पहले राफेल पर अंबानी, अब अडानी, 45000 करोड़ को ठेके पर नौसेना से भिड़ी सरकार

पहले राफेल अब पनडुब्बी, पहले अंबानी, अब अडानी, सरकार ने फिर एक बार डिफैंस के ठेकों नें में गुजराती दोस्तों को लाभ दिलाने की कोशिश की है. सिर्फ कोशिश ही नहीं की है बल्कि सरकार नौ सेना से भिडी हुई है और रक्षा मंत्रालय नौसेना पर दबाव बना रहा है कि वो अडानी की कंपनी से ही पनडुब्बी ले ले.

45000 करोड़ रुपये के इस 75-आई प्रोजेक्ट के लिए अडाणी डिफेंस और हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल) जॉइंट वेंचर के तहत आवेदन किया था जिसे नेवी ठुकरा चुकी है. लेकिन अब रक्षा मंत्रालय का कह रहा है कि इस तरह के ज्वॉइंट वेंचर्स को मौका दिया जाना चाहिए. मंत्रालय का कहना है कि यह प्रोजेक्ट ‘मेक इन इंडिया’ के तहत सबसे बड़े डिफेंस प्रोजेक्ट में से है.

इकनॉमिक टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक ‘मेक इन इंडिया’ के तहत सबसे बड़े डिफेंस प्रोजेक्ट के लिए पांच आवेदन सामने आए थे जिसमें से नेवी की ‘एम्पॉवर्ड कमेटी’ ने दो को चुना है. इसमें मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और लारसन एंड टूब्रो शामिल हैं. इन दोनों को ही सबमरीन बनाने में अच्छा अनुभव है. ‘एम्पॉवर्ड कमेटी’ के सुझाव को दरकिनार करते हुए सरकार अडाणी जेवी को भी 75-आई प्रोजक्ट के सौदे के लिए चुन रही है. इनका कोई अनुभव नहीं है. सरल शब्दों में कहें कि इनको इस बारे में कुछ ता जाता नहीं है. ठीक वैसे हीजैसे अंबानी को विमान बनाने का कोई अनुभव नहीं था और उन्हें राफेल बनाने का ठेका मिल गया था.

दोनों के बीच विवाद की यही वजह है. डिपॉर्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन ने सुझाव दिया है कि एचएसएल-अडाणी ज्वॉइंट वेंचर को भी शामिल किया जाना चाहिए. बता दें कि हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड डिपॉर्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन के अधीन है. वहीं सरकार के इस प्रोजक्ट के लिए अडाणी जेवी को चुनने पर कांग्रेस जमकर हमलवार है. कांग्रेस का कहना है कि मोदी सरकार देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रही है.

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए पिछले दरवाजे से एंट्री दिलवा रहे हैं. ‘एम्पॉवर्ड कमेटी’ ने दो आवेदनों को स्वीकार किया लेकिन मोदी सरकार अडाणी जेवी को भी इसके लिए चुन रही है. अडाणी डिफेंस को पनडुब्बी निर्माण का कोई अनुभव नहीं है.