इसरो को इतना हतोत्साहित मत करो मोदी प्रेमियो !

किसी आदमी को सुबह से शाम तक कहोगे कि तुम फेल हो गए तो कोई बात नहीं. शाबाश तुमने कोशिश तो की . शाबाश फेल हुए तो कुछ नहीं हमें तुम्हारी कोशिशों पर गर्व है.शाबाश इस बार नाकाम हुए कोई बात नहीं अगली बार ट्राई करना. उस आदमी पर क्या बीतेगी. क्या सोचेगा वो. आप उसे ढाढस नहीं बंधा रहे आप उसे बार बार नाकाम और फेल कह रहे हैं. एक सफल आदमी को 100 में से 99 नंबर लाने के बाद कह रहे हैं कि बेटा अगली बार 100 की कोशिश करना इस बार नहीं कर पाए तो कोई बात नहीं. उपर से आप सोचतो हो कि आपने महानता की है.
देश के प्रधानमंत्री से शुरू हुआ ये प्रलाप देश भऱ में चल रहा है. भगवान के लिए बस करिए. शांति धारण करिए. बुद्धि का उपयोग कीजिए. आप अनजाने में वो डायलॉग दोहरा रहे हैं जो किसी ने किसी दूसरे मकसद से बोला था. ये एक्जाम के मार्क्स नहीं हैं. वो कोई ड्रोन नहीं उड़ा रहे थे जिसमें लेफ्ट राइट ऊपर नीचे करने का बटन हो. वो एक थ्रो था जो बाउंड्री से विकेट पर फेंका गया था. बाउंड्री से विकेट के बीच की स्थितियों का आप अध्ययन कर सकते हं जान सकते हैं कि हवा किधर की है . दिशा क्या है. हवा का घनत्व कितना है तापमान का असर कितना है. नमी कितनी है और फोर्स भी तय तर सकते हैं लेकिन जब आप धरती से हज़ारों किलोमीटर दूर किसी दूसरे ग्रह पर कोई वस्तु फेंकते हैं तो रास्ते में कई ऐसे फैक्टर होते हैं जो बदलते रहते हैं. सोलर फ्लेयर, तापमान. कई ग्रहों गुरुत्वाकर्षण और उसके अलावा भी कम से कम दो चार सौ वजहें हैं जो इस पर प्रभाव डालती है.
जब आप इतनी सारी चीज़ों का अध्ययन करते हैं और एक बार गोला दागने के बाद बैठकर हर समय उसकी स्थिति पर नजर रख रहे होते हैं तो ऐसा वातावरण चाहिए होता है जो उसमें आप बेहतर तरीके से अपने काम पर फोकस कर सकें. कल्पना कीजिए कि आप कोई बेहद ज़रूरी काम करना चाहते हों आर या पार वाली स्थिति हो और आपका बेहद भारी भरकम रौब दाब वाला बॉस मालिकों की नजर में झूठे नंबर बनाने के लिए आपकी कंप्यूटर की स्क्रीन में नज़र घुसाकर बैठ जाए. क्या आप काम कर पाओगे. इसरो वालों की खोपड़ी पर दो मोदी बैठा था. ऊपर से आपकी हर हरकत पर देश का मीडिया कैमरा गड़ाए बैठा हो. घर में आपके बच्चे आपका काम देख रहे हों. हर तरफ आपकी चर्चा हो भले ही इससे फर्क पड़े या नपड़े लेकिन दबाव बढ़ता है फर्क भी पड़ता है.
खैर विज्ञान को उसके हाल पर छोड़ दीजिए. करने दीजिए काम. इसरो सैकड़ों मिशन कर चुका है. आपके खोपड़ी पर ने बैठने के बावजूद उसने काम करके दिखाया है. आपके कैमरे लगातार लाइव नहीं कर रहे थे फिर भी उसने परफॉर्म किया. हर काम में दखल मत करो. और ये सरकार नहीं है जिसे आप सफलता असफलता पर आंकों. इसरो ने कोई गलत बटन नहीं दबाया जिससे गड़बड़ हुई हो. वो सफल हुआ है. पत्रकार गिरिजेश वशिष्ठ का फेसबुक पर पोस्ट