जब जस्टिस गोगोई पर लगा संगीन आरोप, उतार चढ़ाव से भरा है जीवन

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को राज्यसभा के लिए नामित किया है. रंजन गोगोई ने भारत के चीफ जस्टिस के रूप में 9 साल से सुप्रीम कोर्ट में  लंबित अयोध्या में बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद पर फैसला सुनाया था. इस मामले की सुनवाई पांच जजों की पीठ ने की थी.

जस्टिस गोगोई का सुप्रीम कोर्ट का कार्यकाल राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में फैसला सुनाने के साथ ही साल 2018 में तीन अन्य जजों के साथ मिलकर अभूतपूर्व रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए भी याद किया जाएगा. जस्टिस गोगोई उस पीठ के भी अध्यक्ष से जिसने साल 2018 में सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की लड़कियों और महिलाओं के प्रवेश को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था.

इस फैसले से कुछ ही समय पहले जस्टिस गोगोई पर बड़े मामले के दर्ज होने के बादल मंडराने लगे थे. सुप्रीम कोर्ट में काम करने वाली एक महिला ने जस्टिस गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया. इस आरोप से सनसनि मच गई. कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर केस बांटने में भेदभाव का आरोप लगा था. चार न्यायाधीश मीडिया के सामने आए थे. माना जा रहा था कि जस्टिस गोगोई सरकार के खिलाफ है. घटना के कुछ समय बाद ही चीफ जस्टिस गोगोई पर ये आरोप लगा.

ये भी पढ़ें :  स्वामी अग्निवेश पर ABVP कार्यकर्ताओं का हमला, पीटा कपड़े फाड़े

आरोपों के बाद समझा जा रहा था कि शायद जस्टिस गोगोई को बड़े आरोपों में कार्यवाही का सामना न करना पड़े इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के ही जस्टिस गोगोई से जूनियर न्यायधीशों की कमेटी बनाई गई जिसमें  जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी सहित आतंरिक समिति ने महिला कर्मचारी की शिकायत पर जांच की थी, इन लोगों के अनुसार महिला के आरोपों में कोई तथ्य नहीं पाए गए थे और पूर्व सीजेआई को इन आरोपों से क्लीन चिट दे दी गई थी.

इस महिला को झूठे आरोप लगाए जाने के बाद नौकरी से निकाल दिया गयाथा. महिला ने कहा था न्यायालय की आंतरिक समिति द्वारा सीजेआई को क्लीनचिट दिए जाने पर शिकायतकर्ता महिला ने कहा था कि वह बेहद निराश और हताश हैं.

बाद में महिला को  सुप्रीम कोर्ट द्वारा नौकरी पर बहाल कर दिया गया.  बहाल किए जाने के बाद महिला कर्मचारी काम पर लौट आई हैं. हालांकि, ड्यूटी जॉइन करते ही वह छुट्टी पर चली गई हैं. उन्हें उनके सभी एरियर (बकाया वेतन) भी दे दिए गए हैं.

ये भी पढ़ें :  भक्तों से सावधान रहने में ही भलाई, अपने दोस्त को ही मोदी के चक्कर में पहुंचा दिया जेल

शीर्ष अदालत की इस पूर्व कर्मचारी ने सुप्रीम कोर्ट के 22 जजों को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि सीजेआई जस्टिस रंजन गोगोई ने अक्टूबर 2018 में उनका यौन उत्पीड़न किया था.

35 वर्षीय यह महिला अदालत में जूनियर कोर्ट असिस्टेंट के पद पर काम कर रही थीं. उनका कहना था कि चीफ जस्टिस द्वारा उनके साथ किए ‘आपत्तिजनक व्यवहार’ का विरोध करने के बाद से ही उन्हें, उनके पति और परिवार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है.

महिला कर्मचारी जांच समिति की कार्यवाही में यह कहकर शामिल नहीं हुई थीं कि उन्हें लीगल रिप्रेजेंटेशन की अनुमति नहीं दी गई. बाद में समिति के फैसले पर महिला ने निराशा जताई थी.

इस मामले के सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल के ऑफिस ने बयान जारी कर इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इनके पूरी तरह से झूठ और बेबुनियाद होने की बात कही थी.

महिला का आरोप था कि उन्हें नौकरी से निकालने के बाद दिल्ली पुलिस में तैनात उनके पति और देवर को भी निलंबित कर दिया गया था.

हालांकि जून 2019 में उनके पति और देवर को दिल्ली पुलिस ने बहाल कर दिया था.

ये भी पढ़ें :  मरकज मामले में असली दोषी तो केजरीवाल की सरकार है ?

वहीं, मार्च 2019 में महिला के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक मामला दर्ज हुआ था. उन पर आरोप था कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में नौकरी दिलाने के नाम पर एक व्यक्ति से पैसे लिए थे.

जस्टिस गोगोई का राजनैतिक अतीत भी है. उनके पिता केशब चंद्र गोगोई 1982 में छोटे से कार्यकाल के लिए असम के मुख्यमंत्री थे. उनका राजनीतिक संबंध कांग्रेस पार्टी से था. पांच भाई-बहनों में रंजन गोगोई के बड़े भाई अंजन गोगोई एयर मार्शल रह चुके हैं. रंजन गोगोई का जन्म 18 नवंबर, 1954 को असम के डिब्रूगढ़ में हुआ था. वहीं के डॉन बॉस्को स्कूल में उन्होंने प्राथमिक शिक्षा पाई. उसके बाद दिल्ली के सेंट स्टीफेन्स कॉलेज से इतिहास में स्नातक किया.

जस्टिस गोगोई ने अपने पिता की तरह ही कानूनी पेशे को अपनाया. हालांकि, उनके पिता बाद में राजनीति में चले गए. रंजन गोगोई साल 1978 में गुवाहाटी हाईकोर्ट में इनरॉल हुए और वहीं लॉ प्रैक्टिस शुरू की. करीब 22 सालों तक उन्होंने संविधान से जुड़े मामलों, टैक्सेशन और कंपनी लॉ से जुड़े मामलों की प्रैक्टिस की.

इसके बाद 22 फरवरी 2001 को उन्हें गुवाहाटी हाईकोर्ट में ही परमानेंट जज बनाया गया. गुवाहाटी हाईकोर्ट में नौ साल से ज्यादा समय तक जज रहने के बाद सितंबर 2010 में उनका तबादला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के लिए कर दिया गया. फरवरी 2012 में फिर उन्हें वहीं का चीफ जस्टिस बनाया गया. उसी साल अप्रैल 2012 में जस्टिस गोगोई को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया.