RBI का नये नोट छापने से इनकार, सरकार को झटका

जब प्रधानमंत्री संसद में खडे होकर अपना चुनावी भाषण दोहरा रहे थे तो एक और खबर आ रही थी जो उनकी शेखी नुमा बातों की पोल खोलने वाली थी. इसी समय भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने एलान किया कि वो नये नोट नहीं छापेंगे. जी हां आरबीआई ने नयो नोट छापने से इनकार कर दिया है. सरकार के को झटका इससे बड़ा नहीं लग सकता.

राजकोषीय घाटे की हालत खराब है यही वजह है कि सरकार एक के बाद एक कंपनियां बेच रही है और अपने हिस्से के शेयर बेचने में लगी है. इतना ही नहीं सरकार कई बार खर्चा चलाने के लिए आरबीआई से पैसे भी ले चुकी है. यह लगातार तीसरा साल है, जब सरकार ने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को संशोधित किया है. बजट में राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष में 3.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है, जबकि पिछले बजट में इसके 3.3 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई थी.

सरकार के मुताबिक अगले वित्त वर्ष 2020-21 के लिए राजकोषीय घाटा 3.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि जुलाई 2019 में इसके 3 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई थी. सरकार का राजकोषीय घाटा दिसंबर अंत में 132 प्रतिशत को पार कर गया है.

इसका मतलब ये है कि सरकार की आदमनी कम है लेकिन खर्चा ज्यादा है. जीएसटी की वसूली नहीं हो सकी है. और कई योजनाओं के लिए पैसा नहीं है. इसी वजह से प्रधानमंत्री को सुरक्षा और दूसरे मामलों पर फिजूलखर्जी के लिए निशाना बनाया जा रहा है.

सरकार की कुल आय और खर्च में अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है. इससे पता चलता है कि सरकार को कामकाज चलाने के लिए कितनी उधारी की जरूरत होगी. राजकोषीय घाटा आमतौर पर आय में कमी या पूंजीगत व्यय में अत्यधिक वृद्धि के कारण होता है.

दास ने मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए अतिरिक्त नोट छापने की कोई योजना नहीं है.’ सरकार ने बजट में राजकोषीय जवाबदेही और बजट प्रबंधन (FRMB) कानून के तहत छूट उपबंध का उपयोग किया है. इसके अंतर्गत राजकोषीय घाटा रूपरेखा के लिए 0.5 प्रतिशत वृद्धि की गुंजाइश उपलब्ध है.

बता दें कि बजट के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से आस लगाकर बैठे मिडिल क्लास को गुरुवार को निराशा हाथ लगी है. आरबीआई ने गुरुवार को चालू वित्त वर्ष की अंतिम द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में रीपो रेट को 5.15 के स्तर पर बरकरार रखने का फैसला किया है. केंद्रीय बैंक ने अनिश्चित वैश्विक माहौल और घरेलू बाजार में मुद्रास्फीति तेज होने तथा बजट में राजकोषीय घाटे का अनुमान बढ़ाये जाने के बीच यह कदम उठाया है.

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