सरकारी जुल्म की इंतेहा है मजदूरों के साथ बदसलूकी

रोते, बिलखते, फूट पड़ने और अपनी दुर्दशा को बर्दाश्त न कर पाने के दर्द को आप बड़ी आसान से महसूस ककर सकते हैं. मजदूर सोच रहे हैं कि जो सड़क हादसे में चले गए वो तो मुक्ति पा गए लेकिन जो जीते जी नरक भोग रहे हैं उनका क्या किया जाए. सरकारी बेरहमी, बेरुखी और जुल्म से मजदूरों का जो हाल बन गया है वो धरती पर ही नरक से कम नहीं है.

मकान मालिकों ने किराया न दे पाने के कारण मजदूरों को घऱ से निकाल दिया है और सरकार सड़क पर नहीं रहने दे रही. हारकर अपने घर की ओर चले तो सरकार ने रोक लिया और नयी तरह की यातना देनी शुरू कर दी. एक ही जगह हजारों लोग इकट्ठा कर दिए गए वो भी बिना सोशल डिस्टेंसिंग के. ठीक वैसे ही जैसे जमातियों को उनकी इमारत में कैद कर दिया गया था और वहां से उन्हें निकलने ही नहीं दिया गया. नतीजा हुआ कोरोना का फैल जाना.

सीएम योगी के निर्देश के बाद गाजीपुर-यूपी बॉर्डर पर कई प्रवासी मजदूर रोक दिए गए हैं. पुलिस उन्हें अपने क्षेत्र में घुसने नहीं दे रही है. इस वजह से बॉर्डर पर काफी भीड़ बढ़ गई है. नाराज फंसे मजदूर बार-बार ट्रैफिक रोकने की कोशिश कर रहे थे. हालांकि ट्रैफिक पुलिस ने उन्हें सड़क से हटाया और यातायात व्यवस्था बहाल की.

शनिवार को उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा कि सीएम योगी ने औरैया सड़क हादसे पर संवेदना व्यक्त करते हुए सभी वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी प्रवासी नागरिक को पैदल, अवैध या असुरक्षित वाहनों से यात्रा न करने दिया जाए.

उन्होंने कहा कि प्रवासियों के लिए हर बॉर्डर पर 200 बसें बॉर्डर के जिलों में व्यवस्थित की गई हैं. अब तक यूपी में 449 ट्रेनें आ चुकी हैं. यह पूरे देश में सबसे अधिक संख्या है. इन ट्रेनों से 5 लाख 64 हजार लोग यात्रा कर चुके हैं. शनिवार को ही 75 ट्रेनें आएंगी, 286 और ट्रेनों के संचालन को सहमति दी गई है.

अवनीश अवस्थी ने कहा कि अगर पूरी संख्या जोड़ी जाए तो लगभग 9 लाख 50 हाजर लोगों को या तो लाया जा चुका है, या लाने वाले हैं. अन्य प्रदेशों से प्रदेश की सीमा में पैदल, दो पहिया वाहन और ट्रक के जरिए किसी भी प्रवासी व्यक्ति आने की अब इजाजत नहीं होगी.

मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि प्रवासियों को क्वारनटीन, शेल्टर होम या अन्य जिलों में भेजे जाने के लिए पर्याप्त संख्या में प्राइवेट और स्कूल बसों की व्यस्था कराई जाए. पैदल व्यक्ति अगर किसी प्रकार से जिले में आते हैं तो उन्हें वहीं रोककर स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आदेशों के अनुरूप कार्रवाई की जाए. किसी भी प्रवासी को सड़क या रेलवे लाइन पर न चलने दिया जाए.