर दिया था.

मामला सामने आने पर विवाद बढ़ता देख सरकार की तरफ से अक्टूबर महीने में फंड जारी किया गया था. मालूम हो कि सशस्त्र सीमा बल में 94261 कर्मचारी हैं.

ये लोग नेपाल और भूटान से सटी 2450 किलोमीटर की खुली सीमा की निगरानी करते हैं. खबर के अनुसार एसएसबी की तरफ से 23 जनवरी को जारी आंतरिक पत्राचार के दौरान एसएसबी जवानों के सभी प्रकार के भत्तों को दो महीने के लिए रोकने की घोषणा की गई थी. इसमें चाइल्ड एजुकेशन भत्ता और लीव ट्रैवल कन्सेशन भी शामिल है.