क्या किम जोंग उन की मौत की खबर सही है? पहले भी कई बार हो चुकी है ‘मौत’

जो भी देश अमेरिका की गुलामी स्वीकार नहीं करता और पूजीवादी अर्थव्यवस्था को नहीं अपनाता उसे अमेरिका अपना दुश्मन मानता है. पश्चिमी मीडिया उसकी छवि खराब करता है. भले ही सद्दाम हुसैन हों या किम जोंग सभी पश्चिम मीडिया के दुष्प्रचार का शिकार हुए हैं. अब फिर उनके कोमा में होने की खबर उड़ा दी गई है. इससे पहले अप्रैल महीने में सीएनन ने बाकायदा किम जोंग की मौत की खबर भी छापी थी जिसकी आजतक पुष्टि नहीं हे सकी है.

अब एक बार फिर दावा किया जा रहा है कि किम जोंग उन की मौत हो गई है. इसके साथ ही इस बात की संभावना भी जताई गई है कि अब देश की कमान उनकी बहन किम यो जोंग के हाथों में सौंपी जा सकती है. अगर ऐसा हुआ तो यो जोंग दुनिया की पहली महिला वामपंथी राष्ट्र प्रमुख होंगी. दरअसल, कुछ दिन पहले ही किम जोंग ने बहन को प्रमोशन दिया था जिसके बाद वह और भी ज्यादा शक्तिशाली हो गई हैं. उन्हें लेकर ये प्रचार किया गया है कि वो बेहद क्रूर हैं

ये भी पढ़ें :  मंदिर बनाने आज से विदेश यात्रा पर जाएंगे मोदी, फिलिस्तीन को भी लगाएंगे मस्का

अंग्रेजी अखबर मिरर के मुताबिक किम यो जोंग बेहद क्रूर हैं. माना जाता है कि यो जोंग इस बात का फैसला करती थीं कि जोंग उन तक कौन से मुद्दे ले जाए जाने के लिए अहम हैं. कहा जाता है कि यो जोंग पार्टी के लोगों को उन्हें सम्मान से पेश आने के लिए कहती थीं. जब उत्‍तर कोरिया के लाइव फायर मिलिट्री अभ्‍यास का दक्षिण कोरिया ने विरोध किया तो किम यो जोंग ने कहा था कि ‘डरे हुए कुत्‍ते भौंक रहे हैं.’

‘दक्षिण कोरिया की धुर विरोधी’

उत्तर कोरिया के बारे में जानकारी रखने वाले कई विशेषज्ञों ने किम यो जोंग को दक्षिण कोरिया का धुर विरोधी बताया है. इतना ही नहीं कहा तो यह भी जा रहा है कि उन्हीं के आदेश पर किम की सेना ने सीमा पर मौजूद सहयोग स्थलों को बम से उड़ा दिया था. किम यो-जोंग पहली बार 2018 में चर्चा में आईं जब उन्होंने दक्षिण कोरिया का दौरा किया. वे किम वंश की पहली ऐसी सदस्य थीं जिन्होंने पहली बार दक्षिण कोरिया की धरती पर कदम रखा था. अपनी इस पहले से उन्होंने दोनों परंपरागत प्रतिद्वंद्वी देशों को नज़दीक लाने की कोशिश की थी.

ये भी पढ़ें :  इमरान का मोदी पर तंज़, ऊंचे पदों पर बैठे लोगों की सोच छोटी

ऑर्गनाइजेशन ऐंड गाइडेंस डिपार्टमेंट में किम यो जांग के बढ़ते कद ने उन्हें वर्कर्स पार्टी के ब्यूरोक्रैट्स की नजरों में नॉर्थ कोरिया का नंबर 2 बना दिया. OGD में उन्हें अहमियत मिलना इस बात का भी सबूत है कि कई साल से उन्हें इसके लिए तैयार किया जा रहा था कि जोंग उन को कुछ होता है तो यो जोंग उनकी जगह लेने के लिए ढल चुकी हैं.