नोएडा में 100 से ज्यादा बिल्डरों पर शिकंजा, जब्त हो सकती है संपत्ति

नोएडा प्राधिकरण का करीब 20 हजार करोड़ रुपये दबाकर बैठे बकायेदार बिल्डरों पर शिकंजा कसने की तैयारी है. प्राधिकरण अब हर बिल्डर को नोटिस जारी करेगा. इसके लिए हर बिल्डर के खातों की समीक्षा करनी प्राधिकरण ने शुरू कर दी है. प्राधिकरण इन बिल्डरों को डिफाल्टर भी घोषित कर चुका है.

नोएडा प्राधिकरण ने वर्ष 2007 से बिल्डरों को नोएडा में जमीन आवंटित करनी शुरू की थी. पहले प्राधिकरण 30 प्रतिशत पैसा एडवांस और बाकी पैसा किश्तों में लेकर जमीन आवंटित करता था लेकिन बसपा शासनकाल में 25 अक्तूबर 2009 को एक शासनादेश जारी हुआ. इसके तहत कहा गया कि जमीन की कीमत का 10 प्रतिशत जमा कर आवंटन कर दिया जाए.

बाकी किश्ते आठ साल में 16 छमाही किश्त में लेने का आदेश दिया गया. इस कारण वर्ष 2009 से 2012 तक के बीच ग्रुप हाऊंसिग के तहत बिल्डरों को काफी भूखंड आवंटित किए गए. एडवांस पैसा जमा करने के कुछ साल बाद ही बिल्डरों ने किश्तें जमा करनी बंद कर दी थीं. अधिकतर बिल्डरों ने पांच साल में एक भी पैसा नोएडा प्राधिकरण में जमा नहीं किया है.

20 हजार में से करीब 11 हजार करोड़ रुपये ग्रुप हाउसिंग से जुड़े 94 बिल्डर व बाकी पैसा व्यावसायिक संपत्तियों से जुड़े बिल्डरों पर बकाया है. प्राधिकरण का बिल्डरों पर यह पैसा जमीन आवंटन का है. पहले चरण में ग्रुप हाऊसिंग से जुड़े बकायेदार बिल्डरों को नोटिस जारी किए जाएंगे. इस बारे में नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ इंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि प्राधिकरण ने डिफाल्टर बिल्डरों के खातों की समीक्षा करनी शुरू कर दी है. समीक्षा में हर बिल्डर पर कुल बकाए की सटीक जानकारी सामने आ जाएगी. इसके बाद संबंधित बिल्डरों को नोटिस जारी किए जाएंगे.

प्राधिकरण पर आर्थिक संकट बढ़ा

बिल्डरों के किश्तों में पैसा देना रोकते ही वर्ष 2013 से नोएडा प्राधिकरण की आर्थिक हालत खराब होनी शुरू हो गई. करीब पांच साल पहले प्राधिकरण की अलग-अलग बैंकों में 3500 करोड़ के आसपास एफडी थी. इसके ब्याज से ही प्राधिकरण अपने खर्चे उठाता था. अब करीब 700-800 करोड़ के आसपास ही एफडी रह गई है.

बिल्डरों के लिए रि-शेड्यूलमेंट पॉलिसी

बकाया जमा करने को बिल्डरों के लिए नोएडा प्राधिकरण ने रि-शेड्यूलमेंट पॉलिसी निकाल रखी है.  इसके तहत बकाए पर ब्याज में छूट दी जा रही है. यह योजना 31 मई तक चलेगी. इससे पहले अक्तूबर से दिसंबर 2018 तक भी योजना निकाली थी लेकिन एक भी बिल्डर ने पैसा जमा नहीं किया.

प्राधिकरण की वेबसाइट पर भी बकाया देख सकते हैं

संपत्ति का पंजीकरण कराने के बाद उससे संबंधित कितना बकाया है, इसकी जानकारी प्राधिकरण के वेबसाइट से ली जा सकती है. इसको आम लोगों के लिए सार्वजनिक नहीं किया जाएगा.

बकाया नहीं देने के कारण फ्लैट भी अटके

बिल्डरों की ओर से बकाया नहीं मिलने के कारण नोएडा प्राधिकरण इनको ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट भी जारी नहीं कर रहा है. काफी संख्या में फ्लैट तैयार हैं. 

आम्रपाली से जुड़े मामले में जबाव तैयार करने में जुटा प्राधिकरण

आम्रपाली परियोजनाओं में खरीदारों को घर कैसे मिले और प्राधिकरण को अपना बकाया करीब 1930 करोड़ कैसे प्राप्त हो, आदि मुद्दों पर नोएडा प्राधिकरण ने जबाव तैयार करना शुरू कर दिया है. आम्रपाली से जुड़े मामले में नोएडा प्राधिकरण को 30 अप्रैल व 1 मई को सुप्रीम कोर्ट में जबाव देना है. उम्मीद है कि इस सुनवाई में अधूरी पड़ी परियोजनाओं को पूरा करने को लेकर कोई रास्ता निकलेगा. ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का भी आम्रपाली पर करीब 2800 करोड़ रुपए बकाया हैं. इसके अलावा बिल्डर को काफी पैसा बैंक व अन्य एजेंसियों को देना है. नोएडा में आमप्राली की सात परियोजनाएं हैं. नोएडा-ग्रेटर नोएडा में स्थित आम्रपाली की परियोजनाओं में करीब 46 हजार लोग फ्लैट पाने के इंतजार में हैं.

एनबीसीसी भी शुरू नहीं कर सका है काम

सुप्रीम कोर्ट में भी काफी समय से आम्रपाली से जुड़ा मामला चल रहा है. बीच में उम्मीद बनी थी कि इन अधूरी पड़ी परियोजनाओं को एनबीसीसी पूरा करेगा लेकिन पैसों की कमी के चलते यह मामला बीच में अटक गया. बीते करीब दो महीने में आम्रपाली के अस्पताल व मॉल निलाम किए गए लेकिन अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने में काफी पैसे की आवश्यकता है.