पहलवान मुलायम ने आखिरी दिन मोदी को दी धोबी पछाड़, ये तारीफ नहीं थी

16वीं लोकसभा के आखिरी बैठक में सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने लोकसभा में कहा कि उनकी कामना है कि नरेंद्र मोदी फिर से पीएम बनें. उन्होंने हमेशा सभी की मदद की है. वे चाहते हैं कि एनडीए के सभी सांसद फिर से जीतकर आएं. मुलायम के इस बयान के बाद यूपी का सियासी पारा एक बार फिर गरमाने की उम्मीद है.

इस बयान पर तपाक से बीजेपी और उसका सोशल मीडिया सेल सक्रिया हो गया . योगी आदित्यनाथ ने तो यहां तक कह दिया कि मुलायम सिंह के मुंह से सच निकल गया है लेकिन इस बयान का वो मतलब नहीं है जो निकाला जा रहा है.

पत्रकार गिरिजेश वशिष्ठ का कहना है कि  ये बयान 16वीं लोकसभा के लिए विदायी भाषण था और विदायी भाषण की गरिमा होती है. मुलायम सिंह ने उसी संसदीय गरिमा का पालन किया और सभी सांसदों को दोबारा चुने जाने की शुभकामनाएं दी. इतना ही नहीं उन्होंने पीएम मोदी को भी फिर से पीएम बनने की शुभकामनाएँ दीं.

वशिष्ठ कहते हैं कि ये परंपरा रही है कि संसद का आखिरी दिन एक भावुक पल की तरह होता है जिसमें कई सांसद दोबारा नहीं आने वाले होते हैं उनके लिए ये विदाई का पल होता है. ऐसे में राजनीति की तल्खी की जगह सौहार्द्र होना चाहिए.

वशिष्ठ कहते हैं पीएम मोदी को भी वैसी ही गरिमा का प्रदर्शन करना चाहिए था इसकी जगह उन्होंने भाषण में तल्ख बातें कहीं . संसद का विदायी भाषण होने के कारण अच्छी बातों की चर्चा होती तो ठीक रहता इसके विपरीत पीएम मोदी ने गरिमा के विपरीत तल्खी वाला भाषण रखा. उन्होंने आंखों की गुस्ताखियों का जिक्र किया, गले लगने और और गले पड़ने की बात की. कांग्रेस गोत्र का जिक्र भी किया. लेकिन अफसोस ये कि एक सही भावना से दिए गए भाषण को राजनीतिक उलझाव में डाल दिया गया. पीएम मोदी चाहते तो एक स्टेट्समेन वाला भाषण देकर हमेशा के लिए तारीफ बटोर सकते थे

प्रधानमंत्री की गरिमा के अनुरूप अगर उन्होंने भाषण दिया होता तो हालात दूसरे होते. लेकिन उन्होंने ये मौका गंवा दिया. दूसरी मुलायम सिंह के भाषण की खास बात ये भी रही कि दूसरे दिन मोदी के भाषण से ज्यादा चर्चा मुलायम सिंह पर रही. यह भी चर्चा का विषय रहा कि मुलायम ने अहंकारी माने जाने वाले मोदी को तीन बार प्रणाम करने को मजबूर कर दिया.

उधर, इस बयान पर सपा प्रवक्ता और एमएलसी सुनील सिंह साजन ने कहा कि जो नेता जी (मुलायम) ने कहा है, वह लोकसभा के आखिरी दिन होने वाली भारतीय संसद की परंपरा का हिस्सा था. इसे किसी भी तरह पॉलिटिकल एंगल से नहीं देखना चाहिए. चुनाव में जाने से पहले सभी सदस्य एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं. वही नेता जी ने भी किया. उन्होंने चुनाव में मोदी जी को शुभकामनाएं दी.

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