पुलवामा के बाद एक साल में सामने आया मोदी का सच

आज वैलन्टाइन्स डे पर जब आप प्यार का एक गुलाब बढ़ाएं तो दो गुलाब ज़रूर खरीदें. एक गुलाब उन शहीदों के नाम जो पुरवामा में शहीद हुए और दूसरा गुलाब उस मोहब्बत के नाम जो दो देश, दो कौम, दो जातियों और दो इनसानों को जोड़ती है. मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि जब जब मोहब्बत कमज़ोर होगी नफरत बढ़ेगी और पुलवामा नफरत के इंसानियत की हदों से बड़ा हो जाने का सबूत है. पुलवामा का साल पूरा होने के बावजूद आज बहुत कुछ याद करने को है जो अच्छा नहीं है. लेख लंबा न हो जाए इसलिए बिंदुवार लिख रहा हू.

  1. प्रधानसेवक जी ने एलान किया था कि सरकार ने फैसला ले लिया है कि पाकिस्तान का मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस ले लिया गया है. आजतक कुछ नहीं हुआ. पाकिस्तान का दर्जा अपनी जगह कायम है. लोगों ने कहा कि नहीं होगा तो उन्हें पाकिस्तान का शुभचिंतक मान लिया गया.
  2. सरकार ने पाकिस्तान से आयात पर 200 फीसदी की ड्यूटी लगाने का एलान किया लेकिन ऐसा हुआ नहीं. कुछ दिन के बाद सब्जियां और फल समेत सभी सामान पाकिस्तान से अबाधरूप से आने लगा. हां सेंधा नमक चूंकि पाकिस्तान से ही आता है उसके दाम दुगुने से ज्यादा हो गए. नमक यथावत आता रहा लेकिन दाम बढ गया. अब आयात सामान्य है.
  3. पाकिस्तान को मिलने वाला पानी बंद करने की बात भी कही गई. लेकिन सरकार के पास ऐसा कोई जरिया ही नहीं था कि पानी रोक सके लेकिन चुनाव में इसे भुनाया आजतक पानी वैसा ही जा रहा है जैसे पहले जाता था.
  4. सरकार ने पाकिस्तान के उपर सर्जिकल स्ट्राइक का दावा किया अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की जांच में कहा गया कि ये दावा झूठा है. पाकिस्तान में बम से सिर्फ एक कौए के मारे जाने की बात कही गई. सेटेलाइट तस्वीरें भी आई. बीबीसी और रायटर्स ने भी इसका खंडन किया. दावा किया गया कि हमले में मसूद अजहर का मदरसा तबाह हो गया और वो मारा गया. बीबीसी ने वहां जाकर बताया कि मदरसा सुरक्षित है.
  5. अगले ही दिन पाकिस्तान के एफ-16 विमान भारत की सीमा में घुसे और भाग गए. उनका पीछा करते हुए भारत के विमान पाक सीमा में घुसे जहां पायलट अभिनंदन को पाक सेना बंदी बनाने में कामयाब हो गई. पाकिस्तान ने अभिनंदन को बड़ा दिल वाला होने का नाटक करते हुए भारत को वापस कस दिया. इस पर भारत में चुनावी मुद्दा बना और प्रधानमंत्री मोदी चुनाव जीत गए
  6. प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन्होने हमला किया है उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. एक साल हो चुका है पुलवामा हमले का एक भी जिम्मेदार नहीं पकड़ा गया है. जांच एनआईए के पास है.

अब आपको बताते हैं कि जब हमला हुआ तो सरकार का रवैया क्या था. वो मामले को बेहद तनावपूर्ण बताती रही लेकिन खुद की प्रक्रियाओं में कोई शिद्दत नहीं दिखी

  1. पुलवामा हमले के दूसरे ही दिन प्रधानमंत्री नई दिल्ली रेल्वे स्टेशन पर बनारस के लिए जाने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखा रहे थे इतना ही नहीं उन्होंने हंसहंसकर लोगों का अभिवादन भी किया. चुनाव की तरीख नजदीक थी और वो नहीं चाहते थे कि उद्घाटन बगैरह रुक जाएं. एक दिन भी वो रुक न सके
  2. पुलवामा में हमला हुआ तो प्रधानसेवक जी डिस्कवरी की डॉकूमेन्ट्री के लिए शूटिंग में हिस्सा ले रहे थे. कहा गया कि मोबाइल नेटवर्क नहीं था इसलिए उन्हें पता नहीं चल सका कि क्या हुआ है इसलिए फोटो खिंचवाते रह गए. इससे पहले फोटो सेशन की बात से ही इनकार किया गया था. लिकन स्थानीय मीडिया की फोटो के साथ छपी खबरों के बाद ये बहाना बनाया गया. सोचिए क्या प्रधानमंत्री के पास सेटेलाइट फोन के साथ वन विभाग के संचार समेत दुनिया का आधुनिकतम संचार नेटवर्क था फिर उन्हें जानकारी क्यों न दी जा सकी.
  3. साउदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ( दुनिया में आतंकवाद के सबसे बड़े प्रणेता और धन देने वाले,आतंकवाद के समर्थक विचार वहाबियत के समर्थक, इसी शख्स पर पत्रकार खशोगी की हत्या का आरोप था )  भारत आए तो मोदी मातम के माहौल में उनके गले मिलकर ठहाके लगाते दिखे.
  4. बीजेपी नेता , देश के सबसे करप्ट मुख्यमंत्री के तौर पर बदनाम येदियुरप्पा का बयान आया कि पुलवामा का बड़ा राजनैतिक लाभ मिल सकता है. ये बीजेपी के लिए ठीक रहा.
  5. हमले के बाद देश भर में कश्मीरियों के प्रति नफरत फैलाई गई. मेघालय के राज्यपाल तथागत राय ने कहा कि कश्मीरियों का बहिस्कार करना चाहिए. अमरनाथ यात्रा न जाएं और कश्मीरियों से सामान न खरीदे. इसके परिणाम स्वरूप कश्मीरियों पर देश भर में कई जगह हमले हुए.

आजतक के डिप्टी एक्जीकि्टिव प्रोड्यूसर गिरिजेश वशिष्ठ का लेख, साभार – फेसबुक