JNU मामले में पुलिस ने सिर्फ ABVP वालों को गवाह बनाया, कैसे होगा न्याय?

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) राजद्रोही नारेबाज़ी मामले में एफआईआर में कई रोचक चीज़ें सामने आई हैं. चार्जशीट में पुलिस ने 77 गवाहों को शामिल किया है. गवाह के रूप में जिन 14 छात्र छात्राओं को शामिल किया गया है उनमें से 12 छात्रों का संबंध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से है जबकि दो अन्य छात्र उस संगठन के समर्थक हैं. पुलिस के गवाहों की सूची में एबीवीपी की जेएनयू यूनिट के पूर्व सचिव संदीप कुमार सिंह, एबीवीपी के राज्य कार्यकारी सदस्य ओंकार श्रीवास्तव, घटना के दौरान एबीवीपी की जेएनयू यूनिट के अध्यक्ष रहे एबीवीपी की शोध शाखा के मौजूदा राष्ट्रीय संयोजक आलोक कुमार सिंह, एबीवीपी से जेएनयूएसयू के पूर्व संयुक्त सचिव सौरभ शर्मा के नाम शामिल हैं.

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी विशेष पड़ताल में इस बात का खुलासा किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, इन 77 गवाहों में 24 पुलिसकर्मी, जेएनयू के 14 छात्र-छात्राएं और ज़ी न्यूज़ के चार कर्मचारी शामिल हैं. अन्य गवाहों में सुरक्षाकर्मी, फैकल्टी मेंबर्स, कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम के अधिकारी और मोबाइल ऑपरेटर शामिल हैं.

इसके अलावा जेएनयू में संगठन के पूर्व ऑफिस सचिव अंकुर आर्यन, एबीवीपी के एसआईएस के पूर्व अध्यक्ष भाष्कर ज्योति, जेएनयू में एबीवीपी की पूर्व संयुक्त सचिव प्रियदर्शिनी, संगठन की दिल्ली इकाई की संयुक्त सचिव अनिमा सोनकर, जेएनयू में एबीवीपी के पूर्व संयुक्त सचिव सुकांत आर्या का भी का नाम है.

इसके अलावा अन्य गवाहों में एबीवीपी की जेएनयू यूनिट के पूर्व उपाध्यक्ष बिनीत लाल, संगठन की पूर्व कार्यकारी सदस्य श्रुति अग्निहोत्री, संगठन के सदस्य राम नयम वर्मा शामिल हैं. वहीं दो अन्य गवाहों के नाम अखिलेख पाठक और आनंद कुमार हैं जो कि एबीवीपी समर्थक हैं.

राजद्रोह मामले में दिल्ली पुलिस ने बीते 14 जनवरी को छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार समेत 10 लोगों के ख़िलाफ़ 1,200 पन्नों का आरोप-पत्र दाखिल कर कहा था कि वे परिसर में एक कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे थे और उन पर 9 फरवरी, 2016 में विश्वविद्यालय परिसर में देश विरोधी नारों का समर्थन करने का आरोप है.

पुलिस ने 9 फरवरी, 2016 को आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान जेएनयू के पूर्व छात्रों उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य के खिलाफ राष्ट्र-विरोधी नारे लगाने का भी आरोप लगाया है. यह कार्यक्रम संसद हमला मामले के मास्टरमाइंड अफज़ल गुरु को फांसी की बरसी पर आयोजित किया गया था. इस मामले में कश्मीरी छात्र-छात्राओं आकिब हुसैन, मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, उमर गुल, रईया रसूल, बशीर भट, बशरत के ख़िलाफ़ भी आरोप-पत्र दाखिल किए गए.

पुलिस ने आरोप-पत्र में दावा किया है कि गवाहों ने यह भी कहा कि कन्हैया घटनास्थल पर मौजूद थे जहां प्रदर्शनकारियों के हाथों में अफजल के पोस्टर थे. अंतिम रिपोर्ट में कहा गया है कि कन्हैया ने सरकार के ख़िलाफ़ नफ़रत और असंतोष भड़काने के लिए खुद ही भारत विरोधी नारे लगाए थे.

हालांकि दिल्ली की एक स्थानीय अदालत ने बीती 19 जनवरी को दिल्ली पुलिस के इस आरोप पत्र पर संज्ञान लेने से मना कर दिया था. कोर्ट कहा कि दिल्ली पुलिस ने दिल्ली सरकार से आरोप पत्र दाख़िल करने के लिए ज़रूरी अनुमति नहीं ली. इसके बाद पुलिस ने कोर्ट को बताया था कि वह अनुमति की प्रक्रिया में है और 10 दिन के भीतर अनुमति ले लेगी.

भाजपा के सांसद महेश गिरी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की शिकायत पर वसंत कुंज (उत्तर) पुलिस थाने में 11 फरवरी, 2016 को अज्ञात व्यक्तियों के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए तथा 120बी के तहत एक मामला दर्ज किया गया था. एबीवीपी ने कथित आयोजन को ‘राष्ट्र विरोधी’ बताते हुए शिकायत की थी जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसकी अनुमति रद्द कर दी थी. इसके बावजूद यह आयोजन हुआ था.

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