करकरे पर साध्वी प्रज्ञा के आरोप झूठे और बकवास साबित हुए !

साध्वी प्रज्ञा की टॉर्चर की शिकायत पूरी जांच और पड़ताल के बाद बकवास और झूठी साबित हो चुकी है. उनकी शिकायत पर बाकायदा मानवाधिकार आयोग ने निष्पक्ष और व्यापक जांच कराई और पाया गया कि साध्वी के आरोप निराधार हैं. उसी समय ये जानकारी सबके संज्ञान में थी. अब साध्वी प्रज्ञा को बीजेपी के संकट मोचन के तौर पर लाया गया है. उनके ज़रिए कांग्रेस के समय में हिंदुओं पर अत्याचार की कहानियां बेची जा रही हैं.

आपको बता दें कि मालेगांव ब्लास्ट में गिरफ्तारी के बाद साध्वी प्रज्ञा ने एटीएस अधिकारीयों पर मारपीट और टॉर्चर करने के गंभीर आरोप लगाए थे. आरोपों में यहाँ तक कहा गया था कि खुद तत्कालीन एटीएस चीफ हेमंत करकरे ने भी उनसे पूछताछ के दौरान शारीरिक यातनाएं दी थीं.

इसके बाद अगस्त 2014 में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने मामले मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को एक कमेटी बनाकर साध्वी प्रज्ञा को टॉर्चर किये जाने की जांच करने के निर्देश दिए थे. यानी दूसरे राज्य की पुलिस को जांच सौपी गई. तब मध्यप्रदेश में बीजेपी की सरकार थी और शिवराज सिंह मुख्यमंत्री ते.

साध्वी प्रज्ञा द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारीयों की एक टीम गठित की गयी. इस टीम में डीआईजी आर एस खैरे, के एच खुर्लेकर (डिप्टी सुपरिंटेंडेंट यरवाडा सेंट्रल जेल), एम कुलकर्णी (इंस्पेक्टर सीआईडी, पुणे) और रश्मि जोशी दक्षिता समिति (एनजीओ) आदि शामिल थे.

साध्वी प्रज्ञा के आरोपों की जांच पड़ताल के लिए जांच टीम जगह जगह गई. उसने जेल, कोर्ट और उस अस्पताल में जाकर सबूतों की तलाश की यहां तक कि अस्पताल से रिकॉर्ड भी खंगाले कि क्या वहां साध्वी का इलाज हुआ था. साध्वी ने दावा किया था कि उसे इस अस्पताल में भर्ती किया गया. अस्पताल के कर्मचारियों से भी पूछताछ हुई. लेकिन एक भी जगह से आरोप सही साबित नहीं हुआ. आखिरकार 2015 में यह मामला बंद कर दिया गया और रिपोर्ट में कहा गया कि अब इस मामले में आगे जांच की आवश्यकता नहीं है.

बड़ी बात ये है कि वर्ष 2008 में मालेगांव ब्लास्ट में साध्वी प्रज्ञा की गिरफ्तारी के बाद उन्हें 24 अक्टूबर 2008 और 03 नवंबर 2008 को नासिक के चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया लेकिन उन्होंने मजिस्ट्रेट के समक्ष भी ऐसी कोई बात नहीं कही जिससे यह साबित हो कि उन्हें शारीरिक रूप से टॉर्चर किये गया है. 2011 के सुप्रीमकोर्ट के फैसले में भी इस बात का उल्लेख है.

ये रिपोर्ट टाइम्स ग्रुप के अखबारों में तफ्लील से प्रकाशित हुई है

ऐसे हालात में आरोप लग रहे हैं कि क्या साध्वी प्रज्ञा झूठ फैलाकर हिंदू मुसलमान को बांटने वाली राजनीति को आगे बढ़ा रही हैं. क्या 2019 के चुनाव में बीजेपी साध्वी के झूठे आरोपों को बेचकर वोट बनाने में लगी है. क्या पार्टी के पास कोई और विकल्प नहीं बचा है कि चुनाव में जा सके. क्या बीजेपी को हार का डर है जो ऐसी हरकतों पर उतारू है.