पाकिस्तानी सेना चाहती है भारत में मोदी राज करें, अंतर्राष्ट्रीय एक्सपर्ट्स की राय, इसीलिए हमला हुआ !

दक्षिण एशिया मामलों की सुरक्षा विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर क्रिस्टीन फ़ेयर का मानना है कि पाकिस्तान की अंदरूनी कट्टरपंथी शक्तियां और खासतौर पर वहां की सरकार चाहती है कि भारत में मोदी ही प्रधानमंत्री बनें. उन्होंने कहा कि मोदी के भारत में होने से पाकिस्तान मं  आंतरिक समस्याओं से लड़ना आसान हो जाता है.

मैं बार-बार ये कहती रही हूं कि इन हमलों का संबंध भारत में होने वाले आम चुनावों से भी है. भारत में हुए किसी भी हमले की व्याख्या चुनाव नहीं कर सकते हैं क्योंकि भारत में हमले होते रहे हैं.लेकिन जिस तरह का हमला पुलवामा में हुआ है उससे पता चलता है कि हमले को काफ़ी सोच-समझकर अंजाम दिया गया है.

हमले में सैन्यबलों को निशाना बनाया गया. ये बेहद भड़काने वाला हमला है क्योंकि भारतीय अपनी सेना को लेकर बेहद भावुक हैं.

ये अमरीकियों से उलट हैं. अमरीका में जब आम लोग मारे जाते हैं तब जनता भड़कती है, इसके उलट भारत में जब सैनिक मारे जाते हैं तब जनता भड़क उठती है.

ये भी पढ़ें :  "2014 में पेशावर के स्कूल में कत्लेआम के पीछे भारत का हाथ" UN में पाकिस्तान का आरोप

हमले में सीआरपीएफ़ को निशाना बनाया गया, ये अर्धसैनिक बल भारत के सबसे कम फ़ंड वाले बलों में से एक है. जो हमला किया गया वो बेहद वीभत्स था.

जैश-ए-मोहम्मद ने साल 2000 के बाद से कोई आत्मघाती हमला नहीं किया था. 19 साल बाद ये हमला किया गया और इसका उद्देश्य ही भावनाएं भड़काना था. हमले का समय भी बेहद सोच-समझकर चुना गया और इसी वजह से हमें ऐसी भारी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है.

भारत के लोग भले ये ना सुनना चाहें लेकिन सच ये है कि भारत के चुनावों में मोदी की जीत से सबसे ज़्यादा फ़ायदा पाकिस्तान के डीप स्टेट को ही होता है. इसकी वजह ये है कि पाकिस्तान में इस समय कई तरह के घरेलू दबाव हैं. सबसे बड़ी समस्या पश्तून आंदोलन की है जो पाकिस्तान की अखंडता के लिए बड़ा ख़तरा है. बलूचिस्तान में चल रहा संघर्ष भी पाकिस्तान के लिए ख़तरा है. एक मज़बूत भारत की ओर से ख़तरा पाकिस्तान को आंतरिक तौर पर एकजुट करता है.

ये भी पढ़ें :  सावधान: ये मैसेज देशभक्ति वाले नहीं देशद्रोह के हैं, फॉरवर्ड करने से पहले इसे पढ़ लें

अगर पाकिस्तान के नज़रिए से देखें तो कुछ चरमपंथियों का मारा जाना उसके रणनीतिक एजेंडे को प्रभावित नहीं करता है. लेकिन भारत में मोदी की जीत सुनिश्चित करने के लिए हमला करना पाकिस्तानी डीप स्टेट की रणनीतिक ज़रूरतों से मेल ज़रूर खाता है.

पाकिस्तानियों में कांग्रेस की जीत उस तरह से हिंदू अंध-राष्ट्रवादी भारत -जिसमें मुसलमान हशियों पर हों- का डर पैदा नहीं कर पाती है जिस तरह से बीजेपी की जीत करती है.

मैं बार-बार ज़ोर देकर ये कहती रही हूं कि हमले का समय और तरीक़ा भारतीय चुनावों में मोदी की जीत सुनिश्चित करने के लिए हुआ दर्शाता है. इससे पहले भारतीय चुनावों में मोदी की जीत सुनिश्चित नहीं थी लेकिन अब जो हालात हैं उनमें मोदी का जीतना लगभग तय है और यही पाकिस्तानी ख़ुफ़िया तंत्र चाहता है.

ये भी पढ़ें :  थोड़ी नज़र इस सब्सिडी और तुष्टिकरण पर भी डालिए मोदी जी

क्योंकि एक मज़बूत भारत, ऐसा भारत जिससे पाकिस्तान डरे, पाकिस्तानियों में अधिक भ्रम पैदा करता है और उन्हें पाकिस्तानी सेना के पीछे खड़ा कर देता है भले ही पाकिस्तानी सेना पश्तूनों को मारने जैसे बेहद अलोकप्रीय काम करे.

भारत के लोगों को ये भी समझना होगा कि ‘पाकिस्तानी डीप स्टेट को मोदी की जीत से फ़ायदा पहुंचता है’ के तर्क का ये मतलब क़त्तई नहीं है कि हमले का कोई नाता मोदी से है. लेकिन मोदी की जीत पाकिस्तानी सेना की ज़रूरत है क्योंकि इससे वो पश्तूनों और बलूचों पर किए जा रहे अत्याचारों को छुपा सकती है.

प्रोफ़ेसर क्रिस्टीन फेयर से बात की बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा से बातचीत का हिस्सा, सौजन्य BBC )

Leave a Reply