दिल्ली चुनाव में किसे मिला मुसलमान वोट, बीजेपी को मिले कितने वोट ?

दिल्ली चुनाव (Delhi election) में मुस्लिम वोट (muslim vote) किसको पड़े. मुसलमानों ने दिल्ली चुनाव में एक पार्टी को वोट दिया या कई पार्टी को इंडिया टुडे (india today) एक्सिस माइ इंडिया के एक्जिट पोल (exit poll) ने जो आंकड़े दिए हैं वो कहते हैं कि मुसलमानों ने इस बार एक ही जगह वोट नहीं डाले. मुसलमानों ने तमाम भड़काऊ और सांप्रदायिक माहौलके बावजूद बीजेपी से नफरत नहीं की और उसे भी ठीक ठाक संख्या में वोट दिए.


दिल्ली में इस बार चुनाव हुआ तो सबसे बडा मुद्दा था हिंदू और मुसलमान, तरह तरह से दिल्ली में ध्रुवीकरण की कोशिश हुई. शाहीन बाग पर राजनीति हुई तो भी उसे सीएए से ज्यादा हिंदू मुसलमान के बीच बांटने की कोशिश की.

हो सकता है कि किसी को उम्मीद न हो लेकिन एक्सिस माइ इंडिया इंडियाटुडे एक्जिट पोल के नतीजे बताते हैं कि मुसलमानों ने बीजेपी को भी वोट दिया और कांग्रेस को भी. और तो और बाकी पार्टियों को भी मुसलमानों से खूब वोट मिले. अगर आप पिछड़े, बाल्मीकि, अनुसूचित जाति और मुसलमानों से तुलना करें तो मुसलमानों का प्रतिशत आम आदमी पार्टी को वोट करने वालों में बहुत ज्यादा नहीं था.

बाल्मीकि समाज के 67 फीसदी लोगों का वोट केजरीवाल को मिला, ओबीसी के 65 फीसदी और और अनुसूचित जाति के 65 फीसदी लोगों ने केजरीवाल को वोट दिया तो मुसलमानों के वोट भी 69 फीसदी ही थे. यानी सीएए और एनआरसी के बावजूद मुसलमानों नें आप को चुना
मुसलमानों ने सीएए जैसे बड़े मामले के बावजूद बीजेपी का साथ नहीं छोड़ा. ये अलग बात है कि उन्होंने दूसरों के मुकाबले बीजेपी को कम वोट दिए. लेकिन फिर भी ये प्रतिशत कम नहीं था. बीजेपी को जहां 9 फीसदी सीट मिलने की भी उम्मीद नहीं है वहीं 9 फीसदी मुसलमानों ने बीजेपी को वोटिंग की.

ये वोट दूसरे तबकों के वोट से ज्यादा था लेकिन इतना कम भी नहीं था. बीजेपी को बाल्मीकियों से भी सिर्फ 18 फीसदी वोट मिले. अनुसूचित जाति के लोगों को भी बीजेपी पसंद नहीं आई और उन्होंने भी बीजेपी को 24 फीसदी वोट दिए. सबसे बेहतर वोट बीजेपी को अगर किसी ने दिया तो वो थे ओबीसी. ओबीसी ने बीजेपी को 38 फीसदी वोट दिए जबकि उन्होंने आप को भी 54 फीसदी वोटों से नवाजा.
मुसलमानों ने बीजेपी ही नहीं कांग्रेस को भी प्यार दिया. कांग्रेस को मुसलमानों से 15 फीसदी वोट मिले हैं. यानी सबसे ज्यादा वोट कांग्रेस से ही मुसलमानों से मिले. कांग्रेस को परंपरागत ओबीसी वोट सिर्फ पांच फीसदी मिले, बाल्मीकि वोट मिले सिर्फ 9 फीसदी, अनुसूचित जाति के वोट भी सिर्फ 5 फीसदी ही कांग्रेस के खाते में आए. अगर मुसलमान न होते तो कांग्रेस की हालत और भी ज्यादा खराब होती .
निचोड़ निकालें घनघोर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और बीजेपी की नेताओं के भड़काऊ बयानों के बावजूद एक तरफा वोट नहीं डाले हैं. मुसलमानों ने किसी हर पार्टी को वोट दिया, मुसलमानों ने बीजेपी को भी अच्छा खासा वोट दिया. उस बीजेपी को जिसका पूरा विमर्ष इस चुनाव में बीजेपी के विरोध पर टिका था.