मनोज तिवारी ने की प्रवेश वर्मा, कपिल मिश्रा समेत इन बड़े नेताओं को पार्टी से निकालने की मांग ?

दिल्ली प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष अध्यक्ष मनोज तिवारी ने बीजेपी के कई बड़े नेताओं को पार्टी से निकालने की बात की है. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के चुनाव में भागीदारी के कानूनी अधिकार भी छीन लेने चाहिए. मनोज तिवारी के निशाने पर प्रवेश वर्मा, कपिल मिश्रा, प्रकाश जावड़ेकर और अनुराग ठाकुर जैसे नेता थे.


जब उनसे पूछा गया कि बीजेपी सांसद परवेश वर्मा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आतंकवादी कहा और केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उस भाषण का बचाव किया जिसमें आप भी शामिल थे तो तिवारी ने कहा, “मैंने इसकी (भाषण) निंदा की है और मैंने चुनावों से पहले ऐसा किया. प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने भी इसकी निंदा की है. हमारे संविधान में गद्दारों (राष्ट्र-विरोधी) को दंडित करने के प्रावधान हैं और मुझे उन पर पूरा भरोसा है.”


जब मनोज तिवारी से पूछा गया कि पिछले साल दिसंबर में बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने दिल्ली के कनॉट प्लेस में CAA के समर्थन में एक रैली निकाली, जहाँ वो और उनके समर्थक ‘गोली मारो’ का नारा बुलंद कर रहे थे तो तिवारी ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूं कि ऐसे नफरत फैलाने वाले भाषण देने वालों को स्थायी रूप से हटा दिया जाए.

तिवारी ने कहा कि ऐसे लोगों के नफरत भरे बयानों से और भाषणों से उनकी पार्टी को चुनावों में बड़ा नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि जो लोग नफरत फैलाने वाले भाषण देते हैं, उन्हें पार्टी से निकाल दिया जाना चाहिए. दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष ने इससे भी कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि ऐसे लोगों के चुनाव में भागीदारी के कानूनी अधिकार भी छीन लिए जाने चाहिए.


इंडियन एक्सप्रेस के खास कार्यक्रम आइडिया एक्सचेंज में तिवारी ने कहा कि उनकी पार्टी हार के कारणों की समीक्षा कर रही है कि क्यों अनुमान के मुताबिक चुनावों में सीटें नहीं मिल सकीं?
तिवारी ने कहा, “हां, जावड़ेकर मेरे पास बैठे थे और उन्होंने ऐसा किया था लेकिन मेरे पास यहां बताने के लिए दो बिंदु हैं. संदर्भ चाहे जो भी रहा हो, वह घृणास्पद भाषण था और हमारी पार्टी को उसके कारण बड़े नुकसान का सामना करना पड़ा. हमने उस भाषण की निंदा की थी और आज भी कर रहा हूं.”

हम लोगों को एक ऐसी प्रणाली शुरू करनी चाहिए, जहां नफरत फैलाने वाले भाषण देने वाले लोग अपना कानूनी अधिकार (चुनाव लड़ने के लिए) खो दें. उन्होंने कहा, “अगर इस तरह की व्यवस्था लागू की जाती है, तो मैं व्यक्तिगत तौर पर (पार्टी अध्यक्ष के रूप में नहीं) इसका समर्थन करूंगा.” तिवारी ने कहा कि इस संदर्भ में ओखला विधायक अमानतुल्ला खान या हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के भाषणों का भी परीक्षण किया जाना चाहिए. हमारा देश सबसे सुंदर देश है.”

तिवारी ने कहा कि 2013 में हमने 33 फीसदी वोट शेयर के साथ 32 सीटें जीती थीं. इस बार हमारा आंकलन था कि अगर 38 फीसदी वोट शेयर मिला तो हमारी सीटें 36 के ऊपर जा सकती हैं लेकिन ऐसा नहीं हुआ. तिवारी ने कहा कि बावजूद इसके 2015 से 2020 में चुनावी परिदृश्य एकदम बदल सा गया क्योंकि ये चुनाव दो तरफा हो गया. कांग्रेस इस चुनाव में 9 फीसदी वोट से खिसक कर मात्र 4.2 फीसदी पर आ गई.