YES BANK : 6 साल में मोदी जी ने 10 बार देश को लाइन में लगाया

मई 2014 में नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने थे. 2019 में दोबारा उनकी ताजपोशी हुई. उनकी सरकार को अब छह साल पूरे होने को हैं. इस बीच नोटबंदी समेत कई ऐसे मौके आए जब लोगों को लाइनों में खड़े होने को मजबूर होना पड़ा. इसकी शुरुआत नोटबंदी से हुई थी. हालिया मामला यस बैंक से निकासी पर लगे प्रतिबंध और ग्राहकों के बीच असुरक्षा की भावना से मचे हड़कंप से जुड़ा है. लोग अपनी जमा पूंजी निकालने के लिए लाइन में खड़े हैं. घटनाक्रम पर गौर करें तो मोदी सरकार के छह साल के कार्यकाल में 10 से ज्यादा बार लोग इसी तरह की अव्यवस्था का सामना कर चुके हैं और लाइनों में लग चुके हैं.

नोटबंदी: 8 नवंबर, 2016 को रात आठ बजे पीएम नरेंद्र मोदी ने टीवी चैनलों पर देश के नाम संबोधन में नोटबंदी लागू करने का ऐलान किया. पीएम के ऐलान के साथ ही 500 और 1000 रुपये के करंसी नोट प्रचलन से बाहर हो गए. रातों-रात इन करंसी में जमा लोगों के पैसे अवैध हो गए. सरकार ने उसे जमा करने और बदलने की मियाद तय कर दी. इसके बाद लोगों में हड़कंप मच गया और पूरा देश सुबह होते ही बैंकों के चक्कर लगाने लगा लेकिन अगले दिन बैंक बंद मिले. बाद में जब बैंक खुले तो पूरा देश अपना काम छोड़ बैंकों के सामने कतार में खड़े दिखे. पैसे निकालने के लिए भी लोग एटीएम के सामने घंटों कतार में खड़े रहे. नोटबंदी के दो साल बाद सरकार ने माना कि नोटबंदी की वजह से तीन कर्मचारियों और एक ग्राहक की मौत हुई थी.

एनआरसी: साल 2015 में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) अद्यतन की प्रक्रिया शुरू की गई थी. 31 दिसंबर, 2017 को एनआरसी लिस्ट प्रकाशित हुई. इसमें 3.29 करोड़ आवेदकों में से 1.9 करोड़ के नाम प्रकाशित किए गए. एनआरसी शुरू होने और उसके बाद तक देशभर में लोग अपने कागजात ठीक कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के आगे लाइन में खड़े रहे. दिसंबर 2019 में जब केंद्र सरकार ने सीएए लागू किया तब देशभर के लोगों में और हड़कंप मचा. पश्चिम बंगाल से लेकर दक्षिणी राज्यों तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र में लोग सरकारी दफ्तरों के आगे लाइन में खड़े होकर आज भी कागजात बनवा रहे हैं. NPR में भी माता-पिता के जन्मस्थान और जन्मतिथि को लेकर लोगों में खौफ है.

जीएसटी: 30 जून और एक जुलाई 2017 की मध्य रात्रि में मोदी सरकार ने संसद से ऐतिहासिक जीएसटी कानून पास करवाया. सरकार ने दावा किया कि इससे टैक्स टेररिज्म खत्म होगा और कर प्रणाली आसान होगी लेकिन ऐसा होता नहीं दिखा. छोटे से लेकर बड़े कारोबारी जीएसटी रजिस्ट्रेशन को लेकर परेशान रहे और सीए के दफ्तरों के चक्कर काटते रहे. सही मैकेनिज्म के अभाव में उनका कारोबार कई हफ्ते तक बाधित रहा. जीएसटी रजिस्ट्रेशन नहीं होने की वजह से छोटे व्यापारियों को सामान नहीं मिले. इससे उनकी परेशानी बढ़ी और वो दफ्तरों के चक्कर लगाते रहे.

KYC: सरकार ने जब बैंक खातों, निवेश संस्थानों, टेलिफोन, मोबाइल कंपनियों और गैस कनेक्शन जैसी सुविधाओं में केवाईसी अनिवार्य किया तो देश भर के लोगों को एकबार फिर लाइन में लगने को मजबूर होना पड़ा.

आधार अपडेशन: जब सरकार ने जरूरी सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने के लिए आधार अपडेशन को अनिवार्य कर दिया, पैनकार्ड को आधार से लिंक करने भी डेडलाइन तय की तब फिर से देशभर के लोग लाइनों में खड़े नजर आए.

पीएनबी बैंक घोटाला: जनवरी 2018 में जब करीब 13000 करोड़ रुपये के पीएनबी बैंक घोटाले का पर्दाफाश हुआ तो निवेशकों से लेकर बैंक ग्राहकों में हड़कंप मच गया. लोगों के बीच पीएनबी के डूबने की अफवाह फैल गई. इससे परेशान लोगों ने अपने-अपने पैसे निकालने शुरू कर दिए. इस कड़ी में देशभर में लोग पीएनबी के चक्कर लगाने लगे और उन्हें लाइनों में खड़ा होना पड़ा.

जनधन खाता: पीएम मोदी ने जब अपनी महत्वकांक्षी योजना जन-धन खाते को मूर्त रूप दिया तो लोग खासकर ग्रामीण इलाकों में बैंक खाता खुलवाने के लिए लंबी-लंबी कतारों में खड़े हो गए. लोगों को उम्मीद थी कि उनके खाते में सरकार सीधे पैसे ट्रांसफर करेगी.

पीएमसी: पिछले साल जब महाराष्ट्र के पीएमसी बैंक में घोटाला हुआ, तब भी लोग अपने पैसे निकालने के लिए बेचैन हो उठे. RBI द्वारा निकासी की सीमा तय कर दिए जाने की वजह लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. अपना गाढ़ी कमाई निकालने के लिए कई दिनों तक बूढ़े-बुजुर्ग, महिला-बच्चे लाइन में खड़े रहे.