गायत्री परिवार के प्रमुख प्रणप पंड्या पर रेप केस,जानिए पूरी कहानी

गायत्री परिवार के मुखिया डॉक्टर प्रणव पंड्या पर एक लड़की ने रेप का आरोप लगाया है. लड़की छत्तीसगढ़ की रहने वाली है और उसने दिल्ली के विवेक विहार थाने में मुकदमा दर्ज कराया.  मुकदमा दर्ज होने के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले को हरिद्वार पुलिस को सौंप दिया है . अब इस मामले की जांच हरिद्वार कोतवाली पुलिस के पास है. प्रणव पंड्या शांति कुंज हरिद्वार के संस्थापक श्री राम शर्मा आचार्य के दामाद है. मामले में डॉ. पांड्या की पत्नी शैलजा को भी नामजद किया गया है.

पीड़िता के मुताबिक, जुलाई 2010 को वह शांतिकुंज के प्रमुख को कॉफी देने कमरे में गई. आरोप है कि उसी दौरान उसके साथ रेप हुआ. पीड़िता के मुताबिक, इस घटना के एक सप्ताह बाद फिर उसके साथ दोबारा रेप किया गया और जान की धमकी देकर चुप रहने को कहा गया. अब पीड़िता ने रिपोर्ट दर्ज कराई है.

आरोप है कि युवती जब नाबालिग थी , वो वर्ष 2010 से 2014 तक शांतिकुंज में ही रही थी, उस वक्त वह खाना बनाने वाली टीम का हिस्सा थी. युवती ने डॉक्टर पंड्या पर दुष्कर्म करने और पत्नी पर मामले को छिपाए रखने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है. यह भी आरोप है कि यह सिलसिला वर्ष 2014 तक चलता रहा. ज्यादा तबीयत खराब होने पर उसे घर भेज दिया गया. उसे किसी को भी इस बारे में जानकारी देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई थी.

इस मामले में दो बातें बताना बहुत जरूरी है, 2019 के आम चुनाव में बीजेपी अध्यक्ष प्रणव पंड्या से मिलने गए थे और उन्हें बुकलेट देकर अपील की थी कि वो गायत्री परिवार के लोगों से बीजेपी को वोट देने को कहें. अमित शाह ने प्रणव पंड्या से शांति कुज हरिद्वार के साधकों की संख्या भी पूछी थी.

इसके बाद प्रणव पंड्या ने एक बयान जारी किया जिसमें कहा था कि शांति कुंज कोई फतवा जारी नहीं करता. हमारे 15 करोड़ साधक हैं. वो जिसे चाहें अपनी बुद्धि से वोट दें. उन्होंने ये भी कहा था कि वो नमामि गंगे की प्रगति से खुश नहीं हैं. इससे ज्यादा अच्छा तो गायत्री कुंज का काम चल रहा है. ये खबर उस समय जोर शोर से उठी थी

रेप मामले में शांतिकुंज परिवार ने मामले को पूरी तरह फर्जी बताते हुए इसे विश्व विख्यात संस्था को बदनाम करने की गहरी साजिश बताया है. शांतिकुंज के प्रचार विभाग की ओर से की जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि जो मुकदमा दर्ज कराया गया है उसमें सारे आरोप निराधार और तथ्यहीन हैं.

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प्रेस विज्ञप्ति में मुकदमा दर्ज कराने में देरी पर सवाल उठाए हैं.  संस्थान ने कहा है कि पूरा प्रकरण द्वेष भावना से प्रेरित होकर किया गया है. उनके मुताबिक यह संस्था की ख्याति को नुकसान पहुंचाने की साजिश के साथ ही संस्था से जुड़े 16 करोड़ साधकों के लिए भी बेहद द़ुखद और हृदय विदारक है. यह भी कहा गया है कि संस्था हर तरह की जांच में सहयोग के लिए तैयार है.

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उन्होंने कहा, ‘मुझपर झूठे आरोप लगाए गए हैं. जिस शख्स ने यह शिकायत की है वह शांतिकुंज में रहता है.’ पांड्या ने आरोप लगाया कि वह शख्स अपनी पत्नी को भी उनके खिलाफ इस्तेमाल कर ब्लैकमेल करता रहता है.

गायत्री परिवार ने भी प्रणव पांड्या पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है. एक बयान में कहा गया कि ये आरोप 16 करोड़ भक्तों की भावनाओं को आहत करने की एक नाकाम कोशिश है और किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है.